Global Meet 2026: नई दिल्ली के ताज पैलेस का दरबार हॉल शनिवार को किसी सम्मेलन स्थल से ज्यादा एक बड़े परिवार के मिलन जैसा नजर आया। वजह थी आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्रों की ग्लोबल मीट, जहां देश-विदेश से आए एलुमनी एक बार फिर अपनी पुरानी यादों, साझा अनुभवों और भविष्य की नई चुनौतियों के साथ जुड़े। 3 जनवरी 2026 को आयोजित इस खास आयोजन में तकनीक, नेतृत्व और इनोवेशन पर चर्चा के साथ-साथ 178 साल पुरानी विरासत का गर्व भी साफ झलक रहा था। एआई के बदलते दौर में खुद को दोबारा गढ़ने की सोच के साथ यह मीट सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले समय की दिशा तय करने का मंच बन गई।
एआई के युग में पुनर्निर्माण पर फोकस (Global Meet 2026)
इस साल की ग्लोबल मीट का मुख्य विषय रहा “एआई के युग में पुनर्निर्माण”। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस तरह से शिक्षा, उद्योग, प्रशासन और स्टार्टअप्स की दुनिया को बदल रहा है, इस पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने माना कि आने वाले समय में तकनीक के साथ तालमेल बैठाना ही सफलता की कुंजी होगी। इसी सोच के साथ युवाओं को इनोवेशन और रिसर्च की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

स्टार्टअप्स को मिला खास मंच
समिट के दौरान स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर भी खास जोर दिया गया। इस मौके पर पांच स्टार्टअप्स को कैश अवॉर्ड के लिए चुना गया। एलुमनी नेटवर्क का मानना है कि आईआईटी रुड़की की पहचान केवल बेहतरीन इंजीनियर तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नए आइडिया और उद्यमिता को समर्थन देना भी इसकी मजबूत परंपरा रही है।
2005 से शुरू हुई ग्लोबल मीट की परंपरा
आईआईटी रुड़की एलुमनी की इस वैश्विक मीट की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। उस समय श्री सुबोध और श्री कामेंद्र की पहल पर इस स्तर की पहली ग्लोबल मीट का आयोजन किया गया था। दोनों ही अपने समय में रुड़की विश्वविद्यालय छात्र संघ (RUSA) के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी इस पहल ने आज एक मजबूत और व्यापक एलुमनी मंच का रूप ले लिया है, जो हर साल और भी ज्यादा प्रभावी होता जा रहा है।
178 साल की विरासत और एलुमनी का मजबूत जुड़ाव
आईआईटी रुड़की एशिया के सबसे पुराने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी संस्थानों में से एक है। 178 वर्षों की लंबी यात्रा में इस संस्थान ने देश को हजारों कुशल इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और प्रशासक दिए हैं। एलुमनी अपने संस्थान के साथ भावनात्मक और पेशेवर दोनों स्तरों पर गहरे जुड़े हुए हैं, और यही जुड़ाव इस ग्लोबल मीट में साफ नजर आया।
देश की नीतियों और उद्योग से जुड़े दिग्गजों की मौजूदगी
इस आयोजन में कई नामचीन और वरिष्ठ पूर्व छात्रों ने शिरकत की। कार्यक्रम में सचिव (पावर), सचिव एनडीएमए, चेयरमैन ट्राई, सीएमडी कॉन्कोर, सीएमडी आईआरसीओएन, सीएमडी बाल्मर लॉरी, डीजी एनसीसीबीएम, आईजी डीपी, पूर्व डीजी डीआरडीओ और उनके प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल रहे। उद्योग जगत के दिग्गज शोवा मुंजाल के चेयरमैन को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा सबसे वरिष्ठ पूर्व छात्र इं. श्री प्रेम व्रत, इं. कैव. सुरेंद्र, इं. श्री जेपी शुक्ला सहित कई अनुभवी एलुमनी ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा बढ़ाई। इन वरिष्ठों के अनुभवों से युवा एलुमनी को सीखने और प्रेरणा लेने का मौका मिला।
एलुमनी एसोसिएशन की मजबूत टीम
वर्तमान में आईआईटी रुड़की एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष इं. विनय कुमार त्रिपाठी हैं, जो पहले रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में एलुमनी गतिविधियों को नई दिशा मिली है। ऑनररी सेक्रेटरी के रूप में इं. आर. के. सिंह, जो ईआईएल में सीजीएम हैं, संगठन को सक्रिय रूप से संभाल रहे हैं। वीपी इंटरनेशनल इं. अनिल शेरावत और इं. अभय के साथ मिलकर यह टीम एलुमनी नेटवर्क को और मजबूत करने में जुटी है।
विजन आईएएस का सहयोग और मुख्य अतिथि का संदेश
इस भव्य आयोजन का प्लैटिनम स्पॉन्सर विजन आईएएस रहा। इसके संस्थापक इं. अजय सिंह खुद आईआईटी रुड़की के सम्मानित पूर्व छात्र हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को एलुमनी समुदाय में काफी सराहा जाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के. के. पंत रहे। एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने संस्थान की विरासत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एलुमनी की सक्रिय भागीदारी से संस्थान को वैश्विक स्तर पर और मजबूत पहचान मिलती है।
विदेशों में भी सक्रिय एलुमनी नेटवर्क
मीट के दौरान यह भी बताया गया कि अमेरिका और कनाडा में आईआईटी रुड़की एलुमनी एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IITRAANA) के जरिए पूर्व छात्र लगातार जुड़े रहते हैं। यूएस ईस्ट कोस्ट चैप्टर अमेरिका के सबसे बड़े एलुमनी समूहों में से एक है, जो हर साल जून में अपना वार्षिक सम्मेलन आयोजित करता है।
भविष्य की ओर देखती ग्लोबल मीट
कुल मिलाकर, आईआईटी रुड़की की यह ग्लोबल मीट पुराने रिश्तों को फिर से जोड़ने के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का मंच बनी। एआई के दौर में खुद को नए सिरे से गढ़ने, स्टार्टअप्स और रिसर्च को बढ़ावा देने और समाज के लिए उपयोगी योगदान देने का संकल्प इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा।






























