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Guru Har Krishan Sahib: मुगल क्यों कहते थे गुरु हरकृष्ण जी को ‘बाला पीर’? औरंगजेब भी रह गया था नतमस्तक!

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 30 Mar 2026, 05:48 AM | Updated: 30 Mar 2026, 05:48 AM

Guru Har Krishan Sahib: सिखों के दस गुरु हुए और सबकी अपनी अपनी बलिदान, और ज्ञान की कहानियां है। सिक्ख धर्म के प्रचार औऱ उसके विचारो को लोगो तक पहुंचाने के लिए सिख गुरुओ ने कई बड़े कदम उठाये थे, एक तरफ पांचवे गुरु अर्जन देव तक को सिख गुरु शास्त्र को उठाने के बजाये धर्म और अहिंसा के मार्ग को सर्वोपरि मानते थे तो वहीं छठे गुरु हरगोबिंद जी ने पहली बार ये समझा था कि अगर दुश्मनों से लड़ना है तो अस्त्र और शस्त्र दोनो उठाना ही होगा.. फिर आये सातवे गुरु गुरु हर राय जो कि छठे गुरु हरगोबिंद जी के पोते थे.. जिन्हें मात्र 14 साल की उम्र में ही गुरु बनाया गया था।

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सिख धर्म और सिख गुरुओ – Sikhism and Sikh Gurus

लेकिन जब आठवे गुरु को चुनने का समय आया तब गुरु हर राय के दो बेटों में से पहले बेटे रामराय को गुरु बनाने के बारे में विचार किया जा ही रहा था कि औरंगजेब के बुलावे पर गुरु साहिब के बजाये रामराय को वहां भेजा गया.. रामराय ने  धीरमल एवं मिनहास द्वारा सिख धर्म और सिख गुरुओ के बारे में फैलाई गई गलत भ्रांति को दूर करने की कोशिश में गुरबाणी की त्रुटिपूर्ण व्याख्या की।

जो कि उस वक्तराजनैतिक परिस्थितियों एवं गुरु मर्यादा की नजर में गुनाह था, नतीजा  राम राय जी को तुरंत सिख पंथ से निष्कासित किया और कड़ा दंड दिया गया। उस वक्त गुरु साहिब के दूसरे बेटे हर किशन जी मात्र 5 साल के थे.. गुरु साहिब ने उन्हें ही आठवा गुरु घोषित कर दिया था। लेकिन उन्होंने भी अहिंसा का मार्ग ही चुना.. लेकिन फिर भी क्यों मुगल उनसे डर गए आखिर ऐसा हुआ जिसके कारण मुगल आठवे गुरु को बाला पीर बुलाने लगे थे।

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बाला पीर की कहानी – The Story of Bala Peer

दरअसल जब बड़े बेटे राम राय जी ने ये सुना कि गुरु साहिब की गद्दी मात्र 5 साल के गुरु हरकृष्ण जी को दे दी गई है तो वो गुस्से और जलन में भर गए। उन्होंने तुरंत मुगल शासक औरंगजेब से उनकी शिकायत कर दी.. लेकिन औरंगजेब तो वैसे ही मौका खोजता था सिखो को प्रताड़ित करने का उसने तुरंत राजा जय सिंह को तुरंत गुरु हरकृष्ण साहिब को कीरतपुर से लाने का आदेश दिया। लेकिन उसे तब ये नहीं पता था कि एक 5 साल का बच्चा मुगलों की सोच पर ऐसा प्रहार करेगा कि मुगल भी उसके कायल हो जायेंगे और उन्हें बाला पीर कहने लगेंगे।

हिन्दू साहित्य का प्रखर विद्वान

दरअसल जब जय सिंह गुरु साहिब को लेने गए थे, तब गुरु साहिब ने इंकार कर दिया था, लेकिन राजा जय सिंह ने बार बार आग्रह किया कि वो एक बार दिल्ली चलें.. बिना मन के भी वो दिल्ली की तरफ निकल पड़े.. वहीं दूसरी तरफ चेचक उस वक्त दिल्ली में काफी फैला हुआ था। गुरु साहिब की यात्रा जब कुरुक्षेत्र पहुंची तब उन्होंने पहली बार महान ईश्वर प्रदत्त शक्ति का परिचय दिया था। कहा जाता है कि  हिन्दू साहित्य का प्रखर विद्वान एव आध्यात्मिक ज्ञाता लालचंद ने  एक गूँगे बहरे निशक्त व अनपढ़ व्यक्ति छज्जु झीवर को गुरु साहिब के सामने लाकर गीता का ज्ञान देने को कहा था। गुरुसाहिब ने छज्जू को सरोवर में स्नान करा कर बिठाया जो गुरु साहिब जो छड़ी धारण करते थे, उसे छज्जु के सिर पर घुमा दी..जिससे वो ठीक हो गया और उसे गीता का सार सुना दिया।

जब छोटी सी उम्र में बन गए सेवक

गुरु साहिब कुरुक्षेत्र के बाद जब दिल्ली पहुंचे तो राजा जय सिंह ने औऱ सिख संगतों ने उनका बड़ी धूमधाम से स्वागत किया। गुरु साहिब का व्यावहार सबसे साथ बेहद प्रेमपूर्ण और अपनत्व वाला था, जिससे वो जल्द ही प्रचलित हो गए थे। उन दिनो में दिल्ली चेचक की चपेट में थी.. लोग चेचक की बिमारी से मर रहे थे, लेकिन गुरु साहिब ने उतनी छोटी सी उम्र में बिना जाति धर्म का भेदभाव किये बिना सबकी देखभाल औऱ सेवा करनी शुरु कर दी.. उनके तेज के प्रभाव से लोग छीक हो रहे थे.. लोगो के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी तो औरगंजेब ने भी हस्तक्षेप नहीं किया।

एक छोटा सा बालक इतनी ईमानदारी औऱ निस्वार्थ भाव से बिना भेदभाव के सेवा कर रहा था, जिसे देखकर मुगलो ने उन्हें सम्मान ने बाला पीर कहना शुरु कर दिया था। हालांकि इस दौरान वो खुद भी चेचक से ग्रसित हो गए थे, और उनकी 7 साल पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई थी..छोटी सी ही उम्र में उन्होंने वो कर दिखाया था, जिसने केवल सिखों के ही नहीं बल्कि इस्लाम को मानने वालो को भी खुद के आगे नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया था। दिल्ली का बंग्ला साहिब गुरुद्वारा असल में राजा जय सिंह का महल है जिसमें गुरु हरकृष्ण राय दिल्ली आने के बाद रहे थे। औरंगजेब खुद बाला पीर से प्रभावित हुए बिना नहीं रहा था..ऐसा था उनका तेज.. उनकी पवित्रता।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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