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गाजियाबाद में फर्जी आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार, पुलिस जांच में खुले कई चौंकाने वाले राज

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 22 Nov 2024, 12:00 AM | Updated: 22 Nov 2024, 12:00 AM

Ghaziabad Fake IPS Arrested: गाजियाबाद में पुलिस ने एक फर्जी आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार किया है, जो 1979 बैच का रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बनकर अधिकारियों से मिला और अपने दोस्त को छुड़ाने की कोशिश की। जांच के दौरान आरोपी की पृष्ठभूमि और उसके फर्जीवाड़े को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं। फिलहाल साहिबाबाद पुलिस ने फर्जी आईपीएस अनिल कटियाल (68) और उसके साथी विनोद कपूर (69) को गिरफ्तार किया है।

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धोखाधड़ी की शुरुआत- Ghaziabad Fake IPS Arrested

आरोपी का नाम अनिल कटियाल (Ghaziabad fake IPS Anil Katiyal) है और उसने खुद को 1979 बैच का रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बताया। उसने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और अपने दोस्त विनोद कपूर निवासी गुरुग्राम को छुड़ाने की गुहार लगाई, जिसे इंदिरापुरम पुलिस ने 75 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है।

Ghaziabad fake IPS Anil Katiyal, Ghaziabad
Source: Google

पुलिस को शक हुआ

आरोपी के बयानों और उसकी कहानी में अंतर को देखते हुए पुलिस ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि अनिल कटियाल नाम का कोई आईपीएस अधिकारी असल में है ही नहीं।

गिरफ्तारी और अन्य खुलासे

पुलिस ने आरोपी अनिल कटियाल (Ghaziabad fake IPS Anil Katiyal) और उसके साथी विनोद कपूर को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा और डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिश पाटिल से मिलकर विनोद कपूर को फायदा पहुंचाने की कोशिश की थी।

अनिल कटियाल की पृष्ठभूमि- Fake IPS Anil Katiyal background story

पुलिस के मुताबिक, अनिल कटियाल के पिता चेतराम कटियाल आईआरएस अधिकारी थे। अनिल ने दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल और सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने 1979 में यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हुए। बाद में वे अमेरिका के येल विश्वविद्यालय से पीएचडी करने चले गए, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी।

Ghaziabad fake IPS Anil Katiyal, Ghaziabad
Source: Google

निजी क्षेत्र में ऊंचे पदों पर काम किया

पीएचडी छोड़ने के बाद अनिल ने हिंदुस्तान लीवर, यामाहा और वोडाफोन जैसी कंपनियों में ऊंचे पदों पर काम किया। वे 2015 में वोडाफोन कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स) के पद से रिटायर हुए।

फर्जी पहचान का फायदा

निजी क्षेत्र में काम करने के दौरान अनिल कई वरिष्ठ अधिकारियों, खासकर पुलिस अधिकारियों के संपर्क में आए। इन संबंधों का फायदा उठाकर उन्होंने खुद को रिटायर्ड आईपीएस और गृह मंत्रालय का सलाहकार बताकर कई बार अपने काम निकलवाए।

विदेश मंत्री से संपर्क करने का प्रयास

अनिल कटियाल का दावा है कि दुबई के अरबपति रियल एस्टेट कारोबारी राज साहनी से भी उनके संबंध हैं, जो धोखाधड़ी के मामले में फरवरी से यूएई की जेल में बंद हैं। राज साहनी को बचाने के लिए आरोपी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को मैसेज भेजकर खुद को उनका सहपाठी बताया और मिलने का समय मांगा। वह उनसे मिलकर दुबई के कारोबारी राज साहनी और उसके बेटों को जेल से बाहर निकलवाना चाहता था।

दिल्ली में बार का लाइसेंस लिया

व्हाट्सएप चैट से पता चला है कि हाल ही में अनिल ने खुद को 1979 बैच का रिटायर्ड आईपीएस बताकर एक निजी कंपनी के लिए बार का लाइसेंस हासिल किया। इसी तरह वह दिल्ली के आरटीओ, आबकारी विभाग के अफसरों को भी खुद को रिटायर्ड आईपीएस बताकर कई बार फायदा उठा चुका है।

मैं ठग नहीं हूं”

गिरफ्तारी के बाद अनिल कटियाल ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह कोई ठग नहीं है। हालांकि, जब उससे फर्जी आईपीएस होने के बारे में पूछा गया तो उसने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं कौन हूं।”

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