Emmanuel Macron India Visit: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिन की अहम भारत यात्रा पर मुंबई पहुंच चुके हैं। यह उनकी भारत की चौथी यात्रा है, लेकिन इस बार का दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी… इन सब पर गहन बातचीत होने वाली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैक्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना चाहता है और जल्द ही मुंबई व दिल्ली में विस्तृत चर्चा होगी। मैक्रों ने भी भारत रवाना होते समय कहा कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, डिजिटल और सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रतिनिधि आए हैं ताकि दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत किए जा सकें।
Welcome to India!
India looks forward to your visit and to advancing our bilateral ties to new heights. I am confident that our discussions will further strengthen cooperation across sectors and contribute to global progress.
See you in Mumbai and later in Delhi, my dear friend… https://t.co/5gDTDt6llp
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2026
मुंबई से दिल्ली तक व्यस्त कार्यक्रम (Emmanuel Macron India Visit)
मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत में रहेंगे। वह अपनी पत्नी ब्रिजित मैक्रों के साथ मुंबई पहुंचे, जहां महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। मुंबई में वह AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे, जो इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण है। इसके बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी, जहां रक्षा और रणनीतिक मामलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
AI में बढ़ता सहयोग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस यात्रा का बड़ा एजेंडा है। भारत और फ्रांस दोनों मानते हैं कि AI आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे को प्रभावित करेगा। ऐसे में दोनों देश न सिर्फ नई तकनीक विकसित करना चाहते हैं, बल्कि इसके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को भी सुनिश्चित करना चाहते हैं। मुंबई में आयोजित AI समिट को इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
रक्षा सहयोग: पुराने रिश्ते, नए प्रस्ताव
भारत और फ्रांस के रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। फ्रांस को भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार माना जाता है। इस बार बातचीत में कुछ अहम परियोजनाएं केंद्र में हैं।
Towards a stronger India-France strategic partnership!
Warm welcome to the President @EmmanuelMacron of the French Republic. He was warmly received by Governor of Maharashtra and Gujarat Shri Acharya Devvrat @ADevvrat at the Mumbai airport.
During the visit, PM @narendramodi… pic.twitter.com/s7ICeMYeA5
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) February 16, 2026
राफेल लड़ाकू विमान
2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदने का समझौता किया था। ये विमान अब भारतीय वायुसेना का अहम हिस्सा हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब चर्चा इस बात पर हो सकती है कि क्या भारत अतिरिक्त राफेल खरीदेगा या मौजूदा बेड़े के लिए नए हथियार और अपग्रेड लिए जाएंगे। राफेल को भारत की हवाई ताकत का मजबूत स्तंभ माना जाता है।
स्कॉर्पीन पनडुब्बियां
2005 में प्रोजेक्ट-75 के तहत भारत और फ्रांस के बीच 6 स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का सौदा हुआ था। इनका निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक में फ्रांसीसी तकनीक के सहयोग से किया जा रहा है। अब तक 5 पनडुब्बियां नौसेना में शामिल हो चुकी हैं और छठी जल्द तैयार होगी।
अब निगाहें प्रोजेक्ट-75 इंडिया पर हैं, जिसके तहत तीन और उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है। इसमें भी फ्रांस की भागीदारी बढ़ सकती है। पनडुब्बियां समुद्र में भारत की सामरिक क्षमता को नई मजबूती देती हैं।
हैमर मिसाइल
फ्रांस की कंपनी MBDA द्वारा बनाई जाने वाली हैमर (HAMMER) मिसाइल भी चर्चा में है। यह एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल राफेल से दागी जाती है और दूर से सटीक निशाना साध सकती है। संभावना है कि भारत में इसके संयुक्त निर्माण पर भी बात हो। इससे “मेक इन इंडिया” पहल को बल मिलेगा।
हेलीकॉप्टरों का संयुक्त निर्माण
फ्रांस की कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर्स भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छुक है। प्रस्ताव है कि भारत में ही हेलीकॉप्टरों का निर्माण किया जाए। इससे सेना को आधुनिक हेलीकॉप्टर मिलेंगे और देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
क्यों अहम है यह दौरा?
इस मुलाकात का महत्व सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित नहीं है।
- आत्मनिर्भर भारत: कई प्रस्तावों में तकनीक हस्तांतरण और भारत में उत्पादन की बात है, जिससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
- इंडो-पैसिफिक रणनीति: फ्रांस इस क्षेत्र में भारत का अहम साझेदार है। दोनों देश क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए साथ काम करना चाहते हैं।
- विश्वसनीय साझेदारी: फ्रांस को ऐसे साझेदार के रूप में देखा जाता है जो समय पर डिलीवरी और तकनीकी सहयोग में उदार रहा है।






























