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पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा के बीच दलित बेटी कृष्णा कुमारी ने रचा इतिहास, बनी सीनेटर

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 Jul 2024, 12:00 AM | Updated: 07 Jul 2024, 12:00 AM

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के 22,10,566 लोग हैं। यह पाकिस्तान की कुल आबादी का 1.18 प्रतिशत है। पाकिस्तान में हिंदू आबादी का अधिकांश हिस्सा गरीब है और देश की संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व भी बहुत कम है। लेकिन अगर इसी छोटी सी आबादी का कोई जन देश की गरीबी से उठकर कुछ करने में कामयाब होता है तो ये पाकिस्तान के लिए इतिहासिक क्षण बन जाता है। ऐसे ही कुछ किया मुस्लिम बहुल पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थार की रहने वाली कृष्णा कुमारी कोलही ने। दरअसल वह पाकिस्तान में सेनेटर  (राज्यसभा सांसद)  चुनी जाने वाली पहली हिंदू-दलित महिला बनी हैं।

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45 वर्षीय कोल्ही बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से निर्वाचित हुए हैं। पाकिस्तान के ‘द डॉन’ के अनुसार कृष्णा सिंध प्रांत की उस सीट से जीती हैं जो महिलाओं के लिए आरक्षित थी। कृष्णा ने चुनाव में तालिबान से जुड़े एक मौलाना को हराया है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का हाल

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Source: Google

कौन है कृष्णा कुमारी कोलही?

सीनेट में कृष्णा का चुनाव पाकिस्तानी महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। कोल्ही सिंध प्रांत के थार के अलग-थलग पड़े नगरपारकर जिले में रहती हैं। पिता कृष्णा एक किसान थे, जिनका जन्म एक कम आय वाले परिवार में हुआ था। 1979 में जन्मे कृष्णा की शादी सोलह साल की उम्र में हो गई थी। उस समय कृष्णा नौवीं कक्षा में थे। हालांकि, कृष्णा ने शादी के बाद भी अपनी शिक्षा जारी रखी और 2013 में उन्होंने सिंध विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

ऐसे बनी सेनेटर

कृष्णा अपने भाई के साथ ऐक्टिविस्ट के तौर पर PPP में शामिल हुई थीं। कोलही ने थार में हाशिये पर जी रहे लोगों के अधिकारों की भी आवाज उठाई। कृष्णा स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से हैं। बता दें कि पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन को अनंतिम परिणामों के अनुसार सेनेट में 15 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस जीत के साथ ही वह संसद के उच्च सदन में सबसे बडी़ पार्टी बनकर उभरी।

कृष्णा कुमारी के लिए सब कुछ है एक सपने की तरह

कृष्णा कुमारी कहती हैं कि उनके लिए सब कुछ एक सपने जैसा है। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह कभी सीनेटर चुनी जाएंगी। उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। कृष्णा कोहली ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें लगा था कि उन्हें अच्छी नौकरी मिलेगी और वह अपने समुदाय की सेवा कर पाएंगी, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह सीनेटर बनेंगी।

पहले भी रह चुकी है हिंदू महिला लोकसभा सांसद

रीता ईश्वर लाल पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (लोकसभा सांसद) की पहली महिला हिंदू सदस्य हैं। वे 2013 में सिंध की NA-319 सीट से चुनी गई थीं, जो महिलाओं के लिए आरक्षित थी। 2006 से 2012 तक रत्ना भगवान दास चावला पाकिस्तान की पहली महिला हिंदू सीनेटर रहीं; हालाँकि, वे दलित हिंदू नहीं थीं। पीपीपी ने उन्हें सीनेटर के पद पर पदोन्नत भी किया।

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