Cyber Helpline 1920: आज के डिजिटल दौर में साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फेक ऐप्स और फर्जी कॉल के जरिए लोगों को झांसा दिया जा रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार लोगों को सतर्क करने और ठगी से बचाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने ग्राहकों को वित्तीय साइबर क्राइम से सुरक्षित रखें। इसी क्रम में सरकार ने “1930” हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
ठगी का पैसा बैंक में फ्रीज कर सकते हैं (Cyber Helpline 1920)
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सीईओ राजेश कुमार का कहना है कि अगर साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति एक घंटे के भीतर 1930 पर शिकायत करता है, तो पैसे वापस आने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस शुरुआती समय को ‘गोल्डन हावर्स’ कहा जाता है। इस दौरान बैंक और पुलिस तुरंत कार्रवाई कर ठगी का पैसा फ्रीज कर देते हैं, जिससे उसे ठग तक पहुंचने से रोका जा सके।
रोजाना 50 हजार शिकायतें और करोड़ों रुपये फ्रीज
राजेश कुमार के अनुसार, 1930 हेल्पलाइन पर हर दिन लगभग 50,000 शिकायतें आती हैं। इन शिकायतों के आधार पर I4C विशेषज्ञ संबंधित विभाग और बैंकों से समन्वय कर पैसे वापस करवाते हैं। अब तक कुल 1,127 करोड़ रुपये को फ्रीज किया जा चुका है। इसके अलावा, साइबर अपराध रोकने के लिए अब तक 2,95,461 सिम कार्ड, 2,810 वेबसाइट और 585 मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया गया है और 46,229 IMEI नंबर चिन्हित कर प्रतिबंधित किए गए हैं।
गोल्डन हावर्स: पहला 60 मिनट बहुत महत्वपूर्ण
डिजिटल पेमेंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन की तेजी के कारण अब साइबर ठगी के बाद सिर्फ 60 मिनट को गोल्डन हावर्स माना जाता है। साइबर एक्सपर्ट दीपेंद्र सिंह का कहना है कि पहले पैसा धीरे ट्रांसफर होता था, इसलिए दो-तीन दिन का समय मिल जाता था। अब सेकंडों में पैसा कई खातों में चला जाता है, इसलिए शिकायत जितनी जल्दी होगी, पैसा उतनी जल्दी फ्रीज हो जाएगा।
जमीनी उदाहरण: शिकायत से तुरंत पैसा वापस
उदाहरण के तौर पर, सितंबर 2025 में कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर से बीजेपी सांसद डॉ. के. सुधाकर की पत्नी प्रीति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई। ठगों ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम पुलिस बता कर उन्हें डराया और 14 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। तुरंत 1930 पर शिकायत की गई, पुलिस ने फौरन खाता फ्रीज किया और पूरे पैसे वापस मिल गए। इसी तरह, अक्टूबर में मुंबई की एक महिला को होटल बुकिंग के बहाने 93,000 रुपये ठगों ने ले लिए, लेकिन गोल्डन हावर्स में शिकायत करने के कारण पूरा पैसा बच गया।
कई लोग देर कर देते हैं, सिर्फ 10% लोग शिकायत करते हैं
नागपुर के साइबर डीसीपी लोहित मतानी बताते हैं कि बहुत से लोग शर्म, डर या अनजान होने के कारण शिकायत नहीं करते। कई लोग ठग से बातचीत भी जारी रखते हैं या मानते ही नहीं कि उनके साथ ठगी हुई। सिर्फ लगभग 10 फीसदी लोग ही समय पर शिकायत करते हैं।
गोल्डन हावर्स में शिकायत करने का महत्व
लोहित मतानी कहते हैं कि 1930 पर तुरंत शिकायत आने पर संबंधित खातों पर रोक लगाई जाती है। अगर ठग ने पैसा निकाल लिया, तो वापसी मुश्किल हो जाती है। इसलिए समय पर शिकायत करना ही सबसे प्रभावी तरीका है।
ठगी होने पर क्या करें
• तुरंत 1930 पर कॉल करें (देशभर में काम करता है)।
• cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
• अपने बैंक को तुरंत सूचित करें और ट्रांजेक्शन रोकने के निर्देश दें।
• जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही संभावना है कि आपका पैसा सुरक्षित रहेगा।






























