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मणिपुर हिंसा पर क्यों नहीं बोलना चाहते राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछे तीखे सवाल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 Sep 2024, 12:00 AM | Updated: 12 Sep 2024, 12:00 AM

16 महीने की हिंसा और कुछ महीने की शांति के बाद मणिपुर एक बार फिर जल रहा है। पिछले दस दिनों में उग्रवादियों के हमले में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में अब तक 5000 हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। 225 लोग मारे गए। 10 हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं । 70 हजार लोग बेघर हो गए। 52 सौ दुकानें और घर जला दिए गए। इंफाल की सड़कों पर महिलाएं और युवा इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी देश की राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू हिंसा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर चुप हैं। जिसके चलते अब विपक्ष उन पर हमला बोल रहा है। मणिपुर हिंसा को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि मणिपुर में 16 महीने से हिंसा चल रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेफिक्र हैं।

और पढ़ें: मणिपुर में 3 मई 2023 से अब तक क्या-क्या हुआ, हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए, जानिए क्या है राज्य की जमीनी हकीकत

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने दिया बयान

कांग्रेस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, मणिपुर कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडांकर, मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह और मणिपुर इनर सीट से कांग्रेस सांसद डॉ ए बिमोल अकोईजाम ने मणिपुर हिंसा पर चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की।

श्रीनेत ने कहा कि मणिपुर 16 महीने से जल रहा है। हिंसाग्रस्त राज्य में आगजनी, हत्या, लूटपाट की घटनाएं हो रही हैं। पिछले दस दिनों में 11-12 लोगों की मौत हो चुकी है। ड्रोन से गांवों में बम गिराए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के घर पर रॉकेट से हमला किया गया। मणिपुर के राज्यपाल के घर पर पथराव हो रहा है। कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है, इंटरनेट बंद है, युवा सड़कों पर हैं। सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।

इस देश के प्रधानमंत्री के पास समय नहीं है कि वो मणिपुर चले जाएं

मणिपुर की पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया, इसलिए उन्हें हटाकर एक राज्यपाल नियुक्त किया गया, जिन्हें मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। लेकिन इस देश के प्रधानमंत्री के पास मणिपुर जाने का समय नहीं है। श्रीनेत ने पूछा कि मणिपुर में हाईटेक हथियार कहां से आ रहे हैं और कहा कि प्रशासन की ऐसी विफलता के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है।

राहुल गांधी ने तीन बार मणिपुर का दौरा किया

मणिपुर कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडांकर ने कहा कि मणिपुर संकट शुरू होने के बाद राहुल गांधी ने तीन बार मणिपुर का दौरा किया और शांति लाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानबूझकर हालात को नियंत्रण से बाहर जाने दे रहे हैं। ये संदेह इसलिए पैदा हुए क्योंकि राज्यपाल का अचानक तबादला कर दिया गया। मणिपुर पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई बयान नहीं आया और संकट को सुलझाने के लिए उनके स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया।

ध्रुव राठी ने पूछे तीखे सवाल

यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी अपने एक्स अकाउंट पर मणिपुर हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का वीडियो शेयर किया है और सरकार से जवाब मांगा है। ध्रुव ने कहा, ‘राष्टपति और प्रधानमंत्री मणिपुर पर नही आहत होते है…  क्या मणिपुर हिंदुस्तान का हिस्सा नही है?’

प्रदर्शनकारी छात्र क्या कह रहे हैं?

मणिपुर की सड़कों प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा, हम पर हमले हो रहे हैं। हम शांति चाहते हैं। केंद्रीय बलों को वापस जाना चाहिए। सीएम, पीएम, किसी ने भी हमारे लिए कुछ नहीं किया।”

Manipur violence
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हिंसा पर गृह मंत्रालय का एक्शन

मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं को देखते हुए गृह मंत्रालय भी एक्शन मोड में आ गया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि एक नई बटालियन को कांगवई (चुराचांदपुर) में तैनात किया जाएगा, जबकि दूसरी को इंफाल के आसपास तैनात किया जाएगा। बटालियन नंबर 58 को तेलंगाना के वारंगल और नंबर 112 को झारखंड के लातेहार से मणिपुर भेजा जा रहा है।

मणिपुर हिंसा पर क्यों नहीं बोलना चाहते राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री?

इस सवाल के पीछे कई तरह की संभावनाएँ और धारणाएँ हो सकती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसी खास मुद्दे पर बयान न दिए जाने के पीछे राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक कारण हो सकते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में नेता संवेदनशीलता, शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सीधे बयान देने से बचते हैं, क्योंकि उनके बयानों की गलत व्याख्या हो सकती है या स्थिति और खराब हो सकती है।

परेशान करने वाली बात यह है कि मणिपुर हिंसा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में 162 दौरे किए, लेकिन मणिपुर से दूर रहे।

मणिपुर में हिंसा क्यों हो रही?

मणिपुर हिंसा मुख्य रूप से कुकी और मैतेई समूहों के बीच जातीय संघर्षों से प्रभावित है। जब कुकी आदिवासी समुदाय ने मई 2023 में मैतेई लोगों के अनुसूचित जनजाति की मान्यता के प्रस्ताव का विरोध किया, तो हिंसा भड़क उठी। दोनों समुदायों के बीच कई घातक लड़ाइयों में हज़ारों लोग बेघर हो गए और सैकड़ों लोग मारे गए। सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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