Bangladesh election 2026: करीब 17 साल बाद बांग्लादेश ऐसे संसदीय चुनाव की दहलीज पर खड़ा है, जहां दांव सिर्फ सरकार बनाने का नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने का है। 2024 के छात्र आंदोलन, उस पर हुई हिंसक कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत, शेख हसीना का सत्ता से बेदखल होना और फिर भारत में उनका निर्वासन… इन सबके बाद यह पहला आम चुनाव है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि क्या देश सच में लोकतांत्रिक बदलाव की ओर बढ़ेगा।
गुरुवार, 12 फरवरी को देशभर में मतदान हो रहा है। चुनाव प्रचार मंगलवार सुबह थम गया। पूरे देश के 64 जिलों में 42,761 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे। मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चलेगा। इस बार 300 संसदीय सीटों के लिए मुकाबला है।
रिकॉर्ड मतदाता और पहली बार पोस्टल बैलेट | Bangladesh election 2026
31 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 12 करोड़ 77 लाख से ज्यादा पंजीकृत मतदाता हैं। खास बात यह है कि पहली बार डाक मतपत्र यानी पोस्टल बैलेट की सुविधा दी गई है, जिससे लगभग 1.5 करोड़ प्रवासी कामगार भी वोट डाल सकेंगे। इसे चुनावी प्रक्रिया को ज्यादा समावेशी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कैसे काम करती है चुनाव प्रणाली?
बांग्लादेश में एकसदनीय संसद है, जिसे जतियो शंगसद कहा जाता है। कुल 350 सीटों में से 300 पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यहां ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ प्रणाली लागू है यानी जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है, भले ही उसे 50% से कम वोट मिले हों।
151 सीटें जीतने वाली पार्टी अकेले सरकार बना सकती है। अगर किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता तो गठबंधन की भूमिका अहम हो जाती है।
2024 की उथल-पुथल के बाद पहला चुनाव
जनवरी 2024 का चुनाव विपक्ष के बहिष्कार के कारण विवादों में रहा। इसके बाद जुलाई 2024 में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। सरकार की सख्त कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की जान चली गई। हालात इतने बिगड़े कि शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे भारत चली गईं।
बाद में अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सौंपी गई। नवंबर में हसीना को अनुपस्थिति में मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई। उनकी पार्टी आवामी लीग पर राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई।
इस बार चुनाव के साथ ‘जुलाई नेशनल चार्टर 2025’ पर जनमत संग्रह भी हो रहा है, जो संविधान और कानूनी ढांचे में संभावित बदलाव का रास्ता तय कर सकता है।
कौन-कौन मैदान में?
सबसे प्रमुख दावेदार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) है, जो 10 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। इसके नेता तारिक रहमान हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। दिसंबर 2025 के एक सर्वे के मुताबिक, पार्टी को करीब 33% समर्थन मिल रहा है।
दूसरी बड़ी ताकत जमात-ए-इस्लामी (JIB) है, जो 11 दलों के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है। इसके नेता शफीकुर रहमान हैं और पार्टी को लगभग 29% समर्थन बताया जा रहा है। पहले BNP की सहयोगी रही जमात अब उसकी प्रतिद्वंद्वी बन चुकी है। इस बार पार्टी ने पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया है, जिसे प्रतीकात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश और जातीय पार्टी जैसे दल भी मैदान में हैं।
युवाओं की भूमिका निर्णायक
इस चुनाव में बड़ी संख्या में जनरेशन-ज़ेड मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं। यही युवा 2024 के आंदोलन में सबसे आगे थे। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार का जनादेश पारंपरिक राजनीति से अलग रुख दिखा सकता है।
क्यों है यह चुनाव खास?
पहला, करीब 17 साल बाद वास्तविक प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है। दूसरा, आवामी लीग का चुनावी मैदान से बाहर होना राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। तीसरा, इस्लामी दलों का उभार भविष्य की नीतियों और विदेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है। चौथा, जनमत संग्रह के कारण संविधान में बड़े बदलाव की संभावना है।
नतीजे आमतौर पर अगले दिन सुबह तक आने लगते हैं, लेकिन इस बार जनमत संग्रह और ज्यादा उम्मीदवारों के चलते गिनती लंबी खिंच सकती है।
कुल मिलाकर, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जनता किस दिशा में देश को आगे बढ़ाना चाहती है।





























