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जानें कब है बलराम जयंती और क्या है इसका महत्व ?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 05 Sep 2023, 12:00 AM | Updated: 05 Sep 2023, 12:00 AM

सनातन शास्त्रों में लिखा गया है कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम का जन्म हुआ था. इसीलिए इस दिन इनकी जयंती मनाई जाती है. गोकुल के कान्हा भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को बलदाऊजी भी कहा जाता है. इनकी जयंती पर विधि विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण के संग उनके भाई बलराम जी की भी पूजा की जाती है. इनकी पूजा करने से जो आप सच्चे मन से चाहते है वो आपको मिल जायेगा. आपकी इच्छाओं की प्राप्ति होगी. कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन उपवास भी रखा जाता है. जिसमे सिर्फ फलाग्रहण करते है. भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की बहुत सारी कहनियां है. जो हमे बचपन में सुनाई जाती थी.

दोस्तों आज हम आपनी बताएंगे की इस साल बलराम जयंती 2023 कब मनाई जाएगी और पूजा करने का शुभ मुर्हत क्या रहेगा. बलराम जयंती की विधि-विधान से कैसे पूजा करे ? हम आपको बलराम जयंती की सम्पूर्ण जानकारी देंगे.

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बलराम जयंती 2023 कब है, क्या रहेगा शुभ मुर्हत

सनातन पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम जयंती मनाई जाती है. इस साल 2023 में, मंगलवार 5 सितम्बर को बलराम जयंती है. बलराम जी की जयंती को ‘हल छठ’ भी कहा जाता है. सनातन शास्त्रों में लिखा गया है, कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम का जन्म हुआ था. जिसके चलते इस दिन इनकी जयंती मनाई जाती है. गोकुल के कान्हा भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को बलदाऊजी भी कहा जाता है. इनकी जयंती पर विधि विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण के संग उनके भाई बलराम जी की भी पूजा की जाती है बलराम जी कि जयंती पर विधिवत पूजा पाठ करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जायेंगी और जीवन में सभी दुखों का भी निवारण हो जायेगा.

आईये जानते है विधिवत पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी सोमवार 04 सितंबर को संध्याकाल 04 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर, अगले दिन 05 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी. अतः 05 सितंबर को बलराम जयंती मनाई जाएगी. साधक दोपहर तक बलदाऊ भैया यानी बलराम जी की पूजा उपासना कर सकते हैं. इस पूजा से आपके सारे दुखों का निवारण हो जायेगा.

बलराम जी की विधिवत पूजा

बलराम जी की जयंती के दिन ब्रह्म बेला में उठकर जगह के रक्षक भगवान विष्णु संग शेषनाग को प्रणाम करे. शास्त्रों में लिखा है कि द्वापर युग में शेषनाग ही बलराम के रूप में पैदा हुए थे. उसके बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करे. इसके बाद नए कपडे पहनकर सूर्य देव को जल अर्पण करे. उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के साथ बलराम जी की पूजा विधि-विधान से करें. पूजा के अंत में आरती अर्चना कर सुख और समृ्द्धि की कामना करें. कुछ विशेष कार्यों की सफलता के आप उपवास भी रख सकते है. संध्याकाल में आरती कर फलाहार कर सकते है. अगले दिन पूजा-पाठ कर व्रत खोलें.

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