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मुसलमानों को लेकर क्या सोच रखते थे बाबा साहब अंबेडकर? जानिए इसके बारे में…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Oct 2021, 12:00 AM | Updated: 14 Oct 2021, 12:00 AM

बाबा साहब कभी भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विचारधारा का समर्थन नहीं करते थे। वो भारत के विभाजन को लेकर भी कभी तैयार नहीं थे। लेकिन जब देश का विभाजन हुआ तब बाबा साहब ने पाकिस्तान के हिस्से में रह रहे हिंदुओं और दलितों को भारत आ जाना चाहिए..ऐसा क्यों कहा था? बाबा साहब ने हिंदुओं को ये संदेश दिया था कि मुसलमान कभी भरोसे के काबिल नहीं होता है। मुसलमानों को लेकर क्या सोचते थे बाबा साहब? आज हम इसके बारे में जानेंगे…

बाबा साहेब ने ये दी थी दलितों को नसीहत

बाबा साहब मे पाकिस्तान के सभी दलित हिंदुओं को किसी तरह से भारत आ जाने के लिए कहा था, क्योंकि उनका मानना था कि भले ही दलित हिंदुओं से अपनी नफरत के कारण मुसलमानों के करीब हैं, लेकिन असल में मुसलमान कभी भी दलितों के दोस्त नहीं हो सकते। बाबा साहब ने साफ तौर पर अपनी किताब पाकिस्तान और पार्टिशन ऑफ इंडिया में कहा था कि मुसलमान कभी भारत को अपना राष्ट्र नहीं मानेंगे, वो कभी देशभक्त नहीं हो सकते। वो केवल अपने धर्म के गुलाम होते हैं। वो केवल अपने धर्म के साथ भाईचारा निभाते हैं। उनकी वफादारी अपने देश के लिए नहीं बल्कि केवल अपने धर्म के लिए होती है। 

बाबा साहब चाहते थे कि भारत के सारे अल्पसंख्यक पाकिस्तान चले जाए और वहां से हिंदुओ को भारत भेज दिया जाए। अंबेडकर ये मानते थे कि अगर मुसलमान भारत में रहेंगे, तो भारत में कभी भी सांप्रदायिक शांति नहीं होगी। इसलिए अगर धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना है तो सभी मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना चाहिए।

अंबेडकर का था ये मानना…

बाबा साहब मानते थे कि इस्लाम को मानने वाले देश के कानून को मानने के बजाए शरिया कानून को देश के कानून से ऊपर मानते थे। और समय आने पर वो देश के कानून को ताक पर रख कर शरिया कानून को प्राथमिकता देते है। इसलिए कभी भी दलित मुसलमानों को अपना हितैशी ना मानें। क्योंकि मुसलमान दलितों का फायदा उठाते हैं, लेकिन जब दलितो को उनकी जरूरत होगी तो वो कभी दलितों का साथ नहीं देंगे। वो यहां तक कि अपने सामाजिक बुराईयों को स्वीकार नहीं करते है, ना ही कुप्रथाओं को स्वीकार करते है, वो सामाजिक सुधार के कट्टर विरोधी होते है, उन्हें इस्लामिक विचार के अलावा कुछ नहीं सूझता है। और इसलिए ये समाज में सुधार के लिए कभी खड़े ही नहीं होते है। कम से कम हिंदू समाज अपनी कमियों को मानता तो है, वो समाज सुधार को चाहते तो है, लेकिन इस्लाम को मानने वाले रूढिवाद सोच में जीते है। 

बाबा साहेब जानते थे कि पाकिस्तान में भविष्य में हिंदुओं का शोषण होगा और इसलिए वो चाहते थे कि वहां रह रहे हिंदू भारत आ जाएं। वहीं आज पाकिस्तान में हिंदुओं की हालात देखकर बाबा साहब की दूरदर्शिता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बाबा साहब अपने विचारों को बेहद खुले तौर पर रखते थे, जो बात ही उन्हें सबसे अलग बनाती थी। इसलिए केवल उन्हें हिंदू विरोधी कहना गलत होगा। उन्होंने समाज सुधार के लिए पूरा जीवन लगा दिया।

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