इस राइफल से और ताकतवर बनेगी भारतीय सेना, चीन-पाकिस्तान के छूटेंगे पसीने!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 24 Dec 2021, 12:00 AM | Updated: 24 Dec 2021, 12:00 AM

भारत और रूस के बीच एक डील हुई है जिसके बारे में हम पूरी इंफोर्मेशन आज हम आपको बताने जा रहे हैं। इस डील की क्या ABCD है और इंटरनेशनल लेवल पर इसके क्या असर और आसार दिखते हैं?

दरअसल, उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एके-203 असॉल्ट राइफल को बनाने के लिए एक डील हुई है भारत और रूस के बीच, जो कि 5,124 करोड़ रुपये की डील की है। सवाल ये है कि इस डील के होने से क्या तुरंत ही हमारे हाथ में वेपेन की डिलिवरी होने लगेगी?

इस डील के तहत ऐसी 6 लाख से ज्यादा राइफल्स अमेठी में बनाई जाएगी पर इन वेपेन्स की वक्त पर  डिलिवरी के लिए अभी काफी सारे प्रॉसेस का होना और काफी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसके लिए लोकलाइजेशन प्लान को भी पूरा करने की जरूरत होगी और इसी के साथ दो और अनुबंधों पर सिग्नेचर करने होंगे। इसी के बाद इन राइफल्स की मौन्युफैक्चरिंग शुरू हो पाएगी।

ये डील कब हुई और कैसे हुई?

तो ये जो डील हुई है उस पर हाल में ही भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में साइन किए गए। जिसके तहत आने वाले 10 साल में  600,000 से ज्यादा असॉल्ट राइफल्स देश में बनाई जानी हैं, जिसके लिए रूसी टेक्नोलॉजी का कंप्लीट ट्रांसफर जाना है और तो और अर्द्धसैनिक बलों की ओर से भी इसके लिए ऑर्डर आ सकते हैं और एक्सपोर्ट के ऑर्डर भी दिए जा सकते हैं।

कौन से 2 और कॉन्ट्रैक्ट्स पर सिग्नेचर होने हैं?

वैसे देखें तो मेन डील पर तो सिग्नेचर हो गया पर डिफेंस मिनिस्ट्री को अब दो और डील्स पर साइन करने हैं। इसमें से एक डील जो है रूस की Rosoboronexport की जानी है। फैक्ट्री लगाने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए ये डील बेहद अहम है।

जो दूसरा वाला कॉन्ट्रैक्ट है वो Advanced Weapons and Equipment India Ltd (AWEIL) के साथ होना है। इसे पहले OFB के नाम से ही जाना गया। इस टेक्नोलॉजी को लोकल बनाने में इससे हेल्प होगी और  लोकल वेंडर्स को लोकलाइजेशन प्लान के तहतजोड़ा जा सकता है।

मेजर जनरल सेंगर जो कि Indian-Russian Rifles Private Limited joint venture के सीईओ है उनकी तरफ से कहा गया कि ये कॉन्ट्रैक्ट हर साइड से beneficial है और इससे लोकल बनाने में वक्त करीब करीब 32 महीनों का तो लग ही जाएगा। इसके लिए 4 कॉन्ट्रैक्ट्स पर सिग्नेचर किए जाने हैं जिसमें से एक पर तो साइन कर दिए गए हैं।

AK-203 राइफलों के प्रॉडक्शन के लिए जो डील हुई वो भारत और रूस के बीच हुई हाल सालों का सबसे बड़ी डील है। इसमें रूस की 49.5% फीसदी भागीदारी है। कहा ये भी गया है कि इस जेवी की कामयाबी बाकी के दो कॉन्ट्रैक्ट्स पर ही डिपेंड करते हैं। इसे आखिरी रूप देने पर काम किया जा रहा है।

एके-203 से जुड़ी खास बातें

तीन दशक पहले हुआ ये था कि रक्षा बलों को  इंसास राइफल दी गई और अब जो है उसी इंसास राइफल की जगह एके-203 राइफल लेगी। एके-203 को लेकर इतनी बड़ी डील की गई है तो इसके कुछ फीचर्स भी जान लेते हैं। ये 7.62 X 39 मिलीमीटर कैलिबर गन है, जो कि असॉल्ट राइफल्स 300 मीटर की असरदार रेंज के साथ, लाइट वेट और स्ट्रॉन्ग  और बेहतरीन टेक्नोलॉजी से ये राइफल लैस है। लेटेस्ट असॉल्ट राइफल्स का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। मौजूदा वक्त में और फ्यूचर में जो चुनौतियां आ सकती है उससे बड़ी ही आसानी से दो दो हाथ किया जा सकता है। ये राइफल सैनिकों की युद्ध लड़ने की क्षमता में इजाफा करेगा। 

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