Courtroom Drama: फैसला सुनाने ही वाली थीं अदालत, तभी पता चला क्लाइंट 11 साल पहले ही मर चुका था

Nandani | Nedrick News Gujarat Published: 20 Mar 2026, 01:58 PM | Updated: 20 Mar 2026, 01:58 PM

Courtroom Drama: अहमदाबाद में एक सड़क हादसे से जुड़े मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक हैरान कर देने वाला खुलासा किया। कोर्ट फैसला सुनाने ही वाली थी, तभी वकील ने जानकारी दी कि उसका क्लाइंट 23 अगस्त 2015 को ही मृत्यु हो चुकी थी। यानी करीब 11 साल तक अदालत इस आधार पर सुनवाई करती रही कि पीड़ित जीवित है।

हाईकोर्ट की बेंच जस्टिस संगीता विशेन और जस्टिस निशा ठाकोर ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे ‘अप्रिय घटना’ बताया। अदालत ने तुरंत मृतक के कानूनी वारिसों को शामिल करने का आदेश दिया, ताकि बढ़ा हुआ मुआवजा उन्हें दिया जा सके।

और पढ़ें: Middle East Update| तेल संकट और जंग के बीच ‘फोन डिप्लोमेसी’: एक दिन में 5 देशों से बात कर एक्शन में दिखे पीएम मोदी

पूरा मामला एक नजर में (Courtroom Drama)

यह मामला जनवरी 2003 के सड़क हादसे से जुड़ा है। पीड़ित मकवाणा, जो IPCL में कर्मचारी थे, बाइक से डाकोर जा रहे थे। तभी पीछे से आए ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में पीछे बैठे व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि मकवाणा गंभीर रूप से घायल होकर लकवाग्रस्त हो गए। इसके बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और मुआवजे के लिए दावा दायर किया।

2012 में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने मकवाणा को 10.44 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। मकवाणा ने इस राशि को बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में अपील की। केस की सुनवाई 2025 और 2026 तक जारी रही। इसी दौरान, 2015 में मकवाणा की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन अदालत को इसकी जानकारी नहीं दी गई।

कोर्ट को मृतक की जानकारी कैसे लगी

हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को फैसला सुरक्षित रखते हुए वकील को 3 फरवरी को क्लाइंट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने का निर्देश दिया था। उसी दिन वकील ने बताया कि वह अपने क्लाइंट से संपर्क नहीं कर पा रहा है। जांच में पता चला कि मकवाणा 2015 में ही मृतक थे।

मुआवजा अब किसे मिलेगा

हाईकोर्ट ने मृतक के कानूनी वारिसों को मामले में शामिल करने का आदेश दिया। अब मकवाणा के दो बेटे और दो बेटियों को अपीलकर्ता बनाया गया है। अदालत ने यह भी रिकॉर्ड किया कि मृतक की पत्नी का निधन 2019 में हो चुका था। बढ़ा हुआ 37.24 लाख रुपए का मुआवजा अब इन्हीं वारिसों को मिलेगा।

वकील की लापरवाही और आगे की कार्रवाई

अदालत ने वकील की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की और इसे गंभीर चूक माना। हालांकि, आगे की कार्रवाई संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत तय की जाएगी।

आगे की प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने गुजरात स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि वह मृतक के सभी कानूनी वारिसों का पता लगाए। साथ ही वकील को निर्देश दिया गया कि वह सभी वारिसों को केस में पक्षकार बनाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की जानकारी छुपाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और इसे गंभीर मामला माना जाएगा।

और पढ़ें: Russian Oil Tanker India: चीन जा रहे रूस के 7 तेल टैंकर अचानक यू-टर्न लेकर भारत की ओर बढ़े, ऊर्जा संकट में मोदी सरकार का बड़ा दांव

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds