Rahul Gandhi: लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बुधवार को जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखे सवाल दागते हुए कहा कि यह समझौता “पूरी तरह सरेंडर” जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऊर्जा, वित्त, डेटा और किसानों के हितों से समझौता किया है। सदन में माहौल इतना गरम रहा कि बीच-बीच में सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी आपत्तियां दर्ज की गईं।
और पढ़ें: UP Budget 2026: 9.12 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट, योगी सरकार ने विकास और रोजगार पर रखा जोर
“क्या हमारे फैसले अब अमेरिका लेगा?” (Rahul Gandhi)
राहुल गांधी ने कहा, “क्या अब यूनाइटेड स्टेट्स तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे? अगर अमेरिका कहे कि आप फलां देश से तेल नहीं खरीद सकते, तो क्या हम मान लेंगे?” उनके मुताबिक यह स्थिति बताती है कि ऊर्जा को हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह खुद कहती है कि एनर्जी और फाइनेंस ‘वेपनाइज़’ हो चुके हैं, फिर भी ऐसे प्रावधानों को क्यों स्वीकार किया गया।
टैरिफ के मुद्दे पर भी राहुल ने सवाल उठाए। उनका दावा था कि डील के बाद अमेरिका से भारत का आयात 46 बिलियन डॉलर से बढ़कर 146 बिलियन डॉलर तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे टैरिफ 3% से बढ़कर 18% हो गए, जबकि अमेरिका के 16% से घटकर शून्य कर दिए गए। “यह बराबरी की डील नहीं है,” उन्होंने कहा।
किसानों और टेक्सटाइल सेक्टर पर चिंता
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस समझौते से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा। “आपने मक्का और सोयाबीन जैसे सेक्टर में दरवाजा खोल दिया है। मैकेनाइज्ड अमेरिकी फार्म्स से हमारे छोटे किसान कैसे मुकाबला करेंगे?” उन्होंने इसे “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि किसी प्रधानमंत्री ने पहले ऐसा कदम नहीं उठाया।
टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि विदेशी कंपनियों को 20 साल की टैक्स छूट देकर घरेलू उद्योग को कमजोर किया जा रहा है।
डेटा और डिजिटल डील पर सवाल
राहुल ने कहा कि डेटा आज की दुनिया में सबसे बड़ी ताकत है और एआई के लिए पेट्रोल जैसा है। उनके मुताबिक सरकार डिजिटल ट्रेड डील में नियंत्रण छोड़ रही है डेटा लोकलाइजेशन पर ठोस शर्तें नहीं, फ्री डेटा फ्लो की इजाजत, डिजिटल टैक्स पर सीमाएं और सोर्स कोड पर चर्चा की कोई मजबूरी नहीं। “अगर किसी को भारतीयों के डेटा तक पहुंच चाहिए, तो बराबरी की शर्तों पर बात होनी चाहिए, नौकर की तरह नहीं,” उन्होंने कहा।
“अगर INDIA अलायंस डील करता…”
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर उनकी गठबंधन सरकार होती, तो अमेरिका से बातचीत बराबरी के स्तर पर होती। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप से कहते, “हम दोस्त हैं, लेकिन हमारी ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा से समझौता नहीं होगा।” उनके मुताबिक भारत को अपनी शर्तों पर बातचीत करनी चाहिए।
एपस्टीन और सदन में टकराव
बहस के दौरान राहुल गांधी ने एक “निश्चित बिजनेसमैन” का जिक्र किया, जिनका नाम कथित तौर पर एपस्टीन फाइल में बताया गया, और कहा कि उन पर आपराधिक आरोप हैं, फिर भी जेल नहीं हुई। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और कहा कि बिना आधार के आरोप लगाना उचित नहीं।
मार्शल आर्ट का उदाहरण
राहुल ने अपने भाषण में मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ‘ग्रिप’ बनाई जाती है और फिर ‘चोक’ में लिया जाता है। उनका इशारा था कि जब किसी देश की ऊर्जा, वित्त और डेटा पर पकड़ बना ली जाती है, तो वह कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है, लेकिन दुनिया बदल रही है। गाजा-इजरायल में हमने देखा कि हालात कितने तेजी से बदलते हैं।”
सरकार पर सीधा हमला
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा, “क्या आपको इंडिया बेचने में शर्म नहीं आती?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह डील भारत के हितों के खिलाफ है और इसे दोबारा परखा जाना चाहिए।


























