Trending

Bangladesh Election: चुनाव से ठीक पहले दीपू दास केस पर सक्रिय हुए यूनुस, क्या मुआवजा मिटा पाएगा बदनामी का दाग?

Nandani | Nedrick News

Published: 11 Feb 2026, 04:40 PM | Updated: 11 Feb 2026, 04:40 PM

Bangladesh Election: बांग्लादेश इन दिनों गहरे तनाव से गुजर रहा है। छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद देश पहले ही उथल-पुथल में था, लेकिन 18 दिसंबर 2025 को हुई एक और घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया। एक हिंदू युवक, दीपू दास, के साथ जो हुआ उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों को झकझोर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि कथित तौर पर “इस्लाम की बेइज्जती” के आरोप में भीड़ ने उसे पुलिस हिरासत से बाहर खींच लिया। पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर पेड़ से लटकाकर जिंदा जला दिया गया। इस घटना को कई लोगों ने दरिंदगी की हद बताया।

और पढ़ें: Dalai Lama in Epstein Files: एपस्टीन फाइल्स में दलाई लामा का नाम, धर्मशाला में हड़कंप!  गुरुजी ने किया पलटवार

डेढ़ महीने बाद मुआवजे का ऐलान | Bangladesh Election

इस भयावह कांड के करीब डेढ़ महीने बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने दीपू दास के परिवार के लिए 25-25 लाख टका की आर्थिक मदद और घर बनाने का आश्वासन दिया। सरकार का कहना है कि यह सहायता पीड़ित परिवार को संभालने के लिए है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल आर्थिक मदद से उस गहरे डर और असुरक्षा को मिटाया जा सकता है जो अल्पसंख्यक समुदाय के मन में बैठ चुका है?

बढ़ती घटनाएं, घटती आबादी

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की आबादी लगातार घटती रही है। चार दशक पहले जहां यह करीब 13.5 प्रतिशत थी, वहीं अब लगभग 8 प्रतिशत के आसपास रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा, डर और भेदभाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने पलायन किया या अपनी पहचान छिपाने का रास्ता चुना।

हाल के महीनों में कई और हमले सामने आए हैं। मयमनसिंह में 62 वर्षीय हिंदू व्यापारी सुसेन चंद्र सरकार की दुकान में हत्या कर दी गई। इससे पहले कबकोन चंद्र दास जैसे कारोबारियों पर जानलेवा हमले हुए। मंदिरों और पूजा स्थलों पर भी हमलों की खबरें आती रही हैं। इन घटनाओं ने समुदाय के भीतर असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

कई अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय मानवाधिकार समूहों ने हालात पर चिंता जताई है। Amnesty International और Bangladesh Hindu Buddhist Christian Unity Council (BHBCUC) ने कहा है कि धर्म के आधार पर हिंसा बढ़ रही है और चुनाव से पहले स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

Minorities Rights Group International (MRG) ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। Hindus for Human Rights (HfHR) ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। वहीं Coalition of Hindus of North America (CoHNA) समेत कई अमेरिकी संगठनों ने भी इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है।

सरकार का पक्ष और उठते सवाल

मोहम्मद यूनुस का कहना है कि 2025 में दर्ज 645 घटनाओं में से केवल 71 को सांप्रदायिक माना गया है। उनके मुताबिक बाकी घटनाएं आपराधिक प्रकृति की हैं। लेकिन कई मानवाधिकार कार्यकर्ता इन आंकड़ों से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि पुलिस रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में फर्क है। जब लोग डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते, तो असली तस्वीर सामने नहीं आ पाती।

चुनाव से पहले बढ़ती चिंता

बांग्लादेश 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 15 साल सत्ता में रहने के बाद शेख हसीना अब प्रधानमंत्री नहीं हैं और राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में हिंदू समुदाय के सामने डर और उम्मीद दोनों हैं।

डर इस बात का है कि राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के उभार से उनकी स्थिति और कमजोर न हो जाए। वहीं उम्मीद है कि अगर चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हुआ, तो शायद सुरक्षा और अधिकारों को लेकर नई दिशा मिल सके।

भविष्य की राह

बांग्लादेश की पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता से रही है, जिसमें हिंदू समुदाय की अहम भूमिका रही है। लेकिन मौजूदा हालात ने कई बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं क्या अल्पसंख्यक खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं? क्या केवल मुआवजा और बयानबाजी काफी है?

और पढ़ें: Jeffrey Epstein Case: मौत से पहले बदली वसीयत? 100 मिलियन डॉलर और हीरे की अंगूठी ने बढ़ाया एपस्टीन-कैरीना रिश्ते का सस्पेंस

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds