Rijiju vs Rahul Gandhi: लोकसभा में बुधवार (11 फरवरी) को केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखे हमले किए और कहा कि अमेरिका के साथ हालिया ट्रेड डील पूरी तरह से “होलसेल सरेंडर” है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में भारत के किसानों, टेक्सटाइल सेक्टर और ऊर्जा सुरक्षा के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, और देश की संप्रभुता पर सवाल उठ गया। राहुल ने कहा, “इस डील के बाद भारत ने अमेरिका के सामने अपना फैसला सौंप दिया। यह केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सरेंडर है। क्या आपको इंडिया बेचने में शर्म नहीं आती?”
राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि इस समझौते में अमेरिका ने तय कर लिया कि भारत किससे तेल खरीदेगा और किससे नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब देश के फैसले किसी विदेशी सरकार के हाथ में होंगे। उन्होंने कहा, “आपने हमारे किसानों को अमेरिकी मैकेनाइज्ड फार्मिंग के सामने छोड़ दिया। टेक्सटाइल उद्योग कमजोर हुआ और हमारी एनर्जी सिक्योरिटी पर समझौता किया गया। ऐसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया और आगे भी कोई नहीं करेगा।”
संसद में गरमागरम बहस | Rijiju vs Rahul Gandhi
राहुल गांधी के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “कोई भी देश को बेच या खरीद नहीं सकता। प्रधानमंत्री मोदी अब तक के सबसे मजबूत प्रधानमंत्री हैं।” इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार जुबानी जंग देखने को मिली। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने व्यापार समझौते में डेटा, टैरिफ और वित्तीय नियंत्रण अमेरिका के हवाले कर दिया। उन्होंने कहा, “भारत ने डेटा हैंड ओवर कर दिया। यह पूरा सरेंडर है।”
संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने गांधी को बार-बार टोका और कहा कि बिना सबूत के आरोप लगाना मंजूर नहीं है। राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि वह अपने तर्क ऑथेंटिकेट कर रहे हैं और भारत का डेटा अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूंजी बन गया है। उन्होंने कहा, “अगर इंडिया गठबंधन की सरकार होती, तो हम अमेरिकी राष्ट्रपति से कहते कि हमारी जनता ही सबसे बड़ी ताकत है। हम अपने किसानों की सुरक्षा करेंगे और किसी को हमारे सामने वर्चस्व नहीं बनाने देंगे।”
एपस्टीन और मार्शल आर्ट का जिक्र
राहुल ने अपने भाषण में एपस्टीन फाइल का भी जिक्र किया, लेकिन इस पर पीठासीन और मंत्री रिजिजू ने उन्हें रोक दिया। इसके साथ ही उन्होंने मार्शल आर्ट की तुलना करते हुए कहा कि ग्लोबल पावर गेम में आज भारत उसी तरह चुनौती का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि डेटा और डिजिटल संपत्ति अब देश की सबसे बड़ी ताकत है, और इसे हथियार बनाने की अनुमति किसी विदेशी शक्ति को नहीं दी जानी चाहिए।
विपक्ष का नजरिया और सुझाव
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि अगर कांग्रेस सरकार होती तो भारत अमेरिका के सामने किसी तरह की एकतरफा शर्त स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि बराबरी के स्तर पर बातचीत होती और किसानों, उद्योग और डेटा सुरक्षा की प्राथमिकता सर्वोपरि होती। उनका कहना था कि वर्तमान डील में भारत ने केवल अमेरिकी हितों की सेवा की है और देश के हितों को नजरअंदाज किया गया।
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