India-America Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सवाल, क्या फायदे से ज़्यादा नुकसान झेलेंगे किसान?

Nandani | Nedrick News

Published: 09 Feb 2026, 03:07 PM | Updated: 09 Feb 2026, 03:27 PM

India-America Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुई ट्रेड डील को लेकर सरकार इसे भारतीय कृषि के लिए बड़ा अवसर बता रही है, लेकिन इसके विरोध में आवाज़ें भी तेज हो रही हैं। किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता कुछ चुनिंदा फसलों और बड़े निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन देश के करोड़ों छोटे और मझोले किसानों के लिए इससे खास राहत मिलने की उम्मीद कम है। ऐसे समय में, जब किसान पहले ही लागत, मौसम और बाजार की मार झेल रहे हैं, यह डील नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है।

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अमेरिका बना बड़ा बाजार, लेकिन किसानों को कितना लाभ?

APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023–24 में भारत ने अमेरिका को करीब 6 अरब डॉलर के कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पाद निर्यात किए। इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों का अहम बाजार है। USDA का अनुमान है कि वहां एशियाई खाने, मसालों और प्रीमियम चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस बढ़ती मांग का सीधा फायदा खेतों में काम करने वाले किसानों तक पहुंचेगा या फिर यह मुनाफा बड़े एग्री-बिजनेस और निर्यात कंपनियों के पास ही सिमट कर रह जाएगा, यह अब भी साफ नहीं है।

कई अहम फसलें डील से बाहर : India-America Deal

इस ट्रेड डील में गेहूं, सामान्य चावल, दालें, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है। NITI Aayog का तर्क है कि ये फसलें देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी हैं और इन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलना जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि देश का बड़ा किसान वर्ग इन्हीं फसलों पर निर्भर है। जब इन फसलों को डील से बाहर रखा गया है, तो सवाल उठता है कि यह समझौता आखिर किन किसानों के लिए बनाया गया है।

मसाले: फायदा सीमित किसानों तक?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। हल्दी, मिर्च, जीरा और इलायची जैसे मसालों की अमेरिका में मांग जरूर बढ़ रही है। APEDA के अनुसार भारत सालाना करीब 4 अरब डॉलर के मसाले निर्यात करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी बाजार में टिकने के लिए सख्त गुणवत्ता मानकों, प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन की जरूरत होती है, जो छोटे किसानों के लिए आसान नहीं है। ऐसे में इसका फायदा बड़े उत्पादकों तक ही सीमित रह सकता है।

बासमती चावल पर भी सवाल

बासमती चावल को इस डील में खास जगह दी गई है, क्योंकि यह मुख्य रूप से निर्यात के लिए उगाया जाता है। APEDA के मुताबिक, 2023–24 में भारत ने लगभग 4.8 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि बासमती उत्पादन कुछ ही राज्यों तक सीमित है। इससे देश के बाकी धान किसानों को कोई सीधा फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि घरेलू बाजार में कीमतों और पानी की खपत जैसे मुद्दे और गंभीर हो सकते हैं।

आम और प्रोसेस्ड उत्पाद: अवसर या जोखिम?

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आम पैदा करता है और वैश्विक उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा यहीं से आता है। ताजा आम के निर्यात में कई तकनीकी अड़चनें हैं, इसलिए प्रोसेस्ड आम उत्पादों पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन इसके लिए बड़े निवेश और प्रोसेसिंग यूनिट्स की जरूरत होती है। छोटे किसानों के लिए इस चेन का हिस्सा बनना आसान नहीं होगा, ऐसा जानकारों का मानना है।

काजू और समुद्री उत्पादों की हकीकत

काजू और अन्य नट्स को लेकर कहा जा रहा है कि अमेरिका में हेल्दी स्नैक्स की बढ़ती मांग से भारतीय उद्योग को फायदा होगा। वहीं झींगा और अन्य समुद्री उत्पाद पहले से ही अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात किए जाते हैं। लेकिन यहां भी छोटे मछुआरों और एक्वाकल्चर किसानों को लागत, पर्यावरण नियमों और बिचौलियों की दिक्कतों से जूझना पड़ता है।

कुल मिलाकर क्या है तस्वीर

कुल मिलाकर भारत–अमेरिका ट्रेड डील को एकतरफा तौर पर किसानों के लिए फायदेमंद कहना जल्दबाजी होगी। जब तक छोटे किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच, तकनीकी मदद और उचित कीमत की गारंटी नहीं मिलती, तब तक यह डील उनके लिए मौके से ज्यादा चुनौतियां लेकर आ सकती है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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