Rahul Gandhi on Army Chief book: ‘मैंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया, मुझे बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा’ राहुल गांधी का ये सवाल तो वाजिब है लेकिन जवाब उनको आज भी नहीं मिला! आज फिर से जब राहुल गांधी ने संसद में चीन का मुद्दा उठाया तो लोकसभा की कार्यवाही फिर स्थगित कर दी गई ! सोचने वाली बात है ‘जब चीन हमारे सामने खड़ा था और आगे बढ़ रहा था, तब 56 इंच की छाती को क्या हुआ था ?
पक्ष के पसीने छुड़ाने का दम रखता
बीते फ़रवरी यानि कि 2 फरवरी 2026 को संसद में जो कुछ भी हुआ वो सालों में कभी-कभी ही देखने को मिलता है। सोचिए पूरा पक्ष प्रतिपक्ष एक नेता को झुकाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देता है, लेकिन वो अकेला ही पूरे पक्ष के पसीने छुड़ाने का दम रखता है। जी हां, कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था कल संसद में जब एक तरफ थे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी…और दूसरी तरफ बीजेपी के अमित शाह, पीएम मोदी, राजनाथ सिंह जैसे दिगग्ज नेता जो उन सबसे कम उम्र के राहुल गांधी की दलीलो के आगे पानी भरते नजर आये है।
46 मिनट की स्पीच में 20 बार माइक बंद
हमेशा राहुल गांधी और कांग्रेस की नीतियो पर टिप्पणी करने वाले बीजेपी वालों की ऐसी घिग्गी बंधी थी कि पूरे 46 मिनट के राहुल गांधी के स्पीच में 20 बार तो उनके माइक को ही बंद करवा दिया गया था। अब सवाल ये उठता है कि आखिर राहुल गांधी ऐसा कौन सा तुरक का इक्का लेकर आये थे। जिसने सबके पसीने छुड़वा दिये पक्ष सदन के नियमों की गिनती करवाने लगा। हंगामे का बाइट.. जिसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह नियम बता रहे है।
प्रकाशित किताब Four Stars of Destiny
ये हंगामा जिसे आपने देखा… वो असल में एक unpublished किताब में लिखे कुछ लाइनों के खिलाफ हो रहा है, जिसमें बीजेपी के दिग्गज नेताओं पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, जय शंकर, और अजित डोभाल के बारे में बताया गया है… राहुल गांधी का ये तुरक का इक्का है पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny के कुछ अंश…जिसे राहुल गांधी बार बार पढ़ने की कोशिश कर रहे थे… लेकिन उनकी तमाम कोशिशो के बाद भी वो उन लाइनो को पढ़ ही नहीं पाये.. यहां तक कि सुबह से शाम तक के सत्र में भी वो 5 लाइने पढ़ने के लिए जूझते नजर आये..
ऐसा क्या है इस अंश में… पहले ये पोस्ट देखिये..
राहुल गांधी को संसद में मोदी सरकार ने बोलने नहीं दिया, क्योंकि वो जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब – Four Stars of Destiny का एक हिस्सा पढ़ना चाहते थे.
अब आप खुद वो हिस्सा पढ़ लिजिए- फिर जो उचित लगे, वो कीजिए. मैं चला झोला उठाकर😉
31 अगस्त 2020 को शाम…
— Ranvijay Singh (@ranvijaylive) February 2, 2026
विवाद का मुख्य कारण क्या है?
पोस्ट का कुछ हिस्सा लेना है—जिसे कोट करना है- “31 अगस्त 2020 को रात को करीब 8 बजकर 15 मिनट पर इंडियन आर्मी के उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को लद्दाख से एक फोन कॉल आया.. जानकारी मिली चार चीनी टैंक, पैदल सैनिकों के साथ, पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर चढ़ना शुरू कर चुके थे..जोशी ने तुरंत नरवणे को इसकी जानकारी दी.. नरवणे उस वक्त देश के सेना प्रमुख थे.. ये टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय मोर्चों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे।
इंडियन आर्मी, जिन्होंने कुछ घंटे पहले ही रेचिन ला दर्रे पर कब्जा किया था, उन्होंने चेतावनी के तौर पर ऐसे गोले दागे जो सिर्फ लाइट करते थे। इसी बीच नरवणे ने हालात की नाजुकता को समझते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा प्रमुख जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस जयशंकर को रेचिन ला दर्रे में चीन की गतिविधियों की जानकारी दी।
नरवणे ने अपनी किताब में लिखा
नरवणे आगे लिखते है कि उन्हें पहले ही कहा गया था कि शीर्ष स्तर से अनुमति मिलने तक” गोली नहीं चलाई जाएगी. ऊपर से कोई साफ आदेश नहीं दिया गया। इसलिए हमारे हाथ बंधे हुए थे, लेकिन रात 9:10 बजे जोशी ने फिर से फोन कर कहा कि चीनी टैंक अब एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर थे। 9:25 बजे विवाद का मुख्य कारण क्या है? था और उनसे पूछा कि वो साफ तौर पर बतायें कि उन्हें क्या करना है, लेकिन राजनाथ सिंह ने थोड़ी देर में कॉल करने का वादा करके कट कर दिया।
इस वक्त सेना के लिए ये समझना बेहद मुश्किल था कि वो क्या करें.. वहीं उम्मीद की कीरण बन कर तब चीनी सेना के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन का मैसेज आया कि वो सुबह मीटिंग करेंगे, हमें लगा कि शायद ये तनाव अब आगे नहीं बढ़ेगा, लेकिन विडंबना ये थी कि चीनी टैंक अभी भी दर्रे की तरफ बढ़ ही रहे थे।
मीडियम आर्टिलरी से फायर किया जाये
इसलिए चीन की नियत पर थोड़ा शक होने लगा उन्हें रोकने का एक ही तरीका था कि मीडियम आर्टिलरी से फायर किया जाये, लेकिन पाकिस्तानी सेना के सामने ये आसान था, लेकिन इस वक्त सामने चीन था, इसलिए अगर फायर किया जाता तो मामला बड़ा हो सकता है.. मेरी स्थिति बेहद नाजुक थी, दुश्मन हमारे करीब आ रहे थे। और मोदी सरकार के लोग हमें कुछ भी स्पष्ट आदेश नहीं दे रहे थे। पूरा उत्तरी मोर्चा हाई अलर्ट पर था।
सारी जिम्मेदारी नरवणे के कंधो पर
राजनाथ सिंह ने करीब 10:30 बजे वापस फोन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी. मोदी के निर्देश सिर्फ एक वाक्य में थे: “जो उचित समझो, वो करो”… ये ऐसा था जैसे “मुझे एक गरम आलू थमा दिया गया था। यानि की “पूरी तरह सैन्य फैसला” होगा, पीएम मोदी ने खुद फैसला लेने के बजाये सारी जिम्मेदारी नरवणे के कंधो पर डाल दी थी।”
जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी
एंकर- दरअसल दिसंबर 2023 में पेंगुइन ने जनरल नवरणे की लिखी किताब – Four Stars of Destiny को प्रकाशित करने का ऐलान किया था, जिसके प्री-ऑर्डर भी लिये जाने लगे थे, ये किताब जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी है, और जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी…लेकिन किताब में लिखे कुछ हिस्सो को विवादित बता कर इसका प्रकाशन ही रूकवा दिया गया.. और तब से ये रक्षा मंत्रालय और सेना के पास समीक्षा के लिए गई हुई है.. करीब 1 साल हो चुका है लेकिन समीक्षा अभी तक पूरी ही नहीं हुई.. ये किताब अभी भी क्लियरेंस के लिए पेंडिंग है।
मगर बॉम तब फूट गया जब इस किताब के कुछ अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो लगे.. जिसमें मोदी सरकार द्वारा शुरु किये गए अग्निपथ को लेकर कहा गया था कि एयरफोर्स और नेवी के अग्निपथ के नियम हजम करने वाले ही नहीं थे..उन्हें समझाने में काफी जद्दोजहद हुई कि ये केवल सेना तक ही सीमित है, वहीं नरवणे खुद अग्निपथ को लेकर हैरान थे। उन्होंने ये भी दलिल दी थी कि अग्निपथ में भर्ती किए जाने वाले जवानों में से 75 पर्सेंट को सर्विस में बनाए रखा जाए।
राहुल गांधी ने संसद मे सवाल उठाये
राहुल गांधी ने नरवणे की इस किताब को लेकर जब संसद में पक्ष पर सवाल उठाने शुरु किये..तो एक के बाद एक दिग्गज नेताओं ने बड़ी बड़ी दलिले दी.. ये तक कहा कि सत्र के नियमों के अनुसार संसद में किसी भी किताब का रिफरेंस नहीं दिया जा सकता है। न तो प्रकाशित और न ही अप्रकाशित..फिर राहुल गाँधी किस आधार पर संसद के नियमों का उल्लंघन कर रहे है.. हैरानी की बात है कि राहुल गांधी को तो केवल 5 लाइने बोलनी थी।
जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति पर सवाल उठे
लेकिन पक्ष ने इतना शोर मचाया कि सदन ही स्थगित कर दी गई.. वहीं आप जब कुछ पुराने रिकॉर्ड उठा कर देखेंगे तो ऐसे कई मौके आपको देखने को मिलेंगे जब खुद पीएम मोदी किताबों का रिफरेंस लेकर कांग्रेस और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति पर सवाल उठाते नजर आये है। तब सदन का नियम कौन सी रद्दी के भाव बेच दिया जाता है.. बड़े सम्मान के साथ उनके refrence पर तालियां बजती है।
जब संसद में विपक्ष की बात सुननी ही नहीं है तो फिर संसद की जरूरत ही क्यों है। आखिर ये दोहरा रवैया क्यों.. जैसे ही राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया तो अमित शाह भी आगबबूला हो गए और इन सारी बातों को सिरे से नकार दिया ! लेकिन सवाल ये नहीं सच झूठ का किसे पता लेकिन मुद्दा ये है की विपक्ष को हमेशा ये सरकार चुप क्यों कराती है! अब समय आ गया है कि संसद में होने वाले इस भेदभाव के खिलाफ देश की जनता तीखे सवाल करें, आपकी इस पर क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



























