USS Abraham Lincoln: अमेरिकी नौसेना का बेहद ताकतवर निमित्ज-क्लास सुपरकैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) अब दक्षिण चीन सागर से अपना रास्ता बदलते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ गया है। पेंटागन ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसे एक सामान्य सैन्य मूवमेंट नहीं माना जा रहा, बल्कि साफ संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि अमेरिका क्षेत्र में किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्या है अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप? (USS Abraham Lincoln)
यूएसएस अब्राहम लिंकन अकेला जहाज नहीं, बल्कि एक पूरा चलता-फिरता युद्ध अड्डा है। यह Carrier Strike Group-3 (CSG-3) का हिस्सा है, जिसमें Carrier Air Wing Nine (CVW-9) तैनात है। इस स्ट्राइक ग्रुप का फ्लैगशिप खुद अब्राहम लिंकन है और इसके साथ Destroyer Squadron 21 के कई अत्याधुनिक युद्धपोत जुड़े हुए हैं। सैन्य जानकारों के मुताबिक, यह ग्रुप इतनी ताकत रखता है कि अकेले किसी छोटे देश की पूरी सेना के बराबर मारक क्षमता दिखा सकता है।
ग्रुप में शामिल जहाज और पनडुब्बियां
इस स्ट्राइक ग्रुप की रीढ़ है न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln, जिसका वजन 1 लाख टन से ज्यादा है और यह दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में गिना जाता है। इसके अलावा ग्रुप में 3 से 4 Arleigh Burke-class गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स शामिल हैं, जैसे USS Michael Murphy, USS Spruance और USS Frank E. Petersen Jr. ये जहाज हवा, समुद्र और जमीन तीनों मोर्चों पर हमला करने में सक्षम हैं।
इसके साथ 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन भी रहती हैं, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रखती हैं और जरूरत पड़ने पर टोमाहॉक मिसाइलें दाग सकती हैं। सपोर्ट के लिए ऑयलर और सप्लाई शिप्स भी मौजूद रहते हैं।
कितने सैनिक और कितनी हवाई ताकत?
सिर्फ अब्राहम लिंकन पर ही करीब 5,000 से 6,000 नौसैनिक और एयर विंग स्टाफ तैनात रहता है। पूरे ग्रुप को मिलाकर यह संख्या 7,000 से 8,000 के बीच पहुंच जाती है। हवाई ताकत की बात करें तो Carrier Air Wing Nine में 65 से 70 एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनमें F/A-18 सुपर हॉर्नेट, स्टील्थ फाइटर F-35C, निगरानी के लिए E-2D Hawkeye, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए EA-18G Growler और Seahawk हेलीकॉप्टर शामिल हैं। ये विमान दिन-रात ऑपरेशन कर सकते हैं।
हथियार और मिसाइल क्षमता
इस स्ट्राइक ग्रुप के पास सैकड़ों नहीं, बल्कि हजार से ज्यादा टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें दागने की क्षमता है। इसके अलावा एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, स्मार्ट बम और एडवांस डिफेंस सिस्टम भी शामिल हैं। हालांकि कैरियर न्यूक्लियर-पावर्ड है, लेकिन इस पर तैनात हथियार परमाणु नहीं हैं।
अगर जंग छिड़ी तो ईरान पर क्या असर?
अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह ग्रुप ईरान के एयरबेस, मिसाइल साइट्स, नेवल बेस, ऑयल फैसिलिटीज और कमांड सेंटर्स पर भारी हवाई और मिसाइल हमले कर सकता है। ईरान की नौसेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण भी संभव है। हालांकि, ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और प्रॉक्सी ग्रुप्स हैं, जो इस स्ट्राइक ग्रुप को चुनौती दे सकते हैं। पूर्ण युद्ध की स्थिति में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अमेरिका का साफ संदेश
पेंटागन के संकेत साफ हैं यह तैनाती सिर्फ ताकत दिखाने के लिए नहीं, बल्कि ईरान को डिटर करने, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हितों की सुरक्षा और इजरायल को समर्थन देने के लिए है। हालात गंभीर हैं, लेकिन अमेरिका की यह सैन्य मौजूदगी शायद युद्ध को रोकने की कोशिश भी हो सकती है।




























