Maharashtra army jawan death: महाराष्ट्र के सातारा जिले के आरे दरे गांव में शनिवार का दिन किसी भी ग्रामीण के लिए आसान नहीं था। गांव की हर गली, हर चौराहा और हर घर गहरे शोक में डूबा हुआ था। जब तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव से गुजरा, तो लोग हाथ जोड़कर सिर झुकाए खड़े नजर आए। यह अंतिम यात्रा भारतीय सेना के वीर जवान प्रमोद जाधव की थी, जिनकी अचानक मौत ने पूरे गांव को तोड़ कर रख दिया।
छुट्टी पर आए थे, खुशियों से भरा था घर (Maharashtra army jawan death)
प्रमोद जाधव कुछ ही दिन पहले छुट्टी लेकर घर लौटे थे। घर में खुशी का माहौल था, क्योंकि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। परिवार और गांव वाले उस पल का इंतजार कर रहे थे, जब घर में नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंजेंगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक दर्दनाक सड़क हादसे में प्रमोद जाधव की जान चली गई और खुशियों से भरा घर अचानक मातम में बदल गया।
पिता के जाने के बाद बेटी ने लिया जन्म
इस कहानी का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया, जब प्रमोद जाधव के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। एक तरफ जीवन का अंत था, तो दूसरी ओर जीवन की शुरुआत। जिस बेटी को अपने पिता की गोद में खेलना था, वह दुनिया में आते ही पिता के साए से वंचित हो गई। यह खबर जैसे ही गांव में फैली, हर आंख भर आई।
अंतिम संस्कार में छलका हर किसी का दर्द
जब सेना और प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं, तो माहौल और भी भारी हो गया। सबसे दर्दनाक पल तब आया, जब प्रमोद जाधव की पत्नी को अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। डिलीवरी के बाद शरीर बेहद कमजोर था, लेकिन पति को आखिरी बार देखने की चाह ने उन्हें वहां पहुंचा दिया। आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे और उस दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल था।
आठ घंटे की मासूम बेटी ने किया पिता का अंतिम दर्शन
इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर दिया। सिर्फ आठ घंटे पहले जन्मी मासूम बच्ची को गोद में लेकर उसे उसके पिता के पास लाया गया। तिरंगे में लिपटे उस पिता के सामने वह नन्ही सी बच्ची खामोश थी, जिसे दुनिया की कोई समझ नहीं थी। वह पिता, जिसने देश की सेवा की, लेकिन अपनी बेटी को कभी गोद में नहीं उठा सका। इस दृश्य ने बुजुर्गों तक की आंखें नम कर दीं।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई सलामी
भारतीय सेना की ओर से प्रमोद जाधव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। बंदूकों से चली सलामी की आवाज गूंज रही थी, लेकिन उस गूंज में एक परिवार की टूटती हुई दुनिया का दर्द साफ महसूस हो रहा था। गांव के लोग, रिश्तेदार और प्रशासनिक अधिकारी हर कोई गमगीन नजर आया।
गांव और परिवार के लिए अपूरणीय क्षति
प्रमोद जाधव सिर्फ एक सैनिक नहीं थे, बल्कि एक पति, एक होने वाले पिता और अपने माता-पिता की सबसे बड़ी उम्मीद भी थे। उनके जाने से परिवार पूरी तरह टूट गया है। अब उनकी बेटी बिना पिता के बड़ी होगी, पत्नी को जिंदगी भर उस खालीपन के साथ जीना होगा और माता-पिता अपने बेटे की यादों के सहारे जीवन बिताएंगे।
हमेशा याद रहेंगे वीर सपूत
आज सातारा का आरे दरे गांव शोक में डूबा है, लेकिन साथ ही इस बात का गर्व भी है कि इस मिट्टी ने देश को ऐसा वीर सपूत दिया। प्रमोद जाधव का बलिदान, उनका समर्पण और उनकी कहानी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।






























