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Sikhism in Tamil Nadu: तमिलनाडु में सिख पहचान पर विवाद, धर्म परिवर्तन और अल्पसंख्यक दर्जे की अनसुनी कहानी

Shikha | Nedrick News

Published: 11 Jan 2026, 01:48 AM | Updated: 11 Jan 2026, 01:48 AM

Sikhism in Tamil Nadu: बीते साल अगस्त 2025 में भारत के दक्षिण में बसे एक राज्य तमिलनाडु से एक खबर सामने आई थी, वहां मौजूद सिख अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए अल्पसंख्य होने का दर्जा मांग रहे है, ताकि उन्हें सरकार की विशेष सहायता मिला सकें…लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इससे इंकार कर दिया…वजह बेहद हैरानी करने वाली थी…दरअसल तमिलनाडु में रहने वाले कुछ सिखों को छोड़ कर ज्यादातर सिख असल में सिख कम्युनीटी से ही नहीं आते..वो तो वो लोग है जिन्होंने सिख धर्म से प्रेरित होकर अपना मूल धर्म छोड़ कर सिख धर्म अपना लिया..और अब यहीं लोग सिख कहलाने की पहचान के लिए संघर्ष कर रहे है।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों सरकार तमिलनाडु के सिखों को अल्पसंख्यक समुदाय का हिस्सा नहीं मान रही है..और क्यों यहां के मूल लोग सिख धर्म में परिवर्तित हो रहे है। अपने इस वीडियो में हम तमिलनाडु में पनपे सिक्खिज्म की कहानी को जानेंगे, जिसके कारण आज सिख भले ही छोटा सा समुदाय है लेकिन उन्होंने यहां पर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर काफी प्रभाव डाला हुआ है। आईये जानते है कि क्या है तमिलनाडु में सिखों की कहानी।

तमिलनाडु के बारे में जानकारी

तमिलनाडु भारत के दक्षिणीँ छोर में बसा एक राज्य है, जिसका गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था। इस राज्य की राजधानी चैन्नई है, जिसका पहले नाम मद्रास था, इसके 38 जिले है। चैन्नई भारत के चार महानगरो में से एक है। वहीं तमिलनाडु का क्षेत्रफल 130,058 वर्ग किलोमीटर है, जो कि भारत का 10वां सबसे बड़ा राज्य है तो वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी आबादी 72,147,030 है, जो कि आबादी के मामले में छठे स्थान पर है। पूरे देश में लिंग अनुपात के मामले में तमिलनाडु तीसरा ऐसा राज्य है जहां प्रति 1000 पुरुषों पर 996 महिलाएं है।

श्रीलंका में भी काफी लोग तमिल भाषा बोलते

यानि कि महिलाओं की स्थिति यहां काफी बेहतर है। तमिलनाडु भारतीय राज्यों केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश, और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी से घिरा हुआ है तो वहीं श्रीलंका के उत्तरी प्रांत के साथ पंबन द्वीप पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा साझा करता है। तमिलनाडु में भारत के चार प्रमुख धामों में से एक रामेश्वरम स्थित है, यहां समुद्र पर चलने वाली ट्रेन काफी प्रचलित है। भारतीय सीमा से श्रीलंका सीमा की दूसरी मात्र 31 किलोमीटर ही है। जिसका प्रभाव ऐसा है कि श्रीलंका में भी काफी लोग तमिल भाषा ही बोलते है। तमिलनाडु में खेती पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो कि यहां की जीडीपी में करीब 13 प्रतिशत योगदान देते है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जो सिख प्रवासी के तौर पर पहली बार तमिलनाडु आये थे वो खेतीबाड़ी के ही काम से जुड़े थे।

तमिलनाडु में सिख धर्म शुरुआत

जब तमिलनाडु में सिखो के इतिहास के बारे में जानते है तो ये इतिहास सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी से जुड़ा है, जिन्होंने सिख धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अपनी दूसरी उदासी के दौरान तमिलनाडु की यात्रा की थी। गुरुनानक देव जी (1506-1513) के दौरान तमिलनाडु आये थे, जहां वो मदुरै, नागपट्टिनम ,कुंभकोणम और रामेश्वरम की यात्रा पर आये थे, रामेश्वरम से ही उन्होंने श्रीलंका की यात्रा की थी, और वापिस लौट कर  नागपट्टिनम से समुद्री रास्ते से  जकार्ता और फिर सिंगापुर, मलेशिया की यात्रा कर वापिस नागपट्टिनम  लौटे थे। उनकी यात्रा दरअसल तमिननाडु के ही नहीं बल्कि उसके काफी करीब रहे श्रीलंका के लोगों के लिए भी काफी प्रेरणादायी थी। उनके प्रवचनो को सुनने के लिए लोगो की भीड़ जमा होती, वो उनसे प्रभावित होते थे, इस यात्रा में गुरु साहिब से लोग जुड़ने लगे थे, उन्होंने लोगो में आध्यत्मिक चेतना जागृत करने में अहम भूमिका निभाई।

तमिलनाडु में सिखों की संख्या में बढ़ौतरी

हालांकि तब भी सिखों की संख्या यहां काफी कम थी, लेकिन अंग्रेजी हुकुमत के दौरान तमिलनाडु में सिखों की संख्या में बढ़ौतरी हुई, मजदूर बन कर आये सिख यहीं के हो गए और यहीं खेती कार्य करने लगे। खासकर रामनाथपुरम जैसे सूखे इलाके में उन्होंने खेती करके बता दिया कि आखिर क्यों सिख पूरी दुनिया में सबसे ताकतवर कहलाते है। वो नवोन्मेषी कृषि पद्धतियों के माध्यम से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाते है। धीरे धीरे सिख समुदाय एक छोटा और स्थापित समुदाय बन गया, जो वहां के स्थानीय लोगो को भी प्रभावित करने लगा। सिखों के रहन सहन, उनकी बराबरी की भावना ने तमिलनाडु के लोगो को भी काफी प्रभावित किया।

दलित से सिख में परिवर्तित हुए

साल 2011 के आकड़ो के अनुसार तब राज्य में करीब 14601 सिख रहा करते थे, जिनकी आबादी समय के साथ बढ़ी ही है। जिसमें तमिल सिख संगत जो कि तमिल से सिख बने लोगो का ग्रूप है, जो असल में दलित और पिछड़ी जाति से बिलोंग करते है, लेकिन जातिगत भेदभाव के कारण उन लोगो ने सिख धर्म अपनाया, जो राज्य में  धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए दलित से सिख में परिवर्तित हुए जीवन सिंह ने ‘बहुजन द्रविड़ पार्टी’ का गठन करके वहां सक्रिय रूप से राजनीति का हिस्सा बन कर काम करने का और अपने जैसे ही लोगो को जोड़ने का काम किया है।

रामनाथपुरम और चैन्नई में सिख समुदाय काफी सक्रिय

ये सिख समुदाय असल में सिखों की मूल पहचान को धारण करता है, उनके नियमों को मानता है लेकिन संस्कति और भाषा इनकी पंजाबी नहीं बल्कि तमिल है। जो तमिल और सिखों के कल्चर का अनोखा संगम लगता है। सिख समुदाय मौजूदा समय में रामनाथपुरम और चैन्नई में काफी सक्रिय है, चैन्नई में ऑटो स्पेयर पार्ट्स के व्यवसाय में सिख अनुयायी काफी ज्यादा सक्रिय है, इसका दबदवा यहां के बाजार में काफी है जो कि यहां की आर्थिक व्यवस्था में भी अहम योगदान देते है।

सिखों के लिए गुरूद्वारो का भी निर्माण

तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से के थूथुकुडी के आसपास तमिल दलित सिख धर्म अपना रहे है लेकिन यहां की सरकार धर्म परिवर्तन के मामले में काफी रूखा रवैया अपनाती है और धर्मांतरित लोगों को अद्यतन सामुदायिक प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं सिखो के प्रमुख निशानी कृपाण को भी सार्वजनिक तौर पर धारण करके चलने से कई बार विवाद खड़े हो गए है। तमिल सिख अभी भी अपनी पहचान के लिए लड़ रहे है। हालांकि तमिलनाडु में सभी धर्मों को बराबर सम्मान है इसलिए यहां सिखों के लिए गुरूद्वारो का भी निर्माण कराया गया है।

अकेले चैन्नई में ही करीब 20 गुरुद्वारे है तो वहीं आकड़ो की माने तो पूरे राज्य में करीब 143 गुरुद्वारे है। जिसमें रामेश्वरम का गुरुद्वारा गुरु नानक धाम है जहां गुरु नानक देव जी के चरण-स्पर्श हुए थे, और ये चरण स्पर्ण स्थल के रूप में प्रचलित है। चेन्नई के टी नगर में मौजूद श्री गुरु नानक सत संघ सभा गुरुद्वारा, अपने मुफ्त चिकित्सा केंद्र के लिए प्रचलित है वहीं कोयम्बटूर का गुरुद्वारा सिंह सभा और तिरुवन्नामलाई का गुरुद्वारा पहली पातशाही भी कुछ प्रमुख गुरुद्वारों में शामिल है। यहां मौजूद गुरुद्वारे केवल सिखों के लिए ही नही बल्कि सभी जाति धर्मों के लिए खुले रहते है।

Shikha

shikha@nedricknews.com

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