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गदे के आकार वाला छतरपुर का रहस्यमयी कुंड है बेहद खास, इसकी गहराई का पता लगाने में वैज्ञानिकी यंत्र भी फेल!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 17 Feb 2021, 12:00 AM | Updated: 17 Feb 2021, 12:00 AM

इस रहस्यमय दुनिया (Mysterious world) में कई एक से बढ़कर एक रहस्य हैं जिससे आम लोग क्या वैज्ञानिक तक अंजान है. वो लाख कोशिश के बाद भी कई ऐसे रहस्य हैं जिनका आज तक पता नहीं लगा सकें हैं. अगर बात करें भारत की तो यहां भी कई ऐसी अद्भुत चीजें है जो बहुस रहस्यमयी हैं. उनमें से एक है महाभारत काल से संबंधित छतरपुर का रहस्यमयी कुंड (Mysterious pool), जिसकी गहराई का पता लगाने में वैज्ञानिकों के यंत्र तक फेल हो चुके हैं, आइए इस कुंड के बारे में विस्तार से बताते हैं…

दरअसल, हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छतपुर जिले के लगभग 70 किमी. दूर स्थित बाजना गांव में मौजूद भीम कुंड (Bheem Kund) की. जिसे देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोगों आया करते हैं. महाभारत काल (Mahabharat Kaal) से संबंधित इस कुंड को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इसकी गहराई इतनी ज्यादा है कि इसे नापने के लिए लगाए गए कई वैज्ञानित यंत्र तक फेल हो चुके हैं. इतना ही नहीं इसकी सही जानकारी अभी तक किसी को नहीं मिल सकी है.

पौराणिक धर्म ग्रंथों की मानें तो उसके मुताबिक महाभारत काल के दौरान जब पांडव (Pandav) अज्ञातवास पर थे. उस दौरान वो जल की तलाश में यहां पहुंचे थे मगर यहां पर जल का कोई स्त्रोत नहीं था, तब भीम ने अपना गदा लिया और उसको जमीन पर मारकर यहां कुंड बनाया था. जिसके बाद से ये कुंड देखने में बिल्कुल गदे की तरह बन गया है.

इसके अलावा इस कुंड से जुड़ी एक और मान्यता है कि जब भी भारत पर कोई प्राकृतिक आपदा या संकट आने वाला होता है तो उससे पहले ही इस कुंड का पानी बढ़ने लगता है. कुंड में बढ़ते पानी के स्तर को देख लोग खतरे का अंदाजा लगा लेते हैं.

आपको बता दें कि भीम कुंड बहुत रहस्यमयी है. यहां तक कि वैज्ञानिक तक इस कुंड की गहराई की गुत्थी को सुलझा नहीं सके हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि इस कुंड की गहराई नापने के लिए डिस्कवरी चैनल ने कई उपकरण लगाए थे. इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की पूरी एक टीम ने भी इस कुंड की जांच की थी. हालांकि हर हथकंडे अपनाने के बाद भी उन सभी के हाथ निराशा ही लगी.

बता दें कि एक बार विदेशी वैज्ञानिकों द्वारा भीम कुंड की गहराई का पता लगाने के लिए उन्होंने 200 मीटर तक पानी में कैमरा भेजा था, लेकिन उसके बाद भी पानी की गहराई का पता न लग सका. इस कुंड को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि इसका पानी गंगा के जैसे पूरी तरह से पवित्र है और ये कभी भी खराब नहीं होता है.

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