1989 का अपहरण केस या पोल खोलने की सजा…क्यों हुई Pappu Yadav की गिरफ्तारी?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 May 2021, 12:00 AM | Updated: 12 May 2021, 12:00 AM

जन अधिकारी पार्टी अध्यक्ष पप्पू यादव बीते दिन से काफी सुर्खियों में बने हुए है। पप्पू यादव को बीते दिन गिरफ्तार किया गया। पहले ये बताया गया कि उनकी गिरफ्तारी लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के चलते हुई है। वहीं बाद में ये बात सामने आई कि पप्पू यादव को 32 साल पुराने एक अपहरण से जुड़े मामले में अरेस्ट किया। 

पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर बवाल

पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर लगातार बवाल मचा हुआ है। ना सिर्फ विपक्षी पार्टियां बल्कि खुद नीतीश कुमार के सहयोगी ही इस गिरफ्तारी का विरोध कर रहे है। दरअसल, पप्पू यादव ने हाल ही में बीजेपी सांसद की निधि से खरीदी गई एंबुलेंस के खड़े होने का खुलासा किया था। इसके बाद उन्होंने बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूड़ी के खिलाफ एक्शन लेने की भी मांग की थी। लेकिन उल्टा पप्पू यादव पर ही कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

सोशल मीडिया की भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी का काफी विरोध किया जा रहा है। लगातार उन्हें रिहा करने की मांग लोग उठा रहे हैं। तो आइए आपको बताते है कि आखिर 32 साल पहले का वो कौन-सा केस है, जिसको लेकर उनके खिलाफ ये कार्रवाई की गई है…

32 साल पुराने अपहरण के मामले में गिरफ्तारी

ये मामला है 29 जनवरी 1989 का। पप्पू यादव पर चार साथियों के साथ मिलकर दो युवकों का अपहरण करने का आरोप लगा था। मधेपुरा जिला के मुरलीगंज थाना तहत मिडिल चौक से राजकुमार यादव और उमा यादव का अपहरण किया गया। मामले में शैलेंद्र यादव ने पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 

हालांकि कुछ दिनों के बाद ये दोनों अपह्यत युवक सकुशल वापस लौट गए। मामले में पप्पू यादव की गिरफ्तारी भी हुई थी। लेकिन वो कुछ महीने बाद ही जमानत पर जेल से बाहर आ गए। जिसके बाद पप्पू यादव के सियासी सफर की शुरुआत हुई और विधायक से सांसद बनते चले गए। 

मामले की सुनवाई मधेपुरा में SJM प्रथम के स्पेशल कोर्ट में हो रही थीं। 10 फरवरी 2020 को पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया गया था। लेकिन उनको ये वॉरंट मिला ही नहीं। इसके बाद 17 सितंबर 2020 को कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई। तब पुलिस ने बताया कि वारंट की कॉपी चौकीदार ने खो दी गई।

फिर कोर्ट के द्वारा वारंट की दूसरी कॉपी जारी की गई। बिहार पुलिस ने इसके बाद भी पप्पू यादव को गिरफ्तार नहीं किया। 22 मार्च को कोर्ट ने पप्पू यादव के घर की कुर्की जब्ती का वारंट जारी किया। इस मामले में ही अब पप्पू यादव की गिरफ्तारी की गई है और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।

भले ही एक वक्त ऐसा था, जब पप्पू यादव की पहचान एक बाहुबली के तौर पर हुआ करती थीं। लेकिन बीते कुछ सालों में उन्होंने अपनी छवि को काफी सुधारा। अब जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया, तो बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में उतर आए है। लोगों का कहना है कि पप्पू यादव ने बीजेपी सांसद की पोल खोलने की कोशिश की, जिसकी सजा उनको मिल रही है। साथ ही उनको रिहा करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है, जिसके लिए #ReleasePappuYadav लगातार ट्रेंड कर रहा है। 

क्या है एंबुलेंस से जुड़ा मामला?

बता दें कि बीते दिनों ने पप्पू यादव ने सारण के अमनौर में सामुदायिक केंद्र पहुंचकर वहां दो दर्जन से अधिक एंबुलेंस बिना इस्तेमाल के रखे होने के मामले को उठाया था। ये सभी एंबुलेंस सारण से लोकसभा सांसद राजीव प्रताप रूडी के कोष से खरीदी गई थीं। पप्पू यादव ने एंबुलेंस को जनता को समर्पित नहीं करने और राजीव प्रताप रूड़ी की मंशी को लेकर सवाल खड़े किए थे। 

मामले पर सफाई देते हुए राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा था कि ड्राइवर नहीं होने की वजह से एंबुलेंस का संचालन नहीं हो सका। साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा था कि अगर पप्पू यादव ड्राइवर की व्यवस्था कर देते हैं, तो संचालन शुर करेंगे। इसके अगले दिन ही पप्पू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए 40 ड्राइवरों को पेश किया और कहा कि ये लोग एंबुलेंस चलाने के लिए तैयार हैं। पप्पू ने रूडी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। 

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