धर्म और देश के लिए गुरु गोविंद सिंह ने दिया था इन चीजों का बलिदान
चिड़ियों से मै बाज लडाऊ, गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ सवा लाख से एक लडाऊ, तभी गोबिंद सिंह नाम कहाउँ” ये कहावत सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोबिन्द सिंह ने कही थी. गुरु गोविदं सिंह के कई रूप थे वो एक पिता, पुत्र, महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता भी है...
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