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Strongest Currency In World: डॉलर नहीं, ये हैं दुनिया की सबसे महंगी करेंसी, जानिए क्यों वैल्यू और ताकत एक जैसी नहीं होती

Nandani | Nedrick News

Published: 14 Jan 2026, 08:16 AM | Updated: 14 Jan 2026, 08:21 AM

Strongest Currency In World: जब भी पैसों की ताकत की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में अमेरिकी डॉलर का ख्याल आता है। फिल्मों में हो, इंटरनेशनल बिजनेस में या फिर ग्लोबल ट्रेड में, डॉलर हर जगह छाया रहता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिसे दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी माना जाता है, उसकी कीमत कई दूसरी मुद्राओं से कम भी हो सकती है? हकीकत यही है। दुनिया में कुछ ऐसी करेंसी हैं, जिनकी एक यूनिट की वैल्यू डॉलर से कहीं ज्यादा है।

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तो फिर डॉलर सबसे ताकतवर क्यों नहीं?( Strongest Currency In World)

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि जिसकी करेंसी महंगी है, वही देश सबसे मजबूत होगा। लेकिन असल तस्वीर थोड़ी अलग है। किसी भी करेंसी की कीमत सिर्फ देश की ताकत नहीं दिखाती। इसके पीछे सरकार की मौद्रिक नीति, बाजार में पैसे की सप्लाई, विदेशी मुद्रा भंडार, तेल-गैस जैसे संसाधन और अंतरराष्ट्रीय मांग जैसे कई कारण होते हैं।
अमेरिकी डॉलर दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी जरूर है, लेकिन इसकी वैल्यू जानबूझकर बहुत ज्यादा नहीं रखी जाती, ताकि इंटरनेशनल ट्रेड आसान बना रहे।

दुनिया की सबसे महंगी करेंसी कौन सी है?

अगर बात करें दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा की, तो कुवैती दिनार सबसे ऊपर आता है। भारत में एक कुवैती दिनार की कीमत करीब 290 रुपये से ज्यादा है। कुवैत के पास तेल का बड़ा भंडार है और वहां की सरकार ने अपनी करेंसी की सप्लाई सीमित रखी है। इसी वजह से कुवैती दिनार लंबे समय से दुनिया की सबसे महंगी करेंसी बना हुआ है।

बहरीन और ओमान की करेंसी भी बेहद मजबूत

कुवैत के बाद बहरीन दिनार और ओमानी रियाल का नाम आता है। बहरीन दिनार की कीमत भारतीय रुपये में लगभग 230 रुपये से ज्यादा है। इस करेंसी को अमेरिकी डॉलर से जोड़ा गया है, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलता।
वहीं ओमानी रियाल की कीमत करीब 235 से 240 रुपये के आसपास रहती है। ओमान सरकार ने सोच-समझकर अपनी करेंसी की वैल्यू ऊंची रखी है और तेल निर्यात से देश को मजबूत आर्थिक सहारा मिलता है।

जॉर्डनियन दिनार और ब्रिटिश पाउंड की कहानी

जॉर्डनियन दिनार भी अमेरिकी डॉलर से ज्यादा महंगा माना जाता है। इसकी कीमत करीब 125 रुपये से ऊपर रहती है। जॉर्डन की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन वहां की करेंसी को स्थिर रखने के लिए इसे डॉलर से जोड़ दिया गया है।
ब्रिटिश पाउंड की बात करें, तो यह दुनिया की सबसे पुरानी और भरोसेमंद मुद्राओं में से एक है। भारत में एक पाउंड की कीमत लगभग 120 रुपये के आसपास है। लंदन का ग्लोबल फाइनेंशियल हब होना पाउंड की मजबूती की बड़ी वजह है।

स्विस फ्रैंक, यूरो और केमैन आइलैंड्स डॉलर

स्विस फ्रैंक को दुनिया की सबसे सुरक्षित करेंसी माना जाता है। इसकी कीमत करीब 110 रुपये से ज्यादा है। स्विट्जरलैंड की मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता इसे खास बनाती है। केमैन आइलैंड्स डॉलर भी अमेरिकी डॉलर से ज्यादा मजबूत है। यह देश टैक्स हेवन के रूप में जाना जाता है, जिसका असर उसकी करेंसी पर भी दिखता है। यूरो भी डॉलर से ज्यादा वैल्यू रखता है और यह दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है।

वैल्यू और ताकत में फर्क समझना जरूरी

यह जानना जरूरी है कि किसी करेंसी की ऊंची कीमत का मतलब हमेशा मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं होता। अमेरिकी डॉलर आज भी इंटरनेशनल ट्रेड, रिजर्व करेंसी और निवेश के मामले में सबसे आगे है। वहीं ज्यादा वैल्यू वाली करेंसी अक्सर सीमित सप्लाई और खास आर्थिक नीतियों की वजह से महंगी नजर आती हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

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