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Anil Prakash Joshi Kaun Hai: पहले CBI जांच और अब पद्मश्री डॉ. जोशी की एंट्री! अंकिता भंडारी केस में नया मोड़

Nandani | Nedrick News

Published: 11 Jan 2026, 10:14 AM | Updated: 11 Jan 2026, 10:23 AM

Anil Prakash Joshi Kaun Hai: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में गुस्सा और सवाल अभी भी थमे नहीं हैं। भले ही इस मामले में सीबीआई जांच का ऐलान हो चुका हो, लेकिन इंसाफ की मांग को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार सामने आ रहा है। इसी कड़ी में आज उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है, जिसे कांग्रेस, उत्तराखंड महिला मंच, गढ़वाल सभा और उत्तराखंड क्रांति दल जैसे कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है। हालांकि, कुछ व्यापारिक संगठनों ने इस बंद से दूरी बनाए रखी है।

इस बीच इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब देश के जाने-माने पर्यावरणविद और पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने देहरादून के वसंत विहार थाने में एक नई एफआईआर दर्ज करवाई। इसके बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान भी सामने आया है।

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शांतिपूर्ण बंद की अपील, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट (Anil Prakash Joshi Kaun Hai)

उत्तराखंड बंद को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह का प्रदर्शन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से किया जाए। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की FIR से क्यों बढ़ी हलचल?

अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की एंट्री ने इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। डॉ. जोशी ने देहरादून के वसंत विहार थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है।

डॉ. जोशी का कहना है कि लंबे समय से सोशल मीडिया, मीडिया रिपोर्ट्स और आम जनता के बीच एक कथित “VIP” को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर इस मामले में कोई प्रभावशाली व्यक्ति शामिल है और उसे जांच से बाहर रखा गया है, तो यह राज्य की बेटियों की सुरक्षा और अस्मिता के लिए बेहद गंभीर मामला है।

FIR में क्या-क्या बातें कह गई हैं?

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स, वायरल ऑडियो-वीडियो क्लिप्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कुछ अज्ञात लोग भी शामिल थे, जिन्हें “VIP” कहकर संबोधित किया जा रहा है।

हालांकि एफआईआर में यह भी स्वीकार किया गया है कि इस मामले में नामजद आरोपियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या कुछ अहम सबूतों को जानबूझकर छिपाया गया या नष्ट किया गया। शिकायत में यह आशंका जताई गई है कि VIP से जुड़ा पहलू एक अलग और स्वतंत्र अपराध हो सकता है, जिसकी अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई है।

डॉ. जोशी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की अलग से, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर न रखा जाए।

CBI जांच पर क्या बोले IG गढ़वाल?

आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने प्रेस वार्ता में बताया कि डॉ. अनिल जोशी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर ही अब सीबीआई अपनी आगे की कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से इस मामले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है।

पुलिस विभाग का दावा है कि वह अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह गंभीर है और समाज में फैले भ्रम और अविश्वास को खत्म करने के लिए सीबीआई जांच सबसे उपयुक्त रास्ता है।

हरीश रावत ने उठाए सवाल, सरकार से की ये मांग

इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने डॉ. अनिल जोशी के कदम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि एफआईआर अंकिता के माता-पिता के नाम से दर्ज होनी चाहिए थी।

हरीश रावत ने अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह के एक ऑडियो का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को उन्हें कानूनी सहायता देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, ताकि कथित VIP का सच सामने आ सके और किसी भी स्तर पर दबाव की गुंजाइश न रहे।

कौन हैं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी?

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी देश के जाने-माने पर्यावरणविद हैं और हिमालयी क्षेत्रों में विकास व पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले करीब चार दशकों से काम कर रहे हैं। वह हेस्को (HESCO – Himalayan Environmental Studies and Conservation Organisation) के संस्थापक हैं।

उनके सामाजिक और पर्यावरणीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाज चुकी है। उन्हें ‘माउंटेन मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। यही वजह है कि उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत को समाज और प्रशासन दोनों गंभीरता से ले रहे हैं।

अब आगे क्या?

सीबीआई जांच के ऐलान, उत्तराखंड बंद और डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर के बाद यह साफ है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड अभी खत्म हुई कहानी नहीं है। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सीबीआई जांच में कथित VIP से जुड़ा सच सामने आएगा और क्या अंकिता को पूरी तरह इंसाफ मिल पाएगा।

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