Sherni Review: अच्छी कहानी, दमदार एक्टिंग के साथ ये खास मैसेज देती है विद्या बालन की शेरनी, मूवी में रोमांच की कमी!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 Jun 2021, 12:00 AM | Updated: 18 Jun 2021, 12:00 AM

‘शकुंतला देवी’ के बाद एक्ट्रेस विद्या बालन की एक और फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई हैं। मूवी का नाम है ‘शेरनी’, जिसमें विद्या एक वन विभाग के अधिकारी की भूमिका में नजर आ रही हैं। विद्या की ये फिल्म एक बेहद ही खास मैसेज समाज को देती है। इस फिल्म में ये दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे इंसान विकास के नाम पर जंगलों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। ‘शेरनी’ का डायरेक्शन किया है अमित मसुरकर ने, जो पहले न्यूटन भी लेकर आए थे। वो अहम मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। 

कुछ ऐसी है फिल्म की कहानी…

बात अब फिल्म की कहानी की करें तो ये मुख्य तौर पर जंगल, एक शेरनी और वन विभाग की कार्य प्रणाली के इर्द-गिर्द घूमती है। विद्या विन्सेंट (विद्या बालन) में अपनी पर्सनल के साथ प्रोफेशनल लाइफ में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जहां एक तरफ सास और मां उससे बच्‍चा चाहते हैं। वहीं इस दौरान विद्या अपनी जॉब छोड़ने की भी सोच रही होती हैं। 

विद्या एक ऐसे क्षेत्र में काम करती हैं, जहां अधिकतर मर्द ही होते हैं और वो होती हैं वन विभाग में अकेली महिला अफसर। कई जगहों पर उन्हें कमजोर दिखाने की भी कोशिश की जाती हैं, लेकिन फिर भी वो अपने काम को बखूबी करती रहती हैं। 

6 सालों तक डेस्क पर काम करने के बाद विद्या बिजशपुर पहुंचती है. यहां पहुंचकर वह कई नई जिम्मेदारियों को निभाती है। यहां पहुंचकर उन्हें एक आदमखोर शेरनी को पकड़ने की जिम्मेदारी मिलती हैं। इस शेरनी के चलते पूरे गांव में डर का माहौल बना हुआ है। शेरनी कई लोगों की जान ले चुकी होती हैं। विद्या चाहती हैं कि वो शेरनी को सही सलामत पकड़ लें, लेकिन कई लोग उसका शिकार करने की कोशिश करते हैं। 

इस दौरान विद्या का बॉस बंसल (बृजेंद्र काला) सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश करता है। वो शेरनी का शिकार करने के लिए एक प्राइवेट शिकारी को लाता है। इस दौरान फिल्म में राजनेताओं की भी एंट्री होती है, जिसको केवल चुनाव से ही मतलब होता है। अब इन सब परेशानियों के बीच विद्या क्या करती हैं? वो शेरनी को बचाने में कामयाब हो पाती हैं या नहीं? ये सब तो आपको फिल्म में देखने को ही मिलेगा। 

मूवी में कई दमदार डॉयलाग हैं, जिसमें से एक ये है- ‘आप 100 बार जंगल जा सकते हैं और शायद एक ही बार बाघ को देख सकते हैं, लेकिन बाघ ने आपको 99 बार देखा है।’ इस डॉयलाग के जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कि इंसान जंगल में घुसे हैं। जानवरों का तो वो ही घर हैं, वो वहां के असली मालिक हैं। 

विद्या की एक्टिंग दमदार

मूवी में विद्या बालन की एक्टिंग से लोग इंप्रेस हैं। एक वन विभाग की महिला अधिकारी के रोल को उन्होंने बखूबी निभाया। इसके अलावा मूवी के बाकी किरदारों विजय राज, बृजेन्द्र काला, शरत सक्सेना, नीरज काबी और मुकुल चड्ढा ने भी अपने किरदार के साथ इंसाफ किया। 

फिल्म में है कुछ कमियां भी…

अगर आपको मिर्च मसाला वाली फिल्में देखना पसंद हैं, तो शायद आपको ये मूवी पसंद ना आए। मूवी के जरिए समाज में एक खास मैसेज देने की कोशिश की गई है। एक्टिंग और कहानी अच्छी है, लेकिन डायरेक्शन उतना खास नहीं। फिल्म आपको थोड़ी स्लो और फीकी-फीकी लग सकती है। 

सोशल मीडिया पर मिल रहे ऐसे रिव्यू

अब बात करते हैं ‘शेरनी’ के ट्विटर की। मूवी देखने के बाद लोग इसका सोशल मीडिया पर रिव्यू देते नजर आ रहे हैं। आइए आपको बताते हैं उनके मुताबिक ये फिल्म कैसी है…

एक यूजर ने शेरनी का रिव्यू करते हुए लिखा- “सच्चाई को दिखाने की एक ईमानदार कोशिश की गई, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से ध्यान केंद्रित करने के कारण कहानी में जंगल का रोमांच खो जाता है। इंसान और बाघों के संघर्ष पर एक आकर्षक फोकस किया गया। विद्या बालन का काम शानदार है।”

वहीं दूसरे यूजर ने कहा- “शेरनी प्रकृति और रूढ़िवाद के बारे में एक कमाल की फिल्म है। अगर आप धरती मां से प्यार करते हैं और चाहते हैं कि हमारे जंगल फलें-फूलें, तो आपको ये फिल्म पसंद आएगी। विद्या बालन के शानदार अभिनय के लिए इसे देखें। शानदार फोटोग्राफी, और एक सुंदर संदेश।”

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