Valentine Day: वेलेंटाइन डे के करीब आते ही इससे जुड़ी कहानियां और कड़वी यादें ताजा हो जाती हैं। जहां एक तरफ दुनिया लाल गुलाबों के जश्न में डूबी होती है, वहीं दूसरी तरफ 14 फरवरी को शहीदों पर हुआ वह आतंकी हमला आज भी हर भारतीय के दिल को छलनी कर देता है। यही वजह है कि अब इस दिन को ‘ब्लैक डे’ के रूप में भी याद किया जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिस ‘वेलेंटाइन डे’ को लेकर आज दुनिया में इतना शोर है, उसका अपना इतिहास भी किसी ‘ब्लैक डे’ से कम डरावना नहीं था? जी हां, 14-15 फरवरी की इस तारीख के पीछे एक और ऐसा सच छिपा है, जो आज के लाल गुलाबों और चॉकलेट्स से कोसों दूर है।
यह कहानी है प्राचीन रोम के उस उत्सव की जिसे ‘लुपरकैलिया’ कहा जाता था। जिसे आज हम प्यार का दिन कहते हैं, उसकी जड़ें असल में अजीबोगरीब रीति-रिवाजों, बलि और एक ऐसे हिंसक इतिहास से जुड़ी हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। आज का Valentine’s Day असल में प्राचीन रोम के एक “कोड़े मारने वाले” त्योहार की जगह शुरू किया गया था। कहा जाता है कि चर्च ने पुराने पगान (गैर-ईसाई) उत्सव को हटाकर उसकी जगह नया ईसाई पर्व बना दिया। लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ था? इतिहासकारों की राय इस मामले में थोड़ी अलग है।
क्या था Lupercalia?
Lupercalia प्राचीन रोम का एक धार्मिक-लोक उत्सव था, जो हर साल 15 फरवरी को मनाया जाता था। इसका संबंध शुद्धि (Purification) और उर्वरता (Fertility) से माना जाता था।
कैसे मनाया जाता था यह त्योहार?
रोमन मान्यता के अनुसार, यही वह जगह थी जहां Romulus and Remus को एक मादा भेड़िया ने दूध पिलाया था। यहीं से शुरू होती थी इस उत्सव की सबसे अजीब रस्म। उत्सव में लुपरसी नाम के पुजारी एक पवित्र गुफा में अनुष्ठान करते थे, पुजारी बलि दिए गए जानवरों (बकरे और कुत्ते) की खाल से चमड़े की पट्टियां बनाते थे, जिन्हें ‘फेब्रुआ’ (Februa) कहा जाता था। इन पट्टियों को लेकर वे शहर की गलियों में दौड़ते थे और सामने आने वाली महिलाओं को इनसे मारते थे। माना जाता था कि इस चोट से महिलाओं को ‘उर्वरता’ (Fertility) का आशीर्वाद मिलता है और डिलीवरी के दौरान दर्द कम होता है।
मैचमेकिंग लॉटरी वाली कहानी कितनी सच?
अक्सर कहा जाता है कि Lupercalia में पुरुषों और महिलाओं के नाम की पर्चियां निकाली जाती थीं और जोड़ी बनाई जाती थी और यही आगे चलकर Valentine’s Day की प्रेम परंपरा बन गई। लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिलता। ऐसी लव लॉटरी का भरोसेमंद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे ज्यादा तर लोककथा माना जाता है। फिर Valentine’s Day से क्यों जोड़ा जाता है? अब सवाल उठता है कि अगर सीधा संबंध साबित नहीं है, तो दोनों को जोड़ा क्यों जाता है?
1. तारीखों का पास-पास होना: Lupercalia 15 फरवरी को मनाया जाता था, और Valentine’s Day 14 फरवरी को। यानी लगातार दो दिन। बस यहीं से लोगों को लगा कि शायद चर्च ने जान-बूझकर पुराने त्योहार की जगह नया पर्व रख दिया। लेकिन इतिहासकार कहते हैं—सिर्फ तारीख पास होने से यह साबित नहीं होता कि एक ने दूसरे को रिप्लेस किया।
2. चर्च द्वारा पुराने त्योहारों को नया रूप देने की धारणा: इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब चर्च ने पुराने स्थानीय उत्सवों को नया धार्मिक अर्थ दे दिया। इसी वजह से लोगों को यह मानना आसान लगता है कि यहां भी ऐसा ही हुआ होगा। लेकिन हर मामले में ऐसा हो—यह जरूरी नहीं।
3. रोमांटिक Valentine’s Day तो बहुत बाद में आया: आज का Valentine’s Day—कार्ड, गिफ्ट, गुलाब, कपल्स, रोमांस—शुरू से ऐसा नहीं था। 14 फरवरी को संत वैलेंटाइन के सम्मान में मनाने की परंपरा 5वीं सदी के आसपास जुड़ी, जब Pope Gelasius I ने इस दिन को मान्यता दी।
लेकिन रोमांटिक Valentine’s Day का रिकॉर्ड 14वीं सदी के आसपास से मिलता है। यानी Lupercalia (जिसका आखिरी उल्लेख 5वीं सदी के अंत तक मिलता है) और रोमांटिक Valentine’s Day के बीच कई सौ साल का अंतर है। अगर सच में रिप्लेसमेंट हुआ होता, तो बीच में इतनी लंबी खामोशी क्यों होती?
तो क्या सच है?
इतिहास के उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह कहना ज्यादा सही होगा। Lupercalia एक असली, प्राचीन रोमन त्योहार था जिसमें उर्वरता से जुड़े अनुष्ठान होते थे। Valentine’s Day का शुरुआती संदर्भ संत वैलेंटाइन की शहादत से जुड़ा है। दोनों के बीच सीधा “रिप्लेसमेंट” वाला संबंध निर्णायक रूप से साबित नहीं है। आधुनिक रोमांटिक Valentine’s Day काफी बाद में विकसित हुआ।
साफ शब्दों में कहें तो Valentine’s Day ने Lupercalia को रिप्लेस किया, यह दावा पक्का इतिहास नहीं बल्कि ज्यादा तर लोककथा और अनुमान पर आधारित है। दोनों त्योहारों की तारीखें पास-पास जरूर हैं, लेकिन इतिहास में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिलता जो यह कह सके कि एक ने सीधे-सीधे दूसरे की जगह ली। इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि “Valentine’s Day तो कोड़े मारने वाले त्योहार से निकला है”, तो आप मुस्कुराकर कह सकते हैं इतिहास इतना सीधा नहीं होता






























