Us-Iran War Update: शेयर बाजार के माहौल में मंगलवार को तेजी का संकेत दिखाई देने लगा है। अमेरिकी वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो आने वाले कारोबारी सत्र के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान में युद्ध समाप्त करने की तैयारी से जुड़ी रिपोर्ट है।
ट्रंप के ईरान वार बंद करने के इशारे: Us-Iran War Update
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों को संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना को समाप्त करने के लिए तैयार हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही अमेरिकी बाजार में तेजी का माहौल बन गया। NASDAQ-100 फ्यूचर प्राइस सुबह करीब 10.45 बजे 0.55 फीसदी ऊपर थे। S&P 500 फ्यूचर प्राइस में 0.7 फीसदी की उछाल आई, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज के फ्यूचर प्राइस में 0.8 फीसदी की तेजी देखी गई।
तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका में युद्ध समाप्ति की संभावना के संकेतों के साथ ही तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस में 1.22 डॉलर यानी 1.08 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और यह 111.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शुरुआती कारोबार में यह 2 फीसदी ऊपर था। इसके अलावा नेचुरल गैस की कीमत और डॉलर इंडेक्स में भी गिरावट देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट शॉर्ट टर्म में युद्ध समाप्ति की संभावना को दर्शाती है। हालांकि उन्होंने कहा कि कोई भी बड़ा बदलाव होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह से खुलने पर निर्भर करेगा।
भारत में निफ्टी और सेंसेक्स की प्रतिक्रिया
भारत में भी गिफ्ट निफ्टी करीब 135 अंकों की तेजी का संकेत दे रहा है। हालांकि मंगलवार को महावीर जयंती के कारण बाजार बंद रहेगा। घरेलू बाजार पिछले कारोबारी सत्र में कमजोर निवेशक भावना के बीच गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 फीसदी गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 फीसदी की गिरावट के साथ 22,331.40 पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स में 1,809.09 अंकों या 2.45 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।
एशियाई बाजारों में भारी दबाव
वहीं, एशियाई बाजारों में मंगलवार को गिरावट का सिलसिला जारी रहा। जापान का निक्केई 1.58 फीसदी टूट गया, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.80 फीसदी गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4.26 फीसदी नीचे आया। इस महीने एशियाई बाजारों में 17 फीसदी से अधिक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी होगी।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के युद्ध समाप्ति के संकेत और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बाजार पर सबसे बड़ा असर डाल रही है। तेल की कीमतों में गिरावट निवेशकों के लिए राहत का संकेत है, जबकि एशियाई बाजारों की कमजोरी वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को दिखा रही है। भारत में भी घरेलू बाजार वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होता रहा है।
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