US Attack On Venezuela: वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और कई देशों ने अमेरिका के इस कदम को लेकर कड़ा विरोध जताया है। हालात तब और गंभीर हो गए जब उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी दे दी।
किम जोंग उन की अमेरिका को सख्त चेतावनी (US Attack On Venezuela)
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने मादुरो को अपना “दोस्त” बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से साफ शब्दों में कहा है कि मादुरो की स्थिति तुरंत सार्वजनिक की जाए और उन्हें रिहा किया जाए। उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के हवाले से किम ने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई दमनकारी है और पूरी दुनिया को युद्ध की ओर धकेल सकती है। उन्होंने चेताया कि अगर मादुरो को तुरंत नहीं छोड़ा गया, तो इसके गंभीर अंतरराष्ट्रीय नतीजे हो सकते हैं और हालात तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति बना सकते हैं।
अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप
किम जोंग उन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में जबरन दखल दे रहा है। उनके मुताबिक, किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। किम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और मादुरो को जल्द से जल्द रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है।
मादुरो पर अमेरिका के गंभीर आरोप
वहीं अमेरिका का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई कानून के तहत की गई है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-टेररिज्म, कोकेन तस्करी, मशीनगनों की अवैध तस्करी और अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, काराकास में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद डेल्टा फोर्स ने मादुरो को गिरफ्तार किया। ट्रंप प्रशासन इस कदम को न्यायिक कार्रवाई बता रहा है।
रूस ने बताया ‘सशस्त्र आक्रमण’
अमेरिका की कार्रवाई पर रूस ने कड़ा रुख अपनाया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे सशस्त्र आक्रमण करार देते हुए कहा कि अमेरिका के तर्क आधारहीन हैं और यह वैचारिक दुश्मनी से प्रेरित हैं। रूस ने कहा कि वेनेजुएला को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है और किसी भी तरह का बाहरी सैन्य हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही मॉस्को ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
अमेरिका के खिलाफ एकजुट होते देश
रूस के अलावा कोलंबिया, क्यूबा, चिली, मेक्सिको, ब्राजील, ईरान, स्पेन और जर्मनी जैसे कई देशों ने भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है। कोलंबिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि वह सैन्य टकराव नहीं चाहता, लेकिन शांति और मानव गरिमा की रक्षा जरूरी है। सुरक्षा कारणों से कोलंबिया ने वेनेजुएला सीमा पर अपनी सेना तैनात कर दी है।
क्या वैश्विक संकट की ओर बढ़ रही दुनिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग उन का बयान वैश्विक तनाव को और भड़का सकता है। पहले ही संयुक्त राष्ट्र और कई देश अमेरिका की कार्रवाई पर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में अमेरिका-वेनेजुएला विवाद अब सिर्फ दो देशों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हालात कोल्ड वॉर जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस संकट पर टिकी हुई हैं।






























