Trump on Iran War: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। शुक्रवार को ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान के साथ “बिना शर्त सरेंडर के अलावा कोई डील नहीं होगी।” इस बयान के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले कुछ दिनों में युद्धविराम की घोषणा हो सकती है।
दरअसल, पिछले साल भी इसी तरह की एक पोस्ट के बाद कुछ ही दिनों में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला था। इसलिए विश्लेषक अब इस बयान को संभावित कूटनीतिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
और पढ़ें: Balen Shah: कौन हैं बालेन शाह, 35 की उम्र में बन सकते हैं नेपाल के नए PM! इतनी है नेटवर्थ
ट्रंप का पोस्ट और ‘MIGA’ का संदेश (Trump on Iran War)
ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ शब्दों में कहा कि ईरान के साथ किसी भी समझौते का रास्ता तभी खुलेगा जब वह बिना शर्त आत्मसमर्पण करेगा। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य की एक अलग तस्वीर भी पेश की। ट्रंप ने लिखा कि जब ईरान में “एक महान और स्वीकार्य नेता” का चुनाव हो जाएगा, तब अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ईरान को “बर्बादी के कगार से वापस लाकर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और समृद्ध बनाना” होगा। अपने पोस्ट के अंत में ट्रंप ने “Make Iran Great Again (MIGA)” का नारा भी दिया, जो उनके पुराने राजनीतिक नारे की तर्ज पर ही है।
Today, President Trump called for Iran’s “unconditional surrender.”
The last time we saw this happen was on June 17th, 2025.
6 days later, on June 23rd, a ceasefire was announced.
Will history repeat itself on March 12th? pic.twitter.com/2NxZ6rxBKY
— The Kobeissi Letter (@KobeissiLetter) March 6, 2026
छह दिन बाद हुआ था पिछली बार सीजफायर
यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी तरह की मांग ट्रंप ने 17 जून 2025 को भी की थी। उस समय इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन तक चली जंग जारी थी। उस पोस्ट के ठीक छह दिन बाद, 23 जून को ट्रंप ने घोषणा की थी कि दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौता हो गया है। उस समय इस समझौते को करवाने में अमेरिका के साथ कतर ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
इसी वजह से अब कई विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे हैं कि अगर पिछली बार जैसा ही पैटर्न दोहराया गया, तो 12 मार्च के आसपास किसी संभावित युद्धविराम का ऐलान हो सकता है।
इस बार की जंग पहले से कहीं ज्यादा बड़ी
हालांकि मौजूदा हालात पिछले साल से काफी अलग बताए जा रहे हैं। इस बार का संघर्ष कहीं ज्यादा व्यापक हो चुका है और यह एक दर्जन से अधिक देशों तक फैल गया है। इसका असर खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात पर भी पड़ रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्टों के मुताबिक कई अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है। वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद तेहरान में गुस्सा और बदले की भावना और ज्यादा तेज हो गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछली जंग भौगोलिक और राजनीतिक रूप से काफी हद तक सीमित थी, जबकि इस बार स्थिति ज्यादा जटिल और अस्थिर हो गई है।
ईरान का सख्त रुख
ईरान की तरफ से भी फिलहाल युद्ध रोकने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कहा है कि मध्यस्थता करने वाले देशों को अपना दबाव उन ताकतों पर डालना चाहिए जिन्होंने ईरानी लोगों को कम आंककर यह संघर्ष शुरू किया। उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल किसी जल्दबाजी में समझौता करने के मूड में नहीं है।
क्या फिर मध्यस्थ बनेगा कतर?
पिछली बार सीजफायर कराने में कतर की भूमिका अहम रही थी, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। हाल ही में ईरानी ड्रोन हमले में कतर की रास लफ़ान गैस फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद देश ने LNG एक्सपोर्ट पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कतर इस बार फिर से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में होगा या नहीं।
12 मार्च तक अब केवल कुछ दिन ही बचे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी देश खुलकर शांति वार्ता की पहल करता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें आने वाले दिनों के कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
