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Sikhism in Mauritius: मॉरीशस की सुनहरी रेत में बसी पंजाबी कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Nov 2025, 12:00 AM | Updated: 18 Nov 2025, 12:00 AM

Sikhism in Mauritius: मॉरीशस, जो हिंद महासागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप देश है, आज भी अपनी विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग मिलजुलकर रहते हैं। वहीं, सिख धर्म यहां कोई बड़ा धार्मिक ग्रुप नहीं, लेकिन 0.3 फीसदी पॉपुलेशन के साथ ये चौथा सबसे बड़ा रिलिजियस कम्युनिटी है। करीब 3,500-3,800 सिख यहां रहते हैं, ज्यादातर पंजाबी बैकग्राउंड से, जो IT, बैंकिंग और टूरिज्म में नाम कमा रहे हैं। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ नंबर्स की नहीं है। आईए विस्तार से जानते हैं मॉरीशस में बसे सिख धर्म के बारे में।

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इतिहास: इंडेंटर्ड लेबर्स से लेकर प्रोफेशनल्स तक का सफर (Sikhism in Mauritius)

मॉरीशस की सिख हिस्ट्री 19वीं सदी के इंडियन लेबर्स से शुरू नहीं होती। 1835 से 1910 तक लगभग 4.5 लाख भारतीय मजदूर शुगर कैन खेतों में काम करने आए। इनमें अधिकांश बिहार और यूपी के थे, लेकिन कुछ पंजाब, बंगाल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से भी आए। मजदूरों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा, और उनके संघर्ष से ही मॉरीशस ने आज की प्रगति हासिल की। यहां सिखों का आना धीरे-धीरे हुआ वो भी स्पोरैडिक इमिग्रेशन से। एक दिलचस्प किस्सा तो ये कि ब्रिटिश गवर्नर का बॉडीगार्ड एक सिख था, जो लोकल बिहारी औरत से शादी करके यहीं बस गया।

1980 के दशक तक सिख कम्युनिटी छोटी थी और  1989 में तो लोग किसी के घर में ही वीकेंड पर ‘गुरुद्वारा’ सेटअप करके मिलते थे। फिर 90 के दशक में प्रोफेशनल्स आए IT, फाइनेंस सेक्टर में। आज मॉरीशस-इंडिया के बीच एक्सचेंजेस चलते हैं, जैसे मिलिट्री ट्रेनिंग या कल्चरल प्रोग्राम्स। ये छोटी कम्युनिटी ने क्रेओल लैंग्वेज (फ्रेंच-बिहारी-इंग्लिश का मिक्स) सीख ली, लेकिन पगड़ी और लंगर की परंपरा बरकरार रखी।

पॉपुलेशन: 0.3% लेकिन इंपैक्ट बड़ा

मॉरीशस की टोटल पॉपुलेशन 12.6 लाख के आसपास है, तो सिखों की संख्या 3,500 से 3,800 बताई जाती है। ये आंकड़ा आधिकारिक सेंसस से आता है, जहां सिख धर्म चौथा सबसे बड़ा ग्रुप है, हिंदू (48%), क्रिश्चियन (32%), मुस्लिम (17%) के बाद। ज्यादातर पोर्ट लुई और क्वाट्र बर्नेस जैसे एरियाज में रहते हैं। पंजाबी फैमिलीज में हिंदू-सिख मिक्स है, लेकिन 90% सिख। ये नंबर्स छोटे लगते हैं, लेकिन इन्होंने GDP में योगदान दिया वो भी टूरिज्म और फाइनेंस में। एक रिपोर्ट कहती है कि सिख प्रोफेशनल्स ने मॉरीशस को इंडिया से जोड़ा, जैसे बैंकिंग एक्सचेंजेस से।

सिंगल गुरुद्वारा लेकिन सेंट्रल हब

अब मॉरीशस में गुरुद्वारों की बात करें तो यहां गुरुद्वारों की तादाद ज्यादा नहीं सिर्फ एक मेन गुरुद्वारा है, जो कम्युनिटी का हार्ट है। नाम है गुरुद्वारा श्री गुरु सिंग सभा, पोर्ट लुई में, बाल्ला गैरेज के पास सोडनाक एरिया में। छोटा सा डोम वाला स्ट्रक्चर, लेकिन अंदर की वाइब कमाल की लंगर सर्विस और कीर्तन सेशन। गुरुद्वारा बनने से पहले 1989 में घरों में ही सत्संग होते थे। इतना ही नहीं, यहां विसिटर्स के लिए रूम्स भी हैं। एक ब्लॉग में लिखा है कि ये गुरुद्वारा सिख हिस्ट्री की पिक्चर्स से सादा है, लेकिन कम्युनिटी की एकजुटता दिखाता है। सिख कम हैं तो गुरुद्वारा भी सिंगल, लेकिन फेस्टिवल्स पर धूम मच जाती जैसे बैसाखी पर अखंड पाठ।

प्रसिद्ध हस्तियां: खेर जगत सिंह

मॉरीशस के पंजाबी समुदाय की सबसे प्रमुख और रोचक हस्ती थी खेर जगत सिंह। उनका जन्म अमृतसर में हुआ था और मात्र तीन महीने की उम्र में वे मॉरीशस आ गए। उनके पिता ब्रिटिश सेवा में जेल इंस्पेक्टर थे और उन्होंने मॉरीशस की एक स्थानीय महिला से विवाह किया।

खेर जगत सिंह ने पत्रकारिता और राजनीति दोनों में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्र स्थापित किए, जैसे ‘The Mauritian Times’, ‘The Nation’ और ‘Advance’।

राजनीति में उनकी सक्रियता ने मॉरीशस के शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक नीतियों को आकार दिया। स्वतंत्रता के बाद वे स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति मंत्री रहे। 1980 में ब्रिटिश महारानी द्वारा उन्हें नाइटेड किया गया। उनकी मृत्यु 1985 में केवल 53 वर्ष की उम्र में हुई, लेकिन उनका योगदान आज भी मॉरीशस के समाज में याद किया जाता है।

कुल मिलाकर, मॉरीशस के सिख छोटे परिवार जैसे हैं, लेकिन उनका कंट्रीब्यूशन बड़ा। गुरुद्वारा से लंगर, पॉपुलेशन से प्रोफेशनल स्किल्स, सब कुछ इंस्पायर करता है। जैसे गुरु नानक जी कहते थे, ‘सच्चा सौदा’ यहां वो जी रहा है।

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