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Shah Rukh Khan controversy: धर्म, राजनीति और क्रिकेट के बीच फंसे किंग खान, साधु-संतों से लेकर संसद तक गरमाई बहस

Nandani | Nedrick News

Published: 07 Jan 2026, 09:43 AM | Updated: 07 Jan 2026, 09:43 AM

Shah Rukh Khan controversy: बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह न तो उनकी कोई फिल्म है और न ही कोई बयान। इस बार मामला आईपीएल 2026, कोलकाता नाइट राइडर्स और एक बांग्लादेशी क्रिकेटर की खरीद से जुड़ा है, जिसने धर्म, राजनीति और राष्ट्रवाद की बहस को एक साथ हवा दे दी है। इस विवाद में साधु-संतों से लेकर बड़े राजनीतिक दल, सांसद, आध्यात्मिक गुरु और पूर्व क्रिकेटर तक कूद पड़े हैं।

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नंदिनी निकेतन में महंत परमहंस दास का बयान (Shah Rukh Khan controversy)

मंगलवार को नंदिनी निकेतन में चल रहे आठ दिवसीय राष्ट्रकथा कार्यक्रम के दौरान अयोध्या के तपस्वी छावनी के महंत जगतगुरु परमहंस दास पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को आशीर्वाद दिया और मंच से कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।

परमहंस दास ने शाहरुख खान को लेकर चल रहे विवाद पर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर की किताब Pakistan and Partition of India का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमान कभी पूरी तरह राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता और उसका झुकाव हमेशा अपने धर्म के लोगों की ओर रहता है। उन्होंने दावा किया कि शाहरुख खान भारत में पैसा कमाकर पाकिस्तान और बांग्लादेश में आतंकियों को फंडिंग करते हैं।

सरकार से कार्रवाई की मांग और राजनीति में उतरने का ऐलान

परमहंस दास ने शाहरुख खान को जासूसऔर राष्ट्रद्रोहीबताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ तनाव के माहौल में जो लोग भाईचारा दिखाते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। इतना ही नहीं, महंत ने यह भी ऐलान कर दिया कि अब साधु-संतों को राजनीति में आना ही पड़ेगा। उन्होंने खुद को बीजेपी का सिपाही बताते हुए 2029 के चुनाव में उतरने की घोषणा भी कर दी।

बाबरी मस्जिद, JNU और हिंदू राष्ट्र पर बयान

परमहंस दास यहीं नहीं रुके। बंगाल में बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि अगर कोई इसे बनाने की कोशिश करेगा तो उसकी कब्र जरूर बनेगी, लेकिन बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी।
जेएनयू में हालिया नारेबाजी को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी बताया और ऐसे छात्रों पर NSA लगाने की बात कही। साथ ही उन्होंने हिंदू राष्ट्र की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अगर भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बना तो हिंदू सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और कश्मीर का उदाहरण देते हुए भारत में भी वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई।

आईपीएल ऑक्शन से शुरू हुआ नया विवाद

दरअसल, शाहरुख खान के खिलाफ यह नया विवाद आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन के बाद शुरू हुआ। 16 दिसंबर को हुए ऑक्शन में शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को 9.2 करोड़ रुपये में खरीदा। मुस्ताफिजुर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं और अपनी स्लोअर गेंदों और कटर्स के लिए जाने जाते हैं। क्रिकेट के लिहाज से यह एक मजबूत खरीद मानी गई, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक माहौल में यह फैसला विवादों में घिर गया।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और बढ़ा आक्रोश

विवाद तब और गहरा गया जब बांग्लादेश में चार हिंदुओं की लिंचिंग समेत कई हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आईं। इसके बाद शाहरुख खान और उनकी टीम पर आरोप लगने लगे कि उन्होंने ऐसे देश के खिलाड़ी को खरीदा है जहां हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर शाहरुख के खिलाफ बायकॉट की मांग तेज हो गई और कुछ लोगों ने उन्हें देशद्रोही तक कहना शुरू कर दिया।

संतों और नेताओं की नाराजगी

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने भी शाहरुख खान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह नायक नहीं हैं और उनके काम गद्दार जैसे हैं। वहीं आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने शाहरुख और केकेआर पर बांग्लादेश में हिंदुओं की पीड़ा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इतनी हिंसा के बाद उसी देश के खिलाड़ी को टीम में शामिल करना संवेदनहीनता है।

बीजेपी का हमला और बंगाल की राजनीति

भाजपा नेताओं का कहना है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, तब वहां के खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल करना गलत है। बीजेपी नेता संगीत सोम ने सीधे तौर पर इसके लिए शाहरुख खान को जिम्मेदार ठहराया। इस मुद्दे को बंगाल की राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तुष्टिकरण के आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि शाहरुख को मजहब के आधार पर तरजीह दी जा रही है और उन्हें बंगाल का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है।

विपक्ष का पलटवार

वहीं दूसरी ओर, टीएमसी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने इस पूरे विवाद को राजनीति से प्रेरित बताया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाया कि अगर बांग्लादेशी खिलाड़ी को रखने पर शाहरुख खान गद्दार हैं, तो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने पर सरकार क्या कहेगी? उन्होंने कहा कि सरकार की नीति साफ होनी चाहिए और चयनात्मक तरीके से किसी को निशाना बनाना गलत है।

पूर्व क्रिकेटरों की राय

पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन ने भी शाहरुख खान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का चयन टीम मैनेजमेंट करता है, न कि अकेले शाहरुख खान। बीसीसीआई ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों को नीलामी में शामिल किया, इसलिए एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि केकेआर की सह-मालिक जूही चावला को क्यों निशाना नहीं बनाया जा रहा।

पहले भी आईपीएल खेल चुके हैं मुस्ताफिजुर

गौर करने वाली बात यह है कि मुस्ताफिजुर रहमान इससे पहले भी कई आईपीएल टीमों के लिए खेल चुके हैं, लेकिन इस बार विवाद की वजह चुनावी सियासत और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल माना जा रहा है। अब तक न तो भारत सरकार और न ही बीसीसीआई ने इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान दिया है।

मुस्लिम संगठनों की भी आपत्ति

दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को लेकर आपत्ति सिर्फ हिंदू संगठनों की ओर से ही नहीं, बल्कि कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी जताई है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी ने कहा कि बांग्लादेशी क्रिकेटरों को वहां हो रहे अत्याचारों पर खुलकर बोलना चाहिए।

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Nandani

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