Second Hand Car Deals: दिल्ली की सड़कों पर या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर अगर आप BMW, Audi या Mercedes जैसी लग्ज़री कारों को 5–10 लाख रुपये में देखते हैं, तो पहली प्रतिक्रिया अक्सर यही होती है, “इतनी महंगी कारें इतने कम दाम में कैसे?” सोशल मीडिया और छोटे बिज़नेस रील्स ऐसे कार विज्ञापन से भरे पड़े हैं, जहां कम दाम में सेकेंड हैंड लग्ज़री कारों की बिक्री का दावा किया जा रहा है। लेकिन यह कोई जादू नहीं है, बल्कि पीछे छुपा है एक सिस्टम जिसे समझना हर संभावित खरीदार के लिए बेहद जरूरी है।
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सेकेंड हैंड कारों की असली कहानी (Second Hand Car Deals)
हर सेकेंड हैंड कार अपने साथ एक इतिहास लेकर आती है। कई बार यह इतिहास कार की बाहरी सुंदरता में छुपा रहता है। कुछ गाड़ियाँ जंग लगे चैसिस में दब चुकी होती हैं, कुछ दोबारा रंगी हुई बॉडी में सामने आती हैं और कुछ में बड़े हादसों के निशान छुपे होते हैं। पुरानी कारों का बाजार जितना ग्लैमरस दिखता है, उतना पारदर्शी नहीं है। यही वजह है कि खरीदारों को अक्सर यह नहीं पता चलता कि जो कार वे खरीद रहे हैं, वह कभी बड़े एक्सीडेंट का शिकार हुई थी।
कार की IDV वैल्यू और टोटल लॉस का खेल
कार खरीदते समय इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होता है। हर कार की एक इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) होती है, जो कार के मूल्य का प्रतिनिधित्व करती है। यह वैल्यू साल-दर-साल डेप्रिशिएशन के हिसाब से घटती है। अगर कोई लग्ज़री कार जैसे BMW या Mercedes बड़ा एक्सीडेंट कर लेती है, तो मरम्मत का खर्च अक्सर बहुत ज्यादा होता है। उदाहरण के लिए, BMW 3 Series का बड़ा एक्सीडेंट होने पर रिपेयर का अनुमान 25–30 लाख रुपये तक लग सकता है। यदि उस कार की CVD 35–40 लाख रुपये है, तो इंश्योरेंस कंपनी कार को “टोटल लॉस” घोषित कर देती है और मालिक को पूरी IDV राशि दे देती है।
टोटल लॉस के बाद कार का क्या होता है
लोग मानते हैं कि टोटल लॉस कारें सीधे स्क्रैप में चली जाती हैं। हकीकत इससे अलग है। बीमा कंपनियां ऐसी कारों को स्पेशलाइज्ड वेंडर्स को बेच देती हैं। ये वेंडर्स कार की स्थिति का निरीक्षण कर तय करते हैं कि इसे चलने लायक बनाने में कितना खर्च आएगा। आम तौर पर ये कारें IDV का 50–60% कीमत में खरीद ली जाती हैं। उदाहरण के लिए, 30 लाख रुपये की IDV वाली कार 18–20 लाख में वेंडर को मिल सकती है।
वेंडर्स कैसे बनाते हैं कार को फिर से नया
स्पेशलाइज्ड वेंडर्स कार को नए सिरे से तैयार करते हैं। इसके लिए वे इस्तेमाल किए गए पार्ट्स, इम्पोर्टेड पार्ट्स और रिफर्बिश्ड कंपोनेंट्स का उपयोग करते हैं। कई बार अधिकृत वर्कशॉप भी ऐसी कारों को “नॉन-रिपेरेबल” घोषित कर देती है, लेकिन वेंडर्स उसे सड़क पर दौड़ने योग्य बना देते हैं।
रीबिल्ड होने के बाद कार यूज़्ड कार मार्केट में एंट्री करती है। उदाहरण के लिए, 80 लाख रुपये की कार 25–27 लाख रुपये में डीलर को मिल जाती है और फिर ग्राहक को 30 लाख रुपये में ऑफ़र की जाती है। पुराने मॉडल की IDV और कम होने के कारण, उनकी कीमत 5–10 लाख रुपये तक गिर सकती है।
सबसे बड़ा रिस्क: खरीदार को सच नहीं पता
इस खेल में सबसे बड़ा खतरा यह है कि खरीदार को अक्सर नहीं पता चलता कि कार कभी टोटल लॉस थी। दस्तावेज़ बदलने, गैर-अधिकृत चैनलों से ट्रांसफर और मैकेनिक की मदद से कार को ऐसा दिखाया जाता है कि वह बिल्कुल नई लगती है। Primus Partners के अनुराग सिंह कहते हैं, “इस्तेमाल की गई कारों का बाजार खासकर कम कीमत वाले सेगमेंट में अव्यवस्थित है। गंभीर एक्सीडेंट की कारों को अक्सर इंश्योरेंस कंपनियां टोटल लॉस घोषित कर देती हैं।”
स्क्रैप की कार और खतरनाक सौदा
अनुराग सिंह बताते हैं कि कई यूज़्ड कार डीलर टोटल लॉस कारों को कम कीमत पर खरीदते हैं और फिर शॉर्टकट तरीकों से उन्हें ठीक कर देते हैं। बाहर से गाड़ी चमकती दिखती है, लेकिन अंदर से भरोसेमंद नहीं होती। इसका नतीजा यह होता है कि ग्राहक एक ऐसी कार खरीद लेता है जो कभी भी धोखा दे सकती है।
दुर्घटना का सच छुपाने की चालें
कुछ यूज़्ड कार डीलर कार के एक्सीडेंटल इतिहास को छुपा देते हैं ताकि ज्यादा कीमत वसूल सकें। ग्राहक अक्सर डीलर की चिकनी बातों में फंस जाता है। कार का वास्तविक इतिहास जानने के लिए इंश्योरेंस क्लेम रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और ओनरशिप हिस्ट्री की जांच करनी पड़ती है। लेकिन ये जानकारी अक्सर अलग-अलग जगहों पर बिखरी रहती है, और आम व्यक्ति के लिए इसे इकट्ठा करना मुश्किल होता है।
IDV और यूज़्ड कार की कीमत का उलझा चक्र
अनुराग सिंह के अनुसार, IDV कार की कीमत को प्रभावित करती है, और कार की कीमत IDV को। यह एक सर्कुलर लॉजिक है जो ग्राहक के लिए भ्रमित करने वाला होता है।
वास्तविक उदाहरण
आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद के मोहित की होंडा अमेज़ कार का एक्सीडेंट हुआ। डीलरशिप ने रिपेयरिंग का खर्च लाखों में बताया और कार को टोटल लॉस में भेजने की सलाह दी। वेंडर ने कार को 1.5–2 लाख रुपये खर्च करके चलने योग्य बनाने और मार्केट में बेचने की योजना बनाई। ऐसे कई मामले हैं, जो यह दिखाते हैं कि कम दाम में लग्ज़री कार का मतलब हमेशा सस्ता सौदा नहीं होता।
पुराने वाहन खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें
स्पिनी के गुरवीन बेदी बताते हैं कि ऑर्गनाइज़्ड प्लेटफ़ॉर्म से ही पुरानी कार खरीदना सबसे सुरक्षित है।
- कार की क्वालिटी: गाड़ी अच्छी कंडीशन में हो और सर्विस हिस्ट्री देखी जाए।
- वेरिफाइड डॉक्यूमेंटेशन: लोन न हो, RC और इंश्योरेंस वैलिड हो, कोई पेंडिंग केस न हो।
- RC डिटेल्स वेरिफाई: भविष्य में कानूनी दिक्कतों से बचने के लिए।
- वारंटी चेक: बिक्री के बाद सपोर्ट उपलब्ध हो।
- पारदर्शिता: सभी डॉक्यूमेंट्स साफ और ट्रैक योग्य हों।
व्हीकल हिस्ट्री कैसे जांचें
- VAHAN पोर्टल: ओपन लोन और बैंक से क्लोजर सुनिश्चित करें।
- इंश्योरेंस दस्तावेज़: सीधे कंपनी से वेरिफाई करें।
- पुलिस वेबसाइट: FIR, चोरी या कानूनी मामला जांचें।
- RC नंबर मिलान: इंजन और चेसिस नंबर की पुष्टि करें।
दिल्ली में सेकंड हैंड कार खरीदने के बेस्ट जगहें
1. करोल बाग कार बाजार
करोल बाग कार बाजार दिल्ली का एक ऐसा इलाका है जहाँ सेकंड हैंड कारों की खरीद-बिक्री काफी होती है। यहाँ आपको कई डीलरशिप और स्टाल मिल जाएंगे, जो बजट के अनुसार गाड़ियाँ उपलब्ध कराते हैं। यह जगह खासकर उन लोगों के लिए अच्छी है, जो अलग-अलग मॉडल और ब्रांड की गाड़ियाँ एक ही छत के नीचे देखना चाहते हैं। हालांकि, इस बाजार में अनुभवी और चालाक डीलर भी मिल सकते हैं। इसलिए खरीदने से पहले गाड़ी की पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है। कार की सर्विस हिस्ट्री, इंश्योरेंस और RC के दस्तावेज़ सही तरीके से जांचने के बाद ही किसी सौदे पर विचार करना चाहिए।
2. पायनियर कार बाजार (सरोजिनी)
सरोजिनी नगर में स्थित पायनियर कार बाजार अपनी विश्वसनीयता और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यहाँ की खासियत यह है कि सभी कारों की जांच ऑटोमोबाइल इंजीनियरों द्वारा की जाती है। इससे खरीदार को गाड़ी की तकनीकी स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है। इसके अलावा, सभी खरीददारी पूरी तरह से सत्यापित और कानूनी दस्तावेज़ के साथ होती है। यहाँ कारें उचित कीमत पर उपलब्ध होती हैं, लेकिन अच्छे सौदे के लिए आपको मोलभाव करने की कला का इस्तेमाल करना होगा।
3. स्पिनी कार हब (कीर्ति नगर)
कीर्ति नगर में स्थित स्पिननी कार हब उन खरीदारों के लिए एकदम सही है जो एक्सीडेंट-फ्री और अच्छी तरह से मेंटेन की गई कारें ढूंढ रहे हैं। स्पिननी में, कस्टमर एक्सपीरियंस सबसे पहली प्राथमिकता है। यहाँ, आप कार की टेस्ट ड्राइव ले सकते हैं, और उसकी पूरी तरह से जांच और वेरिफिकेशन करवा सकते हैं। स्पिननी अपने कस्टमर्स को मनी-बैक गारंटी और वारंटी भी देता है, जिससे खरीदारों को अपनी खरीदारी पर सुरक्षा और भरोसा मिलता है। इसके अलावा, स्पिननी अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए कारों को दिखाता है और उनकी बुकिंग की सुविधा भी देता है।
4. मारुति सुजुकी ट्रू वैल्यू
मारुति सुजुकी ट्रू वैल्यू उन लोगों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है जो किसी विशेष ब्रांड की गाड़ी खरीदना चाहते हैं। यहाँ बैकग्राउंड चेक और वाहन सर्टिफिकेशन के पूरे प्रोसेस की जिम्मेदारी डीलर लेते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि खरीदार को किसी भी तरह की कानूनी या तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े। ट्रू वैल्यू गाड़ियाँ मुफ्त सर्विस और वारंटी के साथ आती हैं। हालांकि, इसमें आपको सिर्फ मारुति सुजुकी ब्रांड ही मिलेगा और कीमत थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और भरोसे के लिहाज से यह निवेश सार्थक साबित होता है।
5. महिंद्रा फर्स्ट चॉइस
महिंद्रा फर्स्ट चॉइस उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो नई जैसी गाड़ी खरीदना चाहते हैं लेकिन बजट को ध्यान में रखते हैं। यहाँ विभिन्न ब्रांड्स जैसे हुंडई, टाटा, मारुति सुजुकी, हेक्टर आदि की गाड़ियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, महिंद्रा फर्स्ट चॉइस आपको ईएमआई विकल्प भी प्रदान करता है, जिससे बड़ी राशि का भुगतान एक साथ करने की आवश्यकता नहीं होती। गाड़ियाँ अच्छी तरह मेंटेन की जाती हैं और लगभग नई जैसी स्थिति में मिलती हैं।
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