Prayagraj News: प्रयागराज से एक बार फिर धर्म और विवाद की सुर्खियां सामने आई हैं। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण और बाल उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला अब सीधे स्पेशल पॉक्सो कोर्ट तक पहुँच गया है और पूरे धार्मिक समुदाय में चर्चा का विषय बन गया है। आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का दावा है कि शंकराचार्य अपने शिविर और गुरुकुल की आड़ में अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।
शंकराचार्य का पलटवार: विरोधियों पर गंभीर आरोप | Prayagraj News
इन आरोपों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने इसे विरोधियों की गहरी साजिश बताते हुए कहा कि अब आरोपों की सीमा नीचता तक पहुँच चुकी है। शंकराचार्य ने कहा, “हमने जो सवाल उठाए, वे केवल शास्त्र आधारित थे। जब हम उन्हें चुनौती नहीं दे सके, तो अब वे इस तरह के घृणित आरोपों का सहारा ले रहे हैं।”
उन्होंने एक कार्टेल सक्रिय होने का भी दावा किया और कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश सरकार की संलिप्तता भी दिखाई देती है। उनका कहना है कि यह सब ज्योतिष पीठ और उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है क्योंकि वे गौ माता की रक्षा के लिए लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं, जो सरकार को पसंद नहीं आया।
पुरानी अदावत: रामभद्राचार्य बनाम अविमुक्तेश्वरानंद
विवाद की जड़ें पुरानी अदावत में हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने हाल ही में शंकराचार्य को फर्जी शंकराचार्य बताते हुए उन पर हमला बोला था। शंकराचार्य का कहना है कि उन्होंने केवल शास्त्रीय मर्यादा में सवाल उठाए थे, लेकिन विरोधियों ने इसे व्यक्तिगत लड़ाई में बदल दिया।
तनाव की शुरुआत 18 जनवरी को माघ मेले के मौनी अमावस्या स्नान के दौरान हुई। उस दिन शंकराचार्य को स्नान से रोका गया और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें शंकराचार्य कहलाने और मेला क्षेत्र खाली करने का नोटिस भी दिया।
कोर्ट में स्थिति और आगे की सुनवाई
आरोपों की शिकायत 8 फरवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया कि दो नाबालिग पीड़ितों को पेश किया गया है।
10 फरवरी को शंकराचार्य के वकील ने कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया और सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। वकीलों ने पॉक्सो एक्ट की धारा 22 का हवाला देते हुए कहा कि यह आरोप दुर्भावना पर आधारित और गलत हैं।
कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। इस दिन दोनों पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे। इसके बाद कोर्ट तय करेगा कि एफआईआर दर्ज की जाए या केस को निरस्त किया जाए।
शंकराचार्य का बयान
शंकराचार्य ने साफ कहा है कि “सांच को आंच नहीं” और वे इस धर्मिक और न्यायिक लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य धर्म और शास्त्र की रक्षा करना है और किसी दबाव में नहीं झुकेंगे।





























