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Pilibhit Religious Conversion: मिशनरियों के जाल से निकले 25 सिख परिवार, घर वापसी के साथ उजागर हुआ धर्मांतरण का गंदा खेल   

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 12 Dec 2025, 12:00 AM | Updated: 24 Dec 2025, 11:21 AM

Pilibhit Religious Conversion: नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के टाटरगंज और आसपास के गांवों में ईसाई मिशनरियों के प्रलोभन में फंसकर धर्मांतरण करने वाले 25 सिख परिवारों ने सोमवार को अपने मूल धर्म में लौटकर घर वापसी की। ये परिवार नेपाल के सीमावर्ती गुरुद्वारा सिंह सभा, टाटरगंज पहुंचे, जहां ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल ने उनका स्वागत किया। सभी परिवारों ने घर वापसी का शपथपत्र भी भरा, जिसे जिला प्रशासन को भेजा गया।

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धर्मांतरण का मामला (Pilibhit Religious Conversion)

जानकारी के अनुसार पिछले 10 वर्षों से नेपाल सीमा के गांवों में ईसाई मिशनरियाँ आर्थिक रूप से कमजोर सिखों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण करवा रही थीं। आरोप है कि इनके जरिए दो हजार से अधिक सिखों का अवैध रूप से धर्मांतरण किया गया। पिछले साल एक महिला के विरोध के बाद यह मामला गर्माया, जिसके बाद पादरियों और मिशनरी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए।

सिख संगठनों का अभियान

सिख संगठनों के सक्रिय प्रयासों के कारण अब तक 400 लोग घर वापसी कर चुके हैं। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार की सख्ती से अवैध मतांतरण कराने वालों पर कार्रवाई हो रही है। जून में भी पीलीभीत जिले के 61 सिख परिवार अपने मूल धर्म में लौट चुके हैं।

समाज में संदेश और चेतावनी

राघवपुरी गुरुद्वारे में आयोजित समागम में स्पष्ट किया गया कि जो सिख परिवार ईसाई धर्म अपना चुके हैं, उन्हें न तो गुरुद्वारा में प्रवेश मिलेगा और न ही उनके अंतिम संस्कार सिख रीति से किए जाएंगे। साथ ही जो लोग “सिंह” या “कौर” उपनाम का प्रयोग करेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

एफआईआर और प्रकरण की पृष्ठभूमि

पीलीभीत जिले के राघवपुरी, टाटरगंज, कंबोजनगर और टिल्ला नंबर चार के गांवों में कई सिख परिवारों का कथित तौर पर ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर धर्मांतरण कराया गया। जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें पादरियों और मिशनरी कार्यकर्ताओं पर प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का आरोप था।

देशभर से सिख प्रतिनिधियों की मौजूदगी

समागम में नांदेड़ (महाराष्ट्र), आगरा, नानकमत्ता (उत्तराखंड) और शिरोमणि गुरुद्वारा जत्थेबंदियों के पदाधिकारी शामिल हुए। नेपाल सीमा के आठ गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों ने भी सामाजिक बहिष्कार के निर्णय का समर्थन किया। यह निर्णय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी गुरुद्वारों तक लागू किया जाएगा।

गांव वालों से अपील

सिख नेताओं ने ग्रामीणों से चेताया कि विदेशी फंडिंग पर चलने वाली ईसाई मिशनरियाँ झूठे वादों के जरिए धर्मांतरण करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब समय है कि समाज संगठित होकर ऐसी गतिविधियों का विरोध करे और अपने धर्म की रक्षा करे।

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