Patna Girls Hostel Scandal: पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े कथित शोषण मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जिन्हें सुनकर किसी का भी सिर शर्म से झुक जाए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक हॉस्टल तक सीमित नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।
नाबालिग छात्राओं के लिए तय होती थी ‘रेट’ (Patna Girls Hostel Scandal)
जांच में सामने आया है कि कुछ एजेंट खुलेआम नाबालिग छात्राओं के लिए रेट तय करते थे। गवाहों के बयान के अनुसार, एक 17 साल की छात्रा के लिए करीब 25 हजार रुपये मांगे गए थे। बातचीत का तरीका पूरी तरह व्यावसायिक था। यहां तक कहा गया कि “पहले लड़की भेज दी जाएगी, पैसे बाद में दे देना।” इस तरह की भाषा और सौदेबाजी ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
उम्र और शारीरिक बनावट के हिसाब से वर्गीकरण
सूत्रों का दावा है कि एजेंट छात्राओं को उनकी उम्र और शारीरिक बनावट के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटते थे। कम उम्र की छात्राओं के लिए ज्यादा रकम तय की जाती थी। गवाहों ने जांच एजेंसियों को बताया कि जिस भाषा का इस्तेमाल किया जाता था, उसमें छात्राओं को इंसान नहीं, बल्कि किसी सामान की तरह पेश किया जाता था। जांच एजेंसियां इन बयानों को बेहद अहम सबूत मान रही हैं।
हॉस्टल से जुड़े सप्लायर बने कड़ी
जांच में यह भी बात सामने आई है कि हॉस्टल से जुड़े कुछ सप्लायर इस पूरे नेटवर्क में बिचौलिये की भूमिका निभा रहे थे। ये लोग आधिकारिक काम के बहाने हॉस्टल के अंदर आते-जाते थे और इसी दौरान छात्राओं से संपर्क बनाते थे। उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि छात्रा को दिन में भेजा जाएगा और तय समय पर वापस हॉस्टल छोड़ दिया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो। भुगतान की व्यवस्था भी काफी सोच-समझकर की जाती थी और कथित तौर पर पैसे छात्रा के गंतव्य पर पहुंचने के बाद लिए जाते थे।
वार्डनों की भूमिका भी शक के घेरे में
इस मामले में हॉस्टल वार्डनों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शुरुआती जांच में कुछ वार्डनों पर मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं। कहा जा रहा है कि उनकी लापरवाही या जानबूझकर की गई अनदेखी के कारण यह नेटवर्क लंबे समय तक बिना किसी डर के चलता रहा। कई हॉस्टलों में CCTV कैमरे या तो लगे ही नहीं थे या खराब हालत में थे। विज़िटर रजिस्टर का सही तरीके से रखरखाव नहीं होना और महिला सुरक्षा से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव भी सामने आया है।
डिजिटल सबूत खंगाल रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में डिजिटल चैट्स, ऑडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।





























