प्रशांत किशोर का जनसुराज बिहार में नया राजनीतिक विकल्प या कुछ और… ?
ऐसा कहा जाता है कि बिहार की राजनीति में जातिवाद का बोलबाला है. बिहार में अभी तक के राजनीतिक समीकरण जाति को ध्यान में रखकर ही साधे गए हैं. आज भी जमीनी स्तर पर ‘वोट और जाति’ ही सर्वोच्च दिखाई देते हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि इसमें परिवर्तन देखने को नहीं मिल...
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