Oil Market Shock: मध्यपूर्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी ने ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया है। इस हालात के मद्देनजर G7 देशों के फाइनेंस मिनिस्टर एक इमरजेंसी मीटिंग करने जा रहे हैं, जिसमें स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व (SOR) के संयुक्त रिलीज पर चर्चा की जाएगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य बढ़ती कीमतों और सप्लाई में संभावित झटकों को नियंत्रित करना है।
G7 की तैयारी और IEA की भूमिका (Oil Market Shock)
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, G7 मिनिस्टर्स इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Fatih Birol से संपर्क करेंगे। इसका मकसद है कि युद्ध के प्रभाव और ग्लोबल ऊर्जा मार्केट पर इसके असर का सही अंदाजा लगाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, IEA के इमरजेंसी सिस्टम के तहत सदस्य देशों के पास मौजूद पेट्रोलियम रिजर्व को सह-निर्धारित (coordinated) रिलीज करने पर विचार किया जा रहा है।
कीमतों में तेजी और राहत की उम्मीद
ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल ही में घटकर $110 प्रति बैरल पर आ गई हैं, जबकि WTI क्रूड की कीमतें लगभग $107 प्रति बैरल रही, जो सुबह के $116.71 और $116.45 की तुलना में काफी नीचे है। G7 के कम से कम तीन देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि लगभग 300 से 400 मिलियन बैरल का कोऑर्डिनेटेड रिलीज सही होगा। यह IEA सदस्य देशों के पास मौजूद लगभग 1.2 बिलियन बैरल के स्ट्रेटेजिक रिजर्व का 25-30% हिस्सा होगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
1974 में अरब ऑयल बैन के बाद IEA के सदस्य देशों ने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाया था। इस इमरजेंसी सिस्टम का मकसद है कि तेल की आपूर्ति में अचानक आने वाली बाधाओं से निपटा जा सके। गल्फ रीजन में संघर्ष बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे महंगाई के नए झटके और वैश्विक आर्थिक विकास पर चिंता बढ़ गई।
ब्रेंट क्रूड ने एशियाई ट्रेडिंग में 24% बढ़ोतरी के साथ $116.71 प्रति बैरल दर्ज की, जबकि WTI क्रूड 28% बढ़कर $116.45 प्रति बैरल पहुंच गया। IEA सदस्य देशों के पास कुल 1.24 बिलियन बैरल से ज्यादा सार्वजनिक इमरजेंसी रिजर्व है। इसके अलावा, उद्योग के पास लगभग 600 मिलियन बैरल इन्वेंट्री है, जिसे सप्लाई में रुकावट आने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा मार्केट पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि G7 देशों द्वारा स्ट्रेटेजिक रिजर्व को रिलीज किया गया, तो यह तेजी से बढ़ी कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा। इसके अलावा, तेल सप्लाई में अचानक आने वाले झटकों को कम करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
संकटग्रस्त परिस्थितियों में यह कदम न केवल ग्लोबल क्रूड मार्केट को स्थिर करेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था और उद्योगों के लिए भी राहत देने वाला साबित हो सकता है। G7 मिनिस्टर्स की यह बैठक वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए ली जाने वाली अहम रणनीति साबित होगी।
