Mumbai BMC Mayor News: मुंबई की सियासत में गुरुवार का दिन काफी अहम रहा। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के बाद मेयर किस वर्ग से होगा, इसे लेकर चल रही लंबी कशमकश अब खत्म हो गई है। लॉटरी के जरिए यह तय कर लिया गया है कि इस बार मुंबई की मेयर महिला होंगी। यही नहीं, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक नगर निगम में भी लॉटरी के बाद मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यानी महाराष्ट्र के सबसे बड़े और ताकतवर शहरों की कमान अब महिलाओं के हाथ में जाने वाली है।
लॉटरी से तय होता है मेयर का आरक्षण (Mumbai BMC Mayor News)
दरअसल, नगर निगम चुनाव के बाद मेयर पद का आरक्षण चक्रानुक्रम पद्धति से तय किया जाता है। कभी यह एससी-एसटी वर्ग को जाता है, तो कभी ओबीसी या महिला वर्ग को। इस बार मुंबई मेयर पद को लेकर इसलिए ज्यादा चर्चा थी, क्योंकि बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर 118 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इनमें से कोई भी पार्षद एससी वर्ग से नहीं था। ऐसे में सवाल उठ रहा था कि अगर मेयर पद एससी के लिए आरक्षित हुआ, तो स्थिति क्या होगी। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट से एससी वर्ग का एक पार्षद जरूर जीता था।
महिला आरक्षण ने बदला पूरा गेम
लॉटरी का फैसला आते ही यह साफ हो गया कि मुंबई मेयर पद सामान्य श्रेणी (महिला) के लिए आरक्षित रहेगा। इसका मतलब यह है कि अब जातिगत बंधन हट गया है और सभी पार्टियां अपनी सबसे मजबूत महिला पार्षद को मैदान में उतार सकती हैं। यही वजह है कि इस फैसले को सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।
पुणे, नागपुर और नाशिक में भी महिला मेयर
मुंबई के साथ-साथ पुणे, नागपुर और नाशिक नगर निगमों में भी मेयर पद महिलाओं के खाते में गया है। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मुंबई BMC समेत इन बड़े शहरों में महिला नेतृत्व तय होना महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट ने आरोप लगाया है कि आरक्षण और रोटेशन की प्रक्रिया को सत्ता के फायदे के हिसाब से मोड़ा गया है, ताकि कुछ खास चेहरों का रास्ता साफ किया जा सके।
BMC: तीन दशकों से शिवसेना का गढ़
BMC को पिछले करीब 30 सालों से शिवसेना का मजबूत किला माना जाता रहा है। अब जब मेयर पद ‘ओपन कैटेगरी (महिला)’ में चला गया है, तो बीजेपी और शिंदे गुट की नजर ऐसी महिला नेता पर होगी, जिसकी मुंबई में मजबूत पकड़ हो। इस फैसले के बाद लड़ाई अब जातिगत समीकरण से हटकर पूरी तरह फेस वैल्यू और राजनीतिक रणनीति पर आ गई है।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
लॉटरी के बाद अब अगला कदम मेयर चुनाव की प्रक्रिया है। तय तारीख पर उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे। मेयर का चुनाव जनता सीधे नहीं करती, बल्कि चुने गए पार्षद वोटिंग के जरिए मेयर चुनते हैं। इसके लिए निगम की विशेष बैठक बुलाई जाती है, जिसमें पीठासीन अधिकारी की मौजूदगी में मतदान होता है। चुनाव से पहले पार्टियां अपने पार्षदों को व्हिप जारी करती हैं। अगर कोई पार्षद पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी सदस्यता भी जा सकती है।
अब किसके हाथ में होगी सत्ता?
सामान्य श्रेणी (महिला) होने की वजह से अब पार्टियों पर किसी खास वर्ग की महिला उम्मीदवार खोजने का दबाव नहीं है। अब सीधा दांव उस महिला पार्षद पर लगेगा, जो चुनाव में ‘ट्रंप कार्ड’ साबित हो सके। आखिरकार, जिस गठबंधन के पास सदन में बहुमत होगा, वही तय करेगा कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा।





























