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Mini Punjab in Chennai: समुद्र किनारे पंजाब की खुशबू, जानिए चेन्नई के सिखों ने कैसे जिंदा रखी है अपनी संस्कृति

Shikha Mishra | Nedrick News

Published: 06 Jan 2026, 08:44 AM | Updated: 06 Jan 2026, 08:44 AM

Mini Punjab in Chennai: पिछले कुछ सालों में ऐसी आंधी सी चल रही है कि दक्षिण भारत में उत्तर भारत के लोगो को उनकी भाषा के आधार पर जज किया जादता है, उनके साथ अभदज्र व्यावहार किया जाता है, हालांकि दक्षिणी हिस्सा भी भारत का ही हिस्सा है, और उत्तर भारतीय कल्चर से भला कहां से अछूता रहता.. वहीं अगर सामने वाला सिख हो तो मजाल है कि कोई उनके धर्म पर टिप्पणी करें या उनके खिलाफ कोई कदम उठाये…. उनकी मजबूत स्थिति उनके होने से ही पता चल जाती है।

अपने धर्म को बनाये रखने और अपनी संस्कृति के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा चैन्नई के सिखों में भी साफ नजर आता है, भले ही संख्या कम हो, लेकिन अपनी धरोहरों, अपनी संस्कति और परंपराओं से कोई समझौता न करने वाले सिखों ने चैन्नई में एक मिनी पंजाब बसाया हुआ है, अपने इस वीडियो में हम चैन्नई में मौजूद मिनी पंजाब के बारे में जानेंगे..जो यहां रहने वाले सिखों को बेहद अलग बनाता है।

जानें चैन्नई के बारे में

चैन्नई, जो कि भारत के ही एक राज्य तमिलनाडु की राजधानी है, 1996 तक चैन्नई का नाम मद्रास कहलाता था, भारत के 4 महानगरों में से एक चैन्नई भी शामिल है। दुनिया की जनसंख्या के अनुसार 36 वां सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चैन्नई को “India’s Health Capital” के नाम से भी जाना जाता है। चैन्नई का कुल क्षेत्रफल 6330 वर्ग किलोमीटर है, जिसमे से 426 वर्ग किलोमीटर महानगरीय क्षेत्र है। 5904 वर्ग किलोमीटर मेट्रो क्षेत्र है। वहीं बात करें इसकी जनसंख्या की, तो 2025 के अनुसार 12,336,000 के आसपास है। चैन्नई भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे ज्यादा पर्यटकों के लिए आने वाले नगरों में शामिल है।

चैन्नई में सिख धर्म

चैन्नई में सिखों का इतिहास बहुत पुराना है, और 1937 में स्थापित हुए पंजाब एसोसिएशन से जुड़ा हुआ है। चैन्नई में एक क्षेत्र है जिसे टी नगर यानि कि त्यागराया नगर के नाम से जाना जाता है, यहां मौजूद है श्री गुरु नानक सत संघ सभा गुरुद्वारा… ये गुरुद्वारा असल में चैन्नई में बसे सिखों के लिए तब बनाया गया जब सिखों ने चैन्नई को अपना प्रवास स्थान चुना। चुंकि सिख बाहुबल के कारण काफी मजबूत होते थे तो ब्रिटिश काल में काम के लिए सिखों को देश के अलग अलग कोनो में भेजा गया था, ऐसे में एक समुदाय चेन्नई भी पहुंचा।

टी नगर में मौजूद श्री गुरु नानक सत संघ सभा गुरुद्वारा बनाने के बाद सिखों के इस क्षेत्र को अपना रहने की जगह बनाई और धीरे धीरे यहां सिखों की बस्ती बसती गई। मौजूदा समय में इस इलाके में सिखो की संख्या सीमित है। लेकिन फिर भी यहां रहने वाले सिख अपने पर्व त्योंहारों को बड़े जोरो शोरो से मनाते है। यहां रहने वाले सिख गुरुद्वारे में न केवल समुदायिक कार्यक्रम करते है,बल्कि सभी धर्मों के लिए लंगर की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2020 में कोविड 19 महामारी के दौरान गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत संघ सभा हर दिन 400 प्रवासी मजदूरों को लंगर का खाना खिलाया था, जो सिखों की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण परंपरा रही है।

गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत संघ सभा

टी नगर के जी. एन. चेट्टी रोड पर मौजूद इस गुरुद्वारे को बनाने की नीव लेफ्टिनेंट-कर्नल गुरदयाल सिंह गिल 1952 में रखी थी। गिल ही वो शख्स थे जिन्होंने चैन्नई में सिखों के भले के लिए 1949 में श्री गुरु नानक सत संघ सभा की स्थापना की थी, जिसके तहत ही गुरुद्वारे का निर्माण शुरु हुआ। इस गुरुद्वारे में सिखो के कई प्रमुख त्यौहार जिसमें गुरु नानक, गुरु गोबिंद सिंह और गुरु अर्जुन देव की जयंती को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही बैशाखी के दिन नगर कीर्तन होते है। सामुदायिक रसोई में रोजाना लंगर किये जाते है, प्रार्थना साभायें होती है, और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का बाणी पढी जाती है, सुबह शाम पूजा और कीर्तन होते है।

इतना ही नहीं यहां रहने वाले सिखों ने गरीबों औऱ कमजोर लोगो के लिए गुरुद्वारे के तहत ही एक मुफ्त  स्वास्थ्य केंद्र भी चलाया हुआ है, जहां लोगो का मुफ्त इलाज होता है, इसका सारा खर्चा यहां रहने वाले सिख उठाते है। हालांकि चैन्नई में सिखो की संख्या सीमित है लेकिन बावजूद इसके सिखों ने अपनी एकजुटता और परोपकार की भावना को बखूबी प्रदर्शित किया है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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