बेटी के तलाक पर Retired Judge ने मनाया जश्न, ढोल-नगाड़ों पर थिरका पूरा परिवार, वजह जान आप भी रह जाएंगे दंग !

Rajni | Nedrick News Meerut Published: 06 Apr 2026, 09:58 AM | Updated: 06 Apr 2026, 09:58 AM

Meerut Retired Judge Daughter Divorce: बचपन से ही बेटियों को यह एहसास कराया जाता है कि वे ‘पराया धन’ हैं और विदाई के बाद पति का घर ही उनका संसार है। साथ ही ससुराल के सुख-दुख ही अब उसके हैं ‘थोड़ा एडजस्ट तो करना ही पड़ता है’ यह कहकर अक्सर उनके दुखों को दबा दिया जाता है।

जहां एक तरफ अब भी हिंदुस्तान में बेटियाँ अगर परेशान होकर अपने पति को छोड़ना भी चाहे तो सबसे पहले उसके अपने माता-पिता ही उसका विरोध करने के लिए उसके सामने खड़े होते ऐसे में एक लड़की क्या करें। वहीं मेरठ के रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने इन दकियानूसी परंपराओं को ठेंगा दिखाकर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी बेटी के तलाक पर मातम नहीं, बल्कि ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत कर समाज को बताया कि बेटी का आत्मसम्मान किसी भी लोक-लाज से ऊपर है।

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क्या है पूरा मामला

डॉ. शर्मा की बेटी प्रणिता शर्मा (वशिष्ठ) की शादी 19 दिसंबर 2018 को शाहजहाँपुर के एक सेना अधिकारी (मेजर) से हुई थी। परिजनों का आरोप है कि प्रणिता पिछले 7-8 वर्षों से ससुराल में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, 4 अप्रैल 2026 को मेरठ की फैमिली कोर्ट ने प्रणिता के तलाक को अंतिम मंजूरी दे दी। जैसे ही कोर्ट का फैसला आया, डॉ. शर्मा अपनी बेटी को ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ कचहरी से घर लेकर आए।

इस दौरान परिवार के सदस्यों ने विशेष टी-शर्ट पहनी थी जिस पर “I Love My Daughter” लिखा था। पिता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ससुराल पक्ष से किसी भी तरह का भरण-पोषण (Alimony) या सामान वापस नहीं लिया। उनका कहना था कि उन्हें केवल अपनी बेटी की खुशी और गरिमा चाहिए थी। प्रणिता, जो कि एक साइकोलॉजी पोस्ट-ग्रेजुएट और फाइनेंस डायरेक्टर हैं, ने अन्य महिलाओं को संदेश दिया कि यदि वे प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें और अपने लिए खड़ी हों।

ढोल-नगाड़े के साथ किया स्वागत

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक जैसे ही कोर्ट से तलाक की मंजूरी मिली, डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा अपनी बेटी प्रणिता को किसी विजेता की तरह ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ कचहरी से लेकर निकले। रास्ते भर परिवार के सदस्य नाचते रहे और सबकी टी-शर्ट पर ‘I Love My Daughter’ का संदेश चमक रहा था। घर पहुँचने पर प्रणिता की आरती उतारी गई और पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बांटी गईं। डॉ. शर्मा का कहना था कि वे अपनी बेटी को यह महसूस कराना चाहते थे कि वह अकेली नहीं है और उसके सम्मान के लिए उनका पूरा परिवार किसी भी हद तक जा सकता है।

प्रतिष्ठीत परिवार फिर भी ये व्यवहार

रिपोर्ट्स के अनुसार शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से कीमती सामान और पैसों की मांग की जाने लगी थी। मांग पूरी न होने पर प्रणिता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। प्रणिता के पति जो सेना में मेजर हैं, उन पर भी आरोप है कि उन्होंने प्रणिता का साथ देने के बजाय परिवार के दबाव और गलत व्यवहार में उनका साथ दिया।

इसके अलावा प्रणिता के करियर और स्वतंत्रता पर भी रोक लगाई गई। वे एक पढ़ी-लिखी महिला हैं (साइकोलॉजी में पीजी और फाइनेंस डायरेक्टर) लेकिन ससुराल में उनकी शिक्षा और करियर के प्रति सम्मान की कमी थी, जो विवाद का एक बड़ा कारण बना। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख है कि शादी के वक्त परिवार से कई बातें छिपाई गई थीं, जिसके कारण शादी के बाद से ही तालमेल बैठना मुश्किल हो गया था।  डॉ. शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी पिछले 7-8 सालों से इस नरक को झेल रही थी, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब उन्होंने अपनी बेटी को उस जहरीले माहौल से निकालने का फैसला किया।

बदलाव की लहर

समाज में बदलाव की यह लहर केवल मेरठ तक सीमित नहीं है अक्टूबर 2023 में रांची के प्रेम गुप्ता भी अपनी बेटी साक्षी को ससुराल की प्रताड़ना से बचाकर बैंड-बाजे और आतिशबाजी के साथ वापस घर लाए थे, जिसका वीडियो देशभर में वायरल हुआ था। इसी तरह कानपुर के अनिल कुमार और ओडिशा के रायगड़ा में भी पिताओं ने बेटी के तलाक को ‘कलंक’ के बजाय ‘आज़ादी’ मानकर जश्न मनाया और मिठाइयाँ बांटीं।

इन वास्तविक घटनाओं ने ‘पराया धन’ और ‘एडजस्टमेंट’ जैसी रूढ़ियों को ठेंगा दिखाते हुए यह साबित कर दिया है कि बेटी का आत्मसम्मान किसी भी लोक-लाज से बड़ा है, और इसी सोच को हाल ही में ‘बैंड बाजा बिटिया’ जैसे विज्ञापनों के जरिए भी सराहा गया है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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