Maharashtra Municipal Corporation Elections: महाराष्ट्र में महानगर पालिका चुनावों की सरगर्मी अभी चरम पर भी नहीं पहुंची है, लेकिन नतीजों से पहले ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। वजह है कई सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना। जैसे ही यह सामने आया कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन के दर्जनों उम्मीदवार बिना मुकाबले ही जीत की दहलीज पर पहुंच गए हैं, वैसे ही सवाल उठने लगे। अब इस पूरे मामले में राज्य चुनाव आयोग ने दखल दिया है और कुछ सीटों पर जांच के आदेश दे दिए हैं।
मतदान से पहले ही जीत, सवालों के घेरे में निर्विरोध उम्मीदवार (Maharashtra Municipal Corporation Elections)
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और कुल 2,869 सीटों पर मुकाबला है। हालांकि नामांकन वापसी की आखिरी तारीख बीतते ही तस्वीर कुछ अलग ही नजर आने लगी। जानकारी के मुताबिक, महायुति गठबंधन के 68 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा। मालेगांव से इस्लाम पार्टी के एक उम्मीदवार को भी निर्विरोध चुने जाने की संभावना है, जिससे यह आंकड़ा 69 तक पहुंच सकता है। इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध चुनाव होने से विपक्षी दलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीजेपी सबसे आगे, कल्याण-डोंबिवली बना मजबूत गढ़
निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी इस दौड़ में सबसे आगे है। महायुति के 68 उम्मीदवारों में से 43 बीजेपी के हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 19 और अजित पवार गुट की एनसीपी के 2 उम्मीदवार शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) की हो रही है। यहां बीजेपी के 14 नगरसेवक निर्विरोध चुने गए हैं। यह इलाका महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण का गृह क्षेत्र भी माना जाता है, जिससे सियासी मायने और गहरे हो गए हैं।
विपक्ष का आरोप: दबाव और प्रलोभन का खेल
इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का मैदान से हटना विपक्ष को रास नहीं आया। कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दलों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल का कहना है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में होने चाहिए थे, लेकिन कई जगहों से डराने-धमकाने और लालच देने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती, जांच के आदेश
विवाद बढ़ता देख राज्य चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने तक इन निर्विरोध सीटों पर नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं की जाएगी। रिटर्निंग अधिकारियों, नगर आयुक्तों और पुलिस आयुक्तों से रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग यह पता लगाएगा कि नामांकन वापसी स्वेच्छा से हुई या इसके पीछे कोई दबाव या सौदेबाजी थी।
बीजेपी का पलटवार: हार के डर से पीछे हटे उम्मीदवार
बीजेपी ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता केशव उपाध्याय का कहना है कि विपक्षी उम्मीदवारों को पहले से ही अपनी हार का अंदाजा हो गया था, इसलिए उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। उनके मुताबिक, यह महायुति सरकार की लोकप्रियता का सबूत है, न कि कोई साजिश। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में चुनावी प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि जबरदस्ती या गलत तरीकों की गुंजाइश ही नहीं बचती।
15 जनवरी को मतदान, 16 को नतीजे
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत सभी 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है, जबकि 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। हालांकि जांच के चलते कुछ सीटों के परिणाम फिलहाल रोके जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के महानगर पालिका चुनाव इस बार सिर्फ मतदान और नतीजों तक सीमित नहीं रहने वाले। निर्विरोध जीत, विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग की जांच ने इस चुनाव को पहले ही हाई-वोल्टेज सियासी मुकाबला बना दिया है।
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