न सहन करें प्रताड़ना और न ही अत्याचार, यहां जानें क्या हैं आपके मानवाधिकार

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 10 Dec 2020, 12:00 AM | Updated: 10 Dec 2020, 12:00 AM

इस धरती पर हर इंसान के कुछ अधिकार हैं, कुछ हक़ है। जिनके बारे में देश दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी को अभी तक कोई जानकारी नहीं है। आये दिन कोई न कोई मानवाधिकार उल्लंघन की खबर लोगों का सीना चीर देती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में लोग इसके खिलाफ अपनी आवाज़ दबा लेते हैं। इन्हीं अधिकारों के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल पूरी दुनिया 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाती है। बता दें कि ये दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मानवाधिकार हनन को रोकना है। इस दिवस पर दूसरे के अधिकारों के लिए कदम उठाना विशेष उद्देश्य के रूप में शामिल किया गया है।

क्या है मानवाधिकार?

हर इंसान को जिंदगी जीने, आजादी, समानता से रहने के अधिकार को ही मानव अधिकार कहा जाता है। इसके बारे में आमतौर पर कम ही लोग वाकिफ होते हैं। इसके बारे में विस्तार से समझाने के लिए ही इस तरह के दिन का आयोजन किया जाता है। ताकि लोगों को खुद के अधिकारों के बारे में पता चल सके। भारतीय संविधान में इसका उल्लंघन करने वाले को कड़ी सजा देने का प्रावधान भी है।

भारत में इस दिन हुआ था लागू 

मानव अधिकार मनाने की घोषणा यूएन असेंबली ने 10 दिसंबर, 1948 विश्व घोषणापत्र जारी कर की थी। जिसके बाद भारत सरकार ने 18 सितंबर 1993 को लागू किया और 12 अक्टूबर 1993 को सरकार ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया। आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं। बता दें कि पहली बार 48 देशों ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के साथ इस दिन को मनाया था।

यह होते हैं मानवाधिकार

जीवन जीने का अधिकार

प्रत्येक व्यक्ति के पास अपना स्वतंत्र जीवन जीने का जन्मसिद्ध अधिकार है।

न्याय का अधिकार

प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष अदालत से निष्पक्ष सुनवाई,उचित समय के भीतर सुनवाई,जन-सुनवाई और वकील की सेवा लेने के अधिकार है।

विचार,विवेक और धर्म की स्वतंत्रता

प्रत्येक व्यक्ति को विवार और विवेक की मौलिक स्वतंत्रता है और उसे अपने धर्म को चुनने की पूरी आजादी है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी समय अपने धर्म को बदलना चाहे तो इसके लिए भी वह पूरी तरह से स्वतंत्र है।

दासता से आजादी

दुनिया के अधिकांश देशों में अब गुलामी और दास प्रथा पर कानूनी रोक लग चुकी है लेकिन फिर भी यह प्रथा आज भी कुछ हिस्सों मं अवैध रुप से जारी है।

अत्याचार से आजादी

अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत अत्याचार करने पर प्रतिबंध है।

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