क्या कहती है धारा 29, जानिए कानून में दस्तावेज़ की परिभाषा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 11 Apr 2024, 12:00 AM | Updated: 11 Apr 2024, 12:00 AM

भारतीय दंड संहिता (IPC) के भाग अपराध, सजा और कानून को संबोधित करते हैं। इसके अलावा आईपीसी की कई धाराएं भी कुछ शब्दों को परिभाषित करती हैं। इससे पहले हमने आपको भारतीय दंड संहिता की धारा 14 में “सरकार के सेवक” की परिभाषा के बारे में बताया था, जबकि आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि IPC की धारा 29 ‘दस्तावेज़’ शब्द को किस प्रकार से परिभाषित करती है। आइए जानते हैं आईपीसी की धारा 29 क्या कहती है।

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IPC की धारा 29 का विवरण

भारतीय दंड संहिता की धारा 29 के अनुसार दस्तावेज शब्द किसी भी विषय का द्योतक है जिसे किसी सामग्री पर अक्षरों, अंकों या चिह्न के साधन द्वारा, या उनसे एक से अधिक साधनों द्वारा अभिव्यक्त या वर्णित किया गया हो जो उस विषय के साक्षी के रूप में उपयोग किए जाने को आशयित हो या उपयोग किया जा सके ।

स्पष्टीकरण – यह महत्वहीन है कि अक्षर, अंक या चिह्न किस माध्यम से या किस सामग्री पर बनाए गए हैं, या क्या साक्ष्य किसी न्यायालय के लिए अभिप्रेत है, या उसका उपयोग किया जा सकता है या नहीं।

सरल भाषा में धारा 29 की परिभाषा

सरल भाषा में कहें तो दस्तावेज़ एक ऐसी वस्तु है जिसमें किसी इंसान या इंसान द्वारा बनाए गए चिन्ह, शब्द या प्रतीकों को कागज, कंप्यूटर फ़ाइल या किसी अन्य माध्यम पर लिखा जाता है। शब्द, विचार, चित्र या अन्य सार्थक जानकारी दर्ज की गई हो सकती है। कानूनी व्यवस्था में दस्तावेज़ों का उपयोग विशेष रूप से किसी समझौते, संपत्ति के अधिकार, घोषणा या अन्य महत्वपूर्ण बात का सबूत देने के लिए किया जाता है।

क्या है भारतीय दंड संहिता

भारतीय दंड संहिता भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किए गए विशिष्ट अपराधों को निर्दिष्ट और दंडित करती है। आपको बता दें कि यह बात भारतीय सेना पर लागू नहीं होती है। पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय दंड संहिता लागू नहीं होती थी। हालांकि, धारा 370 ख़त्म होने के बाद आईपीसी वहाँ भी लागू हो गया। पहले वहां रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) लागू होती थी।

वहीं, भारतीय दंड संहिता ब्रिटिश काल में लागू की गई थी। आईपीसी की स्थापना 1860 में ब्रिटिश भारत के पहले विधि आयोग के प्रस्ताव पर की गई थी। इसके बाद 1 जनवरी, 1862 को इसे भारतीय दंड संहिता के रूप में अपनाया गया। वर्तमान दंड संहिता, जिसे भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जाना जाता है, से हम सभी परिचित हैं। इसका खाका लॉर्ड मैकाले ने तैयार किया था। समय के साथ इसमें कई बदलाव हुए हैं।

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