Jaipur Chomu Bulldozer Action: जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में शुक्रवार सुबह प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस टीम पर हिंसक भीड़ ने पथराव किया था। ऐसे में इस बार प्रशासन पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरा। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, अधिकारी और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सड़क पर अवैध ढांचे बने थे परेशानी की वजह (Jaipur Chomu Bulldozer Action)
प्रशासन का कहना है कि चौमूं के कलंदरी मस्जिद के पास बस स्टैंड इलाके में सड़क पर लंबे समय से बड़े पत्थर, लोहे की रेलिंग और अन्य ढांचे लगे हुए थे, जो सीधे तौर पर अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं। इन वजहों से वहां आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यही कारण है कि इन अवैध निर्माणों को हटाना जरूरी हो गया।
25 दिसंबर को बनी थी सहमति, अगले दिन बिगड़े हालात
जानकारी के मुताबिक, 25 दिसंबर की रात मस्जिद समिति और नगर निगम के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें सड़क पर रखे पत्थरों और रेलिंग को हटाने पर सहमति बनी थी। लेकिन 26 दिसंबर की सुबह जब पुलिस और प्रशासन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे, तो स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बढ़ती चली गई और हालात तनावपूर्ण हो गए।
पुलिस पर पथराव, आंसू गैस का इस्तेमाल
विरोध के दौरान भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति काबू से बाहर होती देख पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से निलंबित करनी पड़ीं, जिन्हें बाद में बहाल किया गया।
110 से ज्यादा हिरासत में, दो दर्जन नामजद
घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए इलाके में फ्लैग मार्च कराया और भारी पुलिस बल तैनात किया। पथराव के मामले में पुलिस ने 110 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया, जबकि करीब दो दर्जन लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। इसके अलावा, पुलिस पर हमला करने वाले 24 आरोपियों के घरों पर भी नोटिस चस्पा किए गए।
अवैध निर्माणों को लेकर पहले ही दिए गए थे नोटिस
प्रशासन ने 29 दिसंबर को इलाके में चार अवैध निर्माणों और 20 अवैध बूचड़खानों पर नोटिस लगाए थे। इनमें साफ कहा गया था कि तीन दिन के भीतर सीढ़ियां, रैंप, प्लेटफॉर्म और अन्य अतिक्रमण हटा लिए जाएं, वरना बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। नोटिस की मियाद 31 दिसंबर को पूरी हो गई, लेकिन न तो जवाब दिया गया और न ही अतिक्रमण हटाया गया।
प्रशासन और स्थानीय लोगों के अलग-अलग दावे
शुक्रवार को शुरू हुई कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय और सही सूचना नहीं दी गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर कई बार चेतावनी दी गई थी और यह कार्रवाई पूरी तरह कानून और न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है।
फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।






























