Israel Iran War news: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। Iran और Israel के बीच चल रहा युद्ध सातवें दिन और भी गंभीर होता दिखाई दे रहा है। इस संघर्ष में United States भी इजरायल के समर्थन में ईरान पर हमले कर रहा है। पिछले एक हफ्ते से जारी इस टकराव में हर दिन आम लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं।
अब इस युद्ध को लेकर एक बड़ी आर्थिक चेतावनी भी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला तो दुनिया को भारी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
तेल की कीमतें 150 डॉलर तक पहुंचने का खतरा (Israel Iran War news)
Saad al‑Kaabi, जो Qatar के ऊर्जा मंत्री हैं, उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर मिडिल ईस्ट से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है तो अगले 2 से 3 हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि अगर युद्ध अभी खत्म भी हो जाए, तब भी उत्पादन और सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में कई हफ्ते या महीनों का समय लग सकता है। इसका मतलब यह है कि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।
कतर के LNG प्लांट पर भी पड़ा असर
युद्ध का असर अब ऊर्जा उत्पादन पर भी दिखने लगा है। कतर को अपने बड़े एलएनजी प्लांट Ras Laffan Industrial City में गैस उत्पादन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। इससे वैश्विक गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक कतर और United Arab Emirates मिलकर पाकिस्तान के LNG आयात का 99 प्रतिशत, बांग्लादेश का 72 प्रतिशत और भारत की करीब 53 प्रतिशत जरूरत को पूरा करते हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे आने वाले दिनों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।
भारत ने शुरू किया प्लान-B
ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए India ने भी एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अगर पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित हो तो घरेलू बाजार में गैस की कमी न हो।
सरकार ने हाल ही में बताया कि फिलहाल देश के पास करीब 50 दिन का पेट्रोलियम भंडार मौजूद है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
दुबई में मिसाइल अलर्ट, तनाव बरकरार
युद्ध के सातवें दिन भी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। Dubai में संभावित मिसाइल हमले को लेकर मोबाइल अलर्ट जारी किए गए हैं। वहीं Israel Defense Forces ने दावा किया है कि ईरान की तरफ से कई मिसाइलें दागी गईं, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
हवाई सेवाओं पर भी असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते खतरे का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ रहा है। भारतीय एयरलाइन IndiGo ने मिडिल ईस्ट और Istanbul की उड़ानों के लिए 31 मार्च तक फ्री कैंसिलेशन की सुविधा बढ़ा दी है। वहीं SpiceJet ने United Arab Emirates में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए 14 विशेष उड़ानें चलाने की घोषणा की है।
युद्ध में बढ़ता मानवीय नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ है। वहां 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। Lebanon में करीब 70 लोगों की जान गई है, जबकि इजरायल में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
अमेरिका ने भी अपने छह सैन्य कर्मियों के मारे जाने की जानकारी दी है। सुरक्षा कारणों से U.S. Embassy Kuwait ने अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, समुद्री सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर पड़ेगा। खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ने से दुनिया की ऊर्जा सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में मिडिल ईस्ट का यह युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
