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Inspector Premveer Rana: रिटायर्ड इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर आय से अधिक संपत्ति का केस, 2.92 करोड़ की संपत्ति कैसे जुटाई?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 01 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 01 Oct 2025, 12:00 AM

Inspector Premveer Rana: उत्तर प्रदेश पुलिस के दो अधिकारियों की कमाई और खर्च की सच्चाई जब सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच में सामने आई, तो सब चौंक गए। एक तरफ जहां रिटायर्ड इंस्पेक्टर प्रेमवीर सिंह राणा पर लगभग 3 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ देवरिया में तैनात हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव की आय और खर्च में भी बड़ा अंतर मिला है। इन दोनों मामलों में अब सतर्कता अधिष्ठान ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच तेज़ कर दी गई है।

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इंस्पेक्टर प्रेमवीर सिंह राणा पर 2.92 करोड़ की अवैध संपत्ति का आरोप- Inspector Premveer Rana

मेरठ यूनिट की जांच में सामने आया कि बागपत जिले के निरपुड़ा गांव के निवासी इंस्पेक्टर प्रेमवीर सिंह राणा ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। यह जांच उनके शामली के कैराना थाने में तैनाती के दौरान शुरू की गई थी।

जांच में सामने आया कि उनकी कुल वैध आय थी 1,65,36,556 रुपये, जबकि उन्होंने इस अवधि में 4,57,42,602 रुपये खर्च किए। यानी, उन्होंने करीब 2.92 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए, जिसका कोई साफ़ स्रोत नहीं मिला।

इस रिपोर्ट के आधार पर अब सतर्कता अधिष्ठान ने उनके खिलाफ मेरठ सेक्टर में भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। हालांकि अब वो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। इस केस की रिपोर्ट सतर्कता अधिष्ठान के इंस्पेक्टर कृष्णवीर सिंह ने तैयार की थी, जो 21 फरवरी 2024 को शासन को भेजी गई थी।

हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव पर 16.25 लाख रुपये अधिक खर्च का मामला

दूसरी ओर, देवरिया के भलुअनी थाने में तैनात हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश यादव पर भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ है। गोरखपुर यूनिट की जांच में सामने आया कि उन्होंने अपनी सैलरी और वैध स्रोतों से 73,29,359 रुपये की आय अर्जित की, लेकिन उसी दौरान उन्होंने 89,54,784 रुपये खर्च किए।

यानी, उनकी कमाई से 16,25,425 रुपये अधिक खर्च का हिसाब नहीं मिल सका। जब विजिलेंस की टीम ने उनसे पूछताछ की, तो वो संतोषजनक जवाब या दस्तावेज नहीं दे सके। इसके बाद गोरखपुर सेक्टर में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

यह मामला 2023 में शासन को मिली शिकायत के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद गोरखपुर यूनिट ने जांच की जिम्मेदारी ली।

क्या है आगे की प्रक्रिया?

इन दोनों मामलों में भ्रष्टाचार की पुष्टि हो चुकी है और अब संपत्तियों की कानूनी जांच के साथ-साथ संपत्ति ज़ब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। फिलहाल दोनों अधिकारियों के बैंक खातों, ज़मीन-जायदाद और अन्य निवेशों की भी समीक्षा की जा रही है।

यूपी पुलिस की छवि पर असर

ये दोनों मामले इस बात का संकेत हैं कि कैसे पुलिस विभाग में अंदरूनी स्तर पर भी पारदर्शिता और ईमानदारी की ज़रूरत है। जब आम लोगों को सुरक्षा देने वाले अधिकारी खुद भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो सवाल उठना लाज़मी है। हालांकि सतर्कता अधिष्ठान की सक्रियता यह भी दिखाती है कि सिस्टम में सफाई की प्रक्रिया चालू है।

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