Trending

धारा 452: अगर कोई आपके घर में घुसकर हमला करता है तो इस धारा के तहत होती है भयंकर कार्रवाई

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Dec 2023, 12:00 AM | Updated: 14 Dec 2023, 12:00 AM

लोग सुकून से रहने के लिए घर बनाते हैं और कहा जाता है कि घर सबसे सुरक्षित जगह होती है जहाँ पर बिना किसी के इजाजत के आप रह सकते हैं लेकिन अगर आपके घर में रहने के दौरान कोई दूसरा बाहरी व्यक्ति आपके घर में घुसकर आपको परेशान करें या आपके ऊपर हमला करें या गलत तरीके से दबाव बनाता है तो उसे IPC की धारा 452 के जरिए मुकदमा दर्ज हो सकता है साथ इस धारा के तहत सजा भी मिलेगी. वहीं इस पोस्ट एक जरिए हम आपको धारा 452 क्या है और इस धारा के तहत सजा और जमानत का क्या प्रवधान क्या है इस बात की जानकरी देने जा रहे हैं.

Also Read- धारा 499 क्या है, कब लगती है और क्या है इससे बचने का प्रावधान ?. 

जानिए क्या है धारा 452

आईपीसी की धारा 452 के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के घर में जबरदस्ती घुसता है या गलत तरीके से दबाव बनाता है साथ ही चोट पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसके ऊपर धारा 452 के तहत केस दर्ज हो सकता है. वहीं यह धारा किसी भी ऐसे व्यक्ति को सजा प्रदान करती है, जो घर-गृहस्थी का काम करता है. वहीं घर और गृहस्थी में कोई व्यक्ति उसे चोट पहुंचाने या किसी अन्य पर हमला करता है तब भी ये इस धारा के तहत केस दर्ज होगा. वहीँ अगर जाँच में आरोप करने वाला शख्स आरोपी साबित होता है तो उसे धारा 452 के तहत सजा मिलेगी.

इसी के साथ इस धारा में भारतीय दंड संहिता की धारा 441 का अपराध शामिल है, जिसमें आपराधिक ट्रेसपास (अतिचार) के अपराध का वर्णन किया गया है आपराधिक ट्रेसपास का मतलब ये हैं कि एक व्यक्ति जो किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति पर बिना किसी अधिकार के अपना वैध अधिकार या बिना किसी अनुमति के अपना खुद का नियंत्रण स्थापित करता है, तो ऐसा व्यक्ति आपराधिक ट्रेसपास का अपराध करता है और इस मामले में धारा 452 लागू होती है और इसी धारा के तहत सजा मिलेगी.

सजा और जमानत का क्या है प्रावधान 

इस धारा को लगाने का मुख्य बिंदु यह होता है कि जब कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के घर में घुसकर जबरन अत्याचार मारपीट का इरादा रखता है तो उसे इस धारा के अंतर्गत दोषी करार दिया जाता हैं।

भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के अनुसार जब दोषी करार दिया जाता है, तो उसे 7 वर्ष + जुर्माना की सजा का प्रावधान करती है। वहीं ऐसे अपराधों मैं समझौता नहीं किया जा सकता और एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और इस इस धारा में जमानत मजिस्ट्रेट के द्वारा दी जाती है.

Also Read- 50 रूपये से ज्यादा धन राशि का नुकसान करने पर लगती है धारा 427, जानिए पूरी जानकारी.

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2025- All Right Reserved. Designed and Developed by  Marketing Sheds