India-China Tension: भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के प्रतिनिधिमंडल से हालिया मुलाकात को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस बैठक पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। मंगलवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और आरएसएस पर सीधा हमला बोला और कई तीखे सवाल उठाए।
“झुका हुआ प्रधानमंत्री देश स्वीकार नहीं करेगा” (India-China Tension)
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि “नरेंद्र मोदी की आंखें नीचे हैं, हाथ बंधे हैं और सिर झुका हुआ है। यह देश किसी ऐसे प्रधानमंत्री को स्वीकार नहीं करेगा जो किसी भी देश के सामने नतमस्तक हो जाए।” उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश के सामने सरकार का रवैया कमजोर दिखाई देता है, जबकि सार्वजनिक मंचों पर मजबूत छवि पेश की जाती है।
⦿ जब BJP-RSS के लोग चीन के साथ बैठक करते हैं, तो क्या देश से जुड़े ये मुद्दे उठाते हैं?
अगर उठाते हैं- तो वहां से क्या जवाब आता है?
⦿ भारत को चीन की तरफ से जो नुकसान होता है, वो इन बैठकों की वजह से होता है, या इन बैठकों के बावजूद होता है?
⦿ चीन के साथ व्यापार का जो भारी… pic.twitter.com/9Z2plpZ999
— Congress (@INCIndia) January 13, 2026
यह फोटो BJP दफ्तर की है
BJP के नेता और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बीच मीटिंग हो रही है
ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया
गलवान में हमारे जांबाज़ों की शहादत हुई
चीन लद्दाख में अतिक्रमण किए बैठा है
अरुणाचल में गांव बसा रहा है
और यहाँ गलबहैया चल रही… pic.twitter.com/oMUr0QsyKd
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) January 13, 2026
BJP पर दोहरे रवैये का आरोप
कांग्रेस नेता ने बीजेपी की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि “गिरगिट को भी बीजेपी ने एक रंग सिखा दिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग चीन को लाल आंख दिखाने की बात करते थे, वही आज चीन की पार्टी के लिए लाल कारपेट बिछा रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के लोग सत्ता में आने से पहले भी चीन जाते रहे हैं और अब सत्ता में रहते हुए भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बैठक कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या इन बैठकों में देशहित से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं या नहीं।
मोदी सरकार में विदेश नीति ‘डांवाडोल’ है।
चीन ने डांटा, तो अमेरिका के पास चले गए… अमेरिका ने कुछ कहा, तो चीन के पास चले गए। सरकार को समझना होगा कि ये विदेश नीति है, बच्चों का खेल नहीं।
मोदी सरकार लोगों को कहती है कि चीन का सामान मत खरीदो और फिर खुद इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में चीन… pic.twitter.com/Zdx9cMSn8L
— Congress (@INCIndia) January 13, 2026
कांग्रेस को मीटिंग से नहीं, ढोंग से परेशानी
पवन खेड़ा ने साफ किया कि कांग्रेस को किसी भी राजनीतिक दल के दूसरे देश की पार्टी से मिलने पर आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी परेशानी इस बात से है कि बीजेपी सालों तक कांग्रेस पर चीन के साथ MOU साइन करने का आरोप लगाती रही और अब खुद वही काम कर रही है।” उन्होंने बीजेपी पर पाखंड और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
पीएम मोदी और चीन रिश्तों पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के चीन के साथ संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री देशवासियों से चीनी सामान न खरीदने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार चीनी कंपनियों से स्मार्ट मीटर खरीद रही है।
उन्होंने गलवान घाटी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि “गलवान में हमारे 20 जवान शहीद हुए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी पर इसका कोई असर नहीं दिखा।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीन भारत के नक्शे में बदलाव करता है और सरकार केवल उसके ऐप्स बैन करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है।
कांग्रेस के सीधे सवाल
कांग्रेस नेता ने बीजेपी और सरकार से कई अहम सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि क्या CPC के साथ हुई बैठक में गलवान, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई? क्या कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर चीन के दावों पर बात की गई?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन पाकिस्तान की मदद कर रहा था, तो क्या इस पर कोई चर्चा हुई? इसके अलावा उन्होंने पूछा कि जब चीन ने पाकिस्तान को PL-15 मिसाइलें दीं और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए, तो फिर चीन की शर्तों को मानते हुए मानसरोवर यात्रा क्यों शुरू की गई।
सुप्रिया श्रीनेत का हमला
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बीजेपी दफ्तर की दो तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि इनमें बीजेपी नेताओं और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हो रही है।
सुप्रिया ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया, इसके बावजूद बीजेपी नेताओं की चीन की पार्टी से मुलाकात कई सवाल खड़े करती है।
शक्सगाम घाटी और नया विवाद
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा कथित निर्माण कार्यों को लेकर भी राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस का आरोप है कि चीन CPEC के नाम पर इस इलाके में निर्माण कर रहा है, जबकि भारत इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है।
सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा कि लद्दाख के बाद अब चीन शक्सगाम घाटी तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि “चीन इतनी हिम्मत कैसे दिखा रहा है और उसी समय बीजेपी नेता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ बैठकें कर रहे हैं?”
‘अरुणाचल में गांव, दिल्ली में बैठकें’
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि चीन एक तरफ अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा रहा है, लद्दाख में अतिक्रमण कर चुका है और गलवान में भारतीय सैनिकों की शहादत हुई, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में चीन की पार्टी के साथ राजनीतिक बैठकें हो रही हैं। उन्होंने मीडिया के एक हिस्से पर भी सवाल उठाया कि इस बैठक पर बीजेपी से सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे।
BJP का जवाब
बीजेपी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह बैठक अंतर-पार्टी संवाद का हिस्सा थी। बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने X पर जानकारी दी कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल, उप मंत्री HE सुन हैयान के नेतृत्व में, बीजेपी मुख्यालय आया था। उन्होंने कहा कि इस दौरान पार्टी स्तर पर संवाद आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई और इसमें भारत में चीनी राजदूत भी शामिल थे।
पुराने MOU विवाद की वापसी
इस पूरे विवाद ने 2008 के उस MOU की याद दिला दी है, जिस पर कांग्रेस और CPC के बीच हस्ताक्षर हुए थे। 2020 में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसी मुद्दे पर कांग्रेस पर राष्ट्रीय हित से समझौता करने का आरोप लगाया था। अब कांग्रेस उसी मुद्दे को पलटते हुए बीजेपी पर सवाल उठा रही है।
शक्सगाम घाटी का रणनीतिक महत्व
शक्सगाम घाटी भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है। यह सियाचिन ग्लेशियर के करीब है और 1963 में पाकिस्तान ने इसे अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करता। विशेषज्ञों के मुताबिक, यहां चीन का निर्माण कार्य भारतीय सीमाओं की सैन्य निगरानी को और मजबूत कर सकता है।
कुल मिलाकर, चीन के साथ बीजेपी की मुलाकात ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है, जिसमें आने वाले दिनों में और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।




























