India-Bangladesh news: 1971 के ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट रुख अपनाया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की सेना पर ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान बड़े पैमाने पर नरसंहार करने का आरोप लगाया था। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बांग्लादेश में स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है और 25 मार्च को ‘नरसंहार दिवस’ के रूप में याद किया गया।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा | India-Bangladesh news
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में साफ कहा कि भारत बांग्लादेश की न्याय की मांग का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान पाकिस्तान की सेना द्वारा किए गए अत्याचारों से पूरी दुनिया परिचित है। इसमें लाखों निर्दोष लोगों की योजनाबद्ध हत्या हुई और महिलाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि उस समय हालात इतने भयावह थे कि लाखों लोग अपनी जान बचाने के लिए भारत में शरण लेने को मजबूर हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था, लेकिन पाकिस्तान आज भी इन आरोपों से इनकार करता है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का कड़ा बयान
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 25 मार्च को याद करते हुए इसे देश के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उस रात पाकिस्तानी सेना ने ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के नाम पर निहत्थे लोगों के खिलाफ बेहद क्रूर कार्रवाई की थी। यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नरसंहार था, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया।
उन्होंने इस मौके पर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने बांग्लादेश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान की।
1971 का पूरा घटनाक्रम क्या था?
1971 में उस समय के पाकिस्तान के सैन्य शासक याह्या खान ने देश के पूर्वी हिस्से (आज का बांग्लादेश) में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। इसके बाद वहां के नेताओं और आम नागरिकों के खिलाफ कड़ा दमन शुरू हुआ।
इन हालातों के बीच अवामी लीग के नेता शेख मुजीबुर रहमान ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। इस घोषणा को अगले ही दिन भारतीय सीमा के पास एक रेडियो स्टेशन से मेजर जिया उर रहमान ने पढ़कर सुनाया, जिससे आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा मिली।
इतिहास और वर्तमान का कनेक्शन
गौरतलब है कि जिया उर रहमान के बेटे तारिक रहमान हाल ही में हुए चुनावों में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ ऐतिहासिक संदर्भ में ही नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है।
भारत का रुख क्यों अहम है?
भारत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 1971 के युद्ध और बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका अहम रही थी। उस समय लाखों शरणार्थियों को भारत ने शरण दी थी और बाद में सैन्य स्तर पर भी हस्तक्षेप किया था। आज जब बांग्लादेश उस दौर की घटनाओं को फिर से याद कर रहा है, तो भारत का समर्थन दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, 1971 के घटनाक्रम को लेकर भारत और बांग्लादेश एक ही पेज पर नजर आ रहे हैं। जहां बांग्लादेश अपने इतिहास के दर्दनाक अध्याय को याद कर रहा है, वहीं भारत ने भी साफ कर दिया है कि वह उन घटनाओं को लेकर सच्चाई और न्याय के साथ खड़ा है।





























